)
भारतीय जनता पार्टी ने हरीश द्विवेदी को बिहार का प्रभारी महासचिव बनाया है. हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश के बस्ती से पूर्व सांसद रह चुके हैं. उनकी गिनती पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों में होती है. वे संगठन में गहरी पकड़, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि और चुनावी प्रबंधन के लिए जाने जाते हैं. इसलिए पार्टी आलाकमान ने उन्हें राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य बिहार का प्रभारी महासचिव बनाया गया है. हालांकि, उन्हें ऐसे समय में जिम्मेदारी मिली है, जब नई पीढ़ी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें पार्टी से जोड़ना टेढ़ा काम है. खासतौर से दिल्ली में कॉकरोच आंदोलन के बाद से युवा पीढ़ी में भारतीय जनता पार्टी से दुराव देखने को मिला है, लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जीत ने इस दावे को खारिज कर दिया है. फिर भी नैरेटिव के लेवल पर यह एक बड़ी चुनौती जरूर है.
हरीश द्विवेदी के बारे में
जन्म: 22 अक्टूबर, 1973 को बस्ती जिले के तेलियाजोत गांव में.
पिता: स्व. साधुशरण दुबे.
शिक्षा: दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर से राजनीतिशास्त्र में परास्नातक
पहचान: प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में गिनती, गंभीर और शांत प्रकृति के नेता और विवादों से दूर का नाता
राजनीतिक सफर: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजीति में एंट्री, भाजयुमो में विभिन्न संगठनात्मक पदों पर रहे.
2024 का चुनाव हारने के बाद गुम हो गए थे
2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद हरीश द्विवेदी लगभग खो से गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने जब महासचिवों की लिस्ट जारी की तो उनका नाम निकल आया. भाजयुमो के राष्ट्रीय प्रभारी रह चुके हरीश द्विवेदी कई राज्यों के सह प्रभारी और प्रभारी की भूमिका संभाल चुके हैं. इसके अलावा, लोकसभा के सांसद रहते हुए हरीश द्विवेदी याचिका समिति के चेयरमैन रह चुके हैं. सड़क परिवहन, एनर्जी, सूचना एवं प्रौद्योगिकी और वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समितियों के सदस्य रह चुके हैं.
बिहार की कमान दिए जाने के रणनीतिक कारण
हरीश द्विवेदी भोजपुरी भाषी हैं और इस लिहाज से बिहार के लोगों से कनेक्ट होने में उन्हें कोई समस्या नहीं होगी. इसके अलावा वे भोजपुरी बेल्ट और बिहार की जटिल राजनीति, भाषा और मिजाज से वाकिफ हैं.
बिहार की राजनीति में उनके सामने नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा से समन्वय बैठाने की चुनौती होगी.
बिहार के युवाओं को पार्टी से जोड़ने का कठिन टास्क भी उन पर होगा. हाल ही में बिहार के युवा पटना और जिला मुख्यालयों की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते देखे गए थे. इनको साधना भी हरीश द्विवेदी के लिए कम बड़ा काम नहीं होगा.
सबसे महत्वपूर्ण यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर सवर्णों में भारी नाराजगी है और बिहार इससे अछूता नहीं है. यह नैरेटिव बन रहा है कि भाजपा का कोर सवर्ण वोटर उससे दूर हो रहा है और अगर ऐसा हुआ तो पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. रहीश द्विवेदी के सामने बड़ा टास्क होगा कि वे पार्टी के कोर वोटरों को जोड़े रखें.