बिहार एमएलसी चुनाव: तेवर, तीखापन और त्योरियां दिखाते हुए पूरा चुनाव हाईजैक कर लिया अनंत सिंह ने
अनंत सिंह के सभी दलों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं. उन्हें शायद इस बात की टीस है कि जनवरी, 2024 में नीतीश कुमार के विश्वास मत में राष्ट्रीय जनता दल से गद्दारी का इनाम नहीं मिला. अनंत सिंह की नाराजगी को जानकार ललन सिंह और संजय कुमार झा के बीच तनातनी से भी जोड़कर देख रहे हैं.
50 हजार रसगुल्ला बनवाना, 9 मर्डर की बात कबूलकर पलट जाना, पार्टी की ओर से कार्रवाई की चेतावनी को नजरंदाज करना, जन सुराज के पीले गमछे को गाड़ी पर खड़े होकर लहराना और नीतीश कुमार के बहाने लालू प्रसाद यादव को भगवान तुल्य कहकर संबोधित करना अनंत सिंह जैसा नेता ही कर सकता है. पूरे विधान परिषद चुनाव में अनंत सिंह छाए रहे और ऐसा लगा कि उन्होंने सभी आठों विधान परिषद चुनाव को हाईजैक कर लिया है. एक अकेले अनंत सिंह के चलते बाकी 7 सीटों पर चल रहे चुनाव की चमक फीकी पड़ गई और पटना स्नातक सीट छाया रहा. खास बात यह रही कि प्रशांत किशोर को अपने प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ी, जितनी कि आम तौर पर एक राजनीतिक दल करता है. अनंत सिंह ने ही वह कसर पूरी कर दी.
अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव का ऐलान होने से पहले ही बाकी रुख अपना रखा था और जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी नीरज कुमार को हराने की एक तरह से कसम खा ली थी. और उस नाते उन्होंने पूरे चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ माहौल बनाए रखने की कोशिश की. पार्टी ने लाख चेतावनी दी, लगा कि अब उन पर कार्रवाई हो जाएगी, लेकिन अनंत सिंह टस से मस नहीं हुए और अनुज सिंह के पक्ष में सभा, रैली और रोड शो के अलावा जन संपर्क तक किया.
अनंत सिंह का ठेठ मगही अंदाज और देसी बोली एक अपील पैदा करती है और वे लोगों से जल्दी कनेक्ट हो जाते हैं. दिन भर में अनंत सिंह की कई खबरें सुर्खियां बनती रहती थीं. मतदान के दिन दोपहर में ही अनंत सिंह ने अनुज सिंह की जीत का दावा करते हुए अपने आवास पर आतिशबाजी करवा दी. यहां तक कि निशांत कुमार जब नीरज कुमार के पक्ष में माहौल बना रहे थे तो अनंत सिंह ने अनुज सिंह के पक्ष में रोडशो कर अपनी ढिठाई का परिचय दे दिया. अनंत सिंह ने तो यह भी ऐलान कर दिया कि नीतीश कुमार न तो हमारे साथ हैं और न ही नीरज कुमार के साथ.
हालांकि, मतदान से एक दिन पहले नीतीश कुमार ने नीरज कुमार के घर पहुंचकर उनका हालचाल जाना. इस पर अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार अपने मन से कहीं नहीं जाते. पार्टी वाला सब जहां ले जाता है, वहां वे जाते हैं. इस तरह जनता दल यूनाइटेड की हर बात की काट उनके पास पहले से मौजूद था. अपनी हाजिरजवाबी और तुनकमिजाजी के लिए जाने जाने वाले अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव में एक तरह से खुद को धुरंधर के रूप में स्थापित कर दिया. अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है. उसके बाद यह भी देखना होगा कि पार्टी उन पर कार्रवाई कर पाती है या नहीं.
अब मतदान खत्म हो चुका है तो सभी की नजरें 27 अक्टूबर पर टिक गई हैं कि रिजल्ट क्या आएगा? हालांकि, अनंत सिंह का आत्मविश्वास सिर चढ़कर बोल रहा है, तभी तो मतदान के दिन दोपहर में ही अनंत सिंह के आवास पर आतिशबाजी कर दी गई. अनंत सिंह ने तो अनुज सिंह के नामांकन के दिन ही 50 हजार रसगुल्ले बनवाकर बांटे थे. धुरंधर स्टाइल में अनंत सिंह ने सभी बाधाओं को पार करते हुए अपने मन की सुनी. पार्टी आलाकमान तो छोड़िए, अनंत सिंह ने तो ललन सिंह की बात भी नहीं मानी. अब 27 अक्टूबर को परिणाम आने के बाद देखना यह है कि पार्टी अनंत सिंह पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाती है या नहीं.