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न केमिकल, न प्लास्टिक... गोबर से जगमगाएगी दिवाली, संगमनगरी में तैयार हो रहे इको-फ्रेंडली सजावटी सामान

संगमनगरी प्रयागराज में गाय के गोबर से दीपक ही नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां भी तैयार की जा रही हैं.

न केमिकल, न प्लास्टिक... गोबर से जगमगाएगी दिवाली, संगमनगरी में तैयार हो रहे इको-फ्रेंडली सजावटी सामान
Image Credit: Z Creative (AI Image)

दीपावली का त्योहार नजदीक है और बाजार में सजावटी सामान की रौनक बढ़ने लगी है, लेकिन संगम नगरी प्रयागराज में इस बार दीपावली पर कुछ अलग और खास देखने को मिल रहा है. यहां गाय के गोबर से न सिर्फ दीपक बनाए जा रहे हैं, बल्कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों के साथ स्वास्तिक और रिद्धि-सिद्धि भी तैयार की जा रही हैं. गोबर से बने इन उत्पादों के जरिए एक तरफ जहां भारतीय परंपरा और धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है. वहीं, दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश भी दिया जा रहा है.

स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश    

दरअसल, प्रयागराज के कालिंदीपुरम में गाय के गोबर को उपयोगी बनाकर उससे आकर्षक और पारंपरिक वस्तुएं तैयार की जा रही हैं. यहां रहने वाली आभा सिंह और उनकी टीम की मेहनत से गोबर के दीपक, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की सुंदर मूर्तियां आकार ले रही हैं. इतना ही नहीं, शुभता और समृद्धि के प्रतीक स्वास्तिक के साथ रिद्धि-सिद्धि की आकृतियां भी गोबर से बनाई जा रही हैं.

गोबर का सही उपयोग हो रहा  

खास बात यह है कि इन उत्पादों को दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. बाजार में मिलने वाले पारंपरिक सजावटी सामान के बीच गोबर से बने ये उत्पाद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं. इससे गोबर का सदुपयोग होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं.

पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का संदेश  

दीपावली पर मिट्टी के दीयों के साथ अब गोबर से बने दीपक और धार्मिक सजावटी वस्तुओं को भी एक विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है. इन उत्पादों के जरिए लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया जा रहा है.

गोबर से तैयार की जा रही मूर्तियां    

गोबर से दिए और भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्तियां बनाने वाली आभा सिंह का कहना है कि ये सिर्फ एक उत्पाद नहीं है, बल्कि हमारी परंपरा को भी जीवंत कर रही है. उन्होंने कहा कि आज जो केमिकल या फिर मिट्टी से मूर्तियां बनाई जाती हैं वह पर्यावरण के लिए अनुकूल नहीं हैं, लेकिन गोबर से तैयार किया गया यह दीपक और मूर्तियां पूरी तरह से पर्यावरण को संरक्षित करती हैं. इस उत्पाद में हमारी परंपरा और आस्था का भी प्रतिबिंब दिखाई देता है, जो देखने में भी काफी आकर्षक है.

 

(प्रयागराज से मोहम्मद गुफरान की रिपोर्ट)

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About the Author

Amitesh Pandey

Amitesh Pandey

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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