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नेपाल से आई तबाही हो या फिर बिहार में आई बाढ़, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तत्परता की हो रही तारीफ

बाढ़ तो बिहार के लिए शाप की तरह है और हर साल तबाही मचाना इसकी नियति बन चुकी है, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि इस बार सम्राट चौधरी की सरकार ने समय रहते सक्रियता दिखाई और पहले से तैयारी की गई थी. बाढ़ पीड़ितों ने भी सरकार के इस प्रयास को सराहा है.

Written By Sunil Mishra
Published: Sep 08, 2026, 04:39 PM IST | Updated: Sep 08, 2026, 04:52 PM IST
Image Credit: वैशाली के राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद भोजन परोसा. (Video Grab)
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गंगा नदी के उफान और नेपाल की नदियों से आ रही बाढ़ के चलते बिहार के करीब 12 से 13 जिलों के लोगों का हाल बुरा हो गया है. बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है. संकट की इस घड़ी में सम्राट चौधरी की सरकार ने जो तत्परता दिखाई है, उसकी जमकर तारीफ हो रही है. बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी की तस्वीरें काफी वायरल हो रही हैं. एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने वैशाली और सारण जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का ​दौरा किया था और बाढ़ शिविरों का निरीक्षण भी किया था. इससे पहले, नेपाल में जो तबाही आई थी, उस समय भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गजब की तत्परता दिखाते हुए संबंधित जिलों के डीएम को सतर्क कर दिया था और सामुदायिक किचन को भी एक्टिवेट कर दिया गया था.

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों से सीधा संवाद किया और वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली. उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को खुद भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर खाना भी खाया.

उन्होंने आंगनबाड़ी और शैक्षणिक शिविरों का भी जायजा लिया. इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविरों में उपलब्ध कराए जा रहे त्वरित उपचार और पशु अस्पतालों में दवाइयां और पशु चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने बाढ़ में मरने वालों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की.

बाढ़ पीड़ितों को कोई परेशानी न हो: सम्राट चौधरी

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने न केवल राहत शिविरों में दी जा रहीं सुविधाओं के बारे में जानकारी ली, बल्कि पीड़ित परिवारों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाने का काम किया.

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, राज्य में 12 राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है, जहां 7,368 बाढ़ प्रभावितों के रहने, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. प्रभावित इलाकों में 238 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध है.

अब तक 5.12 लाख थाली भोजन बाढ़ प्रभावितों के बीच बांटी जा चुकी है. जरूरतमंद परिवारों के बीच 92,600 पॉलीथिन शीट और 19,100 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए हैं. राहत एवं बचाव कार्य के लिए 1,740 नावों की व्यवस्था की गई है. प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और मदद के लिए SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें तैनात की गई हैं.

क्या कहते हैं बाढ़ पीड़ित?

वैशाली के रहने वाले बाढ़ पीड़ित नरेश भगत कहते हैं कि बाढ़ के इस मुश्किल समय में सरकार की ओर से हमारे लिए भोजन और दवाइयों की समुचित व्यवस्था की गई है. पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की गई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी स्वयं हमारे बीच आए और हमें राहत सामग्री बांटी. इस कठिन परिस्थिति में सरकार से मिले सहयोग और राहत के लिए उनका हृदय से आभार.

पटना के बाढ़ पीड़ित त्रिभुवन राय ने बताया, बाढ़ राहत शिविर में भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है. साथ ही, पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. बाढ़ पीड़ितों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद.

पटना की ही संध्या देवी कहती हैं, बाढ़ राहत शिविर में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. मेरे बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन और दूध मिल रहा है. बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर और समुचित सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए उनका शुक्रिया.

पटना के ही सूर्यनारायण कहते हैं कि मैंने अपने जीवन में कई बार बाढ़ देखी है, लेकिन इस बार जैसी बेहतर और व्यवस्थित तैयारियां बहुत कम देखने को मिली है. सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री स्वयं पूरी व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रहे हैं. दवाई से लेकर मवेशियों के खान-पीने की सब व्यवस्था है.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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