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बिहार में नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें, नितिन गडकरी और सम्राट चौधरी की मौजूदगी में MoU साइन, विपक्ष ने उठाए सवाल

बिहार में नदियों के गाद से सड़क निर्माण पर केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच समझौता हुआ है. अब इस पर राजद और कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. विपक्ष ने इस MoU को भ्रष्टाचार का नया फॉर्मूला बताया, तो वहीं जदयू-बीजेपी विपक्ष पर पलटवार किया है और कहा कि इससे बिहार का विकास होगा

बिहार में नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें, नितिन गडकरी और सम्राट चौधरी की मौजूदगी में  MoU साइन, विपक्ष ने उठाए सवाल
Image Credit: बिहार में नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें (Photo-AI)

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को मुलाकात की. दोनों की उपस्थिति में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए. दोनों सरकारों का उद्देश्य है कि नदियों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जाए और निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में किया जाए.

इसका मतलब हुआ कि बिहार में अब नदियों की गाद से सड़कें बनेंगी. बस, इसको लेकर बिहार में राजनीति भी शुरू हो गई है. राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि 2010 के करीब में उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे. इसी तरह की योजना बिहार में लागू करने के लिए एमओयू साइन किया गया था. केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर नदियों के गाद निकालने और नदियों को आपस में जोड़ने की बात सामने आई थी. मगर, सारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, क्योंकि इस तरह के कार्य धरातल पर दिखते नहीं हैं और खासतौर से जो बिहार में डबल इंजन की सरकार है. यह भ्रष्टाचार को और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाली सरकार है.

राजद प्रवक्त ने कहा कि बिहार में सड़कों की हालत जितनी जर्जर हो गई है, उसके संबंध में लोगों का ध्यान भटकाना ही चाहते हैं और जो पुल-पुलिया धंस रहे हैं. भागलपुर से लेकर अन्य जिलों में जो पुल धंसे हैं, उनके संबंध में बातें नहीं हों, इसलिए यह गाद के मामले को और गाद के माध्यम से सड़कों के निर्माण की बातें कर रहे हैं. यह कहीं न कहीं सरकार के स्तर से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक नया फार्मूला है.

वहीं, जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया. उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गाद प्रबंधन को लेकर अनेक अवसरों पर दिया गया बयान आप देख लें. उन्होंने राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की भी बात की थी. राज्य सरकार ने भी इस दिशा में काफी महत्वपूर्ण पहल की है, नीतिगत तौर पर सहमति भी बनी है और अब यह अगली छलांग है.

आगे उन्होंने कहा कि गाद प्रबंधन के जरिए नदियों के अंदर का जो भी गाद है, उसे बाहर निकाला जाए और केंद्रीय सड़क निर्माण मंत्रालय की ओर से स्वीकृत परियोजनाओं में अगर उस गाद का इस्तेमाल किया जाए, तो सड़कों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और नदियों के प्रबंधन की दिशा में भी यह एक सराहनीय पहल है. इसीलिए कुल मिलाकर यह एक ऐतिहासिक निर्णय है.

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह भी हमें स्मरण करना चाहिए कि 2010 में उन्होंने बात कही थी, लेकिन विपक्ष का मतलब यूपीए की सरकार थी और यूपीए की सरकार की मदद नहीं मिल पाई. इस बात को भी विपक्ष को स्वीकार कर लेना चाहिए और प्रायश्चित करना चाहिए. आज जब अच्छा कार्य हो रहा है, तो इसकी सराहना करें, नहीं तो उनके जख्मों पर नमक छिड़कना हम भी जानते हैं.

बीजेपी के पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली गए थे. दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से उनकी मुलाकात हुई. उनके बीच एक समझौता, कह सकते हैं कि एमओयू हुआ है, जिसके तहत नदियों के अंदर जो गाद भरता है, जिसके कारण बहुत सारी परेशानियां उत्पन्न होती हैं, बाढ़ आते हैं, पानी का स्तर ऊपर हो जाता है और जिसके कारण हमारे यहां बाढ़ का बहुत बड़ा प्रकोप होता है. उन गादों को हटाने का, उनको निकालने का और उन गादों को निकालकर सड़कों में प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने कहा कि एनएचडीपी के तहत कई सारी एक्सप्रेसवे सड़कें और फोर लेन, सिक्स लेन की सड़कें बन रही हैं, उन सड़कों में उस गाद का प्रयोग भी होगा, जिसका लाभ सड़क निर्माण में भी मिलेगा. साथ-साथ नदियों की गहराई बढ़ने से पानी का बहाव भी ठीक रहेगा, पानी का जमाव भी होगा और बाढ़ के प्रकोप से भी कहीं न कहीं निजात प्राप्त होगी. बिहार सरकार और केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्री के बीच यह एक अच्छी और बेहतर पहल की गई है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अजय पासवान ने कहा कि बिहार सरकार और भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बीच नदियों के गाद को लेकर जो समझौता हुआ है, क्या इस समझौते में कोई वैज्ञानिक सर्वे हुआ है? गंगा, गंडक और बागमती जैसी संवेदनशील नदियों की तलहटी से जो गाद निकाला जाएगा, उससे कटाव किस तरफ होगा? बाढ़ का सर्वेक्षण बाद में कैसे होगा? तो इन सारे प्रबंधन के बगैर अगर एमओयू साइन होता है, तो इसका नुकसान बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में और ज्यादा होगा.

रिपोर्ट: रुपेंद्र श्रीवास्तव

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Shailendra

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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