जमुई पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामलाः X अकाउंट CM का, FIR हुई CMO के स्टेनोग्राफर पर
जमुई यौन उत्पीड़न मामले की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में पुलिस ने सीएम कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है.
मुख्यंमत्री सम्राट चौधरी के एक्स अकाउंट से जमुई पीड़िता की तस्वीर शेयर किए जाने के मामले में शुक्रवार (25 सितंबर) को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. लड़की नाबालिग होने के कारण राजद ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए मोर्चा खोल दिया. राजद सांसद मीसा भारती इस मामले को लेकर सचिवालय थाना में धरने पर बैठी रहीं. उन्होंने पुलिस पर मामला नहीं दर्ज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो एक सांसद हैं फिर भी मामला दर्ज नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे में थाने में आम आदमी का क्या हाल होता होगा. देररात तक चले इस ड्रामे के बाद पुलिस ने CMO स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया.
स्टेनोग्राफर पर पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज
CMO स्टेनोग्राफर के खिलाफ POCSO Act की धारा 23, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 73 और IT Act की धाराओं 66(E) और धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. FIR में कहा गया कि जमुई कांड की पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर X प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई, जिसके बाद वह पोस्ट अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित हो गई.
CMO स्टेनोग्राफर पर तस्वीर शेयर करने का आरोप
इससे पीड़िता की निजता एवं गरिमा प्रभावित होने के साथ-साथ उसकी पहचान उजागर होने की स्थिति पैदा हुई. FIR के लिए दिए गए आवेदन में कहा गया कि इस मामले की जांच में पाया गया कि CM कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद ने पीड़िता की तस्वीर शेयर की थी.
CM पर कार्रवाई को लेकर अड़े तेजस्वी
इस मामले में तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के ट्विटर हैंडल से नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर शेयर करके, उनकी पहचान उजागर करके गंभीर अपराध किया है.
तेजस्वी ने कहा कि 24 घंटे बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई और ना ही मुख्यमंत्री ने इस मामले में माफी मांगी है. उन्होंने आगे कहा कि अगर मुख्यमंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो फिर पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अंतर्गत हम कानूनी विकल्प तलाश सभी पक्षों को कठघरे में खड़ा करेंगे.