अभी हाल ही में 30 सितंबर को ही विपक्षी इंडिया ब्लॉक की दिल्ली में बैठक हुई थी और वहां से एकजुटता का संदेश दिया गया था, लेकिन जैसे-जैसे नेता अपने अपने राज्यों में पहुंचे, वो संदेश इरेज होता चला गया. अब बिहार को ही लीजिए, विधान परिषद चुनाव होने जा रहे हैं और महागठबंधन में बिखराव होता नजर आ रहा है. विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए तेजस्वी यादव ने राजद के 6 प्रत्याशी एकतरफ उतार दिए थे और अब कांग्रेस ने अपनी ओर से 5 प्रत्याशी उतार दिए हैं. तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के लिए 2 सीटें छोड़ी थीं तो कांग्रेस ने 3 सीटों पर अभी प्रत्याशी नहीं उतारे हैं. महागठबंधन में इस कलह को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के नेता विपक्षी एकता का मजाक उड़ा रहे हैं. दूसरी ओर, राजद ने कांग्रेस से अपने उम्मीदवारों को वापस लेने की अपील की है और यह डर दिखाया है कि इससे एनडीए और बीजेपी को फायदा हो सकता है.
पांच सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: असादुल्लाह खान
READ ALSO: बिहार MLC चुनाव: महागठबंधन में दरार! राजद के खिलाफ कांग्रेस ने 5 सीटों पर उतारे उम्मीदवार
6 सीटों पर राजद के उम्मीदवार
इन सीटों पर कांग्रेस और राजद आ गए आमने-सामने
अब पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और राजद आमने सामने आ गए हैं.
क्या कहना है राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस का?
बिहार कांग्रेस की ओर से विधान परिषद चुनाव में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने पर राजद नेता रणविजय साहू का कहना है,
कांग्रेस को अपने उम्मीदवार वापस लेने चाहिए. बिहार में लड़ाई एक तरफ NDA और दूसरी तरफ महागठबंधन के बीच है. ऐसे में कांग्रेस के अलग उम्मीदवार उतारने से NDA और बीजेपी को फायदा हो सकता है. नेता प्रतिपक्ष की ओर से पहले ही 6 सीटों का ऐलान किया गया था और एक सीट कांग्रेस तो एक वामदलों के लिए छोड़ी गई थी. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दखल देकर उम्मीदवारों को वापस लेना चाहिए. स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच आरजेडी और महागठबंधन की विचारधारा को समर्थन मिल रहा है.
कांग्रेस की पूर्व विधायक प्रतिमा कुमारी ने इस मुद्दे पर कहा,
अगर यही स्थिति रही तो महागठबंधन का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है. उन्हें यही नहीं पता कि यह गठबंधन किन मुद्दों पर टिका है और आखिर कहां जा रहा है. शीर्ष नेतृत्व किन मुद्दों पर गठबंधन करना चाहते हैं, यह हमें नहीं पता.
राजद के विधायक गौतम कृष्णा ने कहा,
लोकतंत्र में आपसी सहमति से दोस्ताना मुकाबला होना आम बात है और असली लड़ाई चुनाव आयोग और देश बचाने को लेकर है. हम लोगों के बारे में एनडीए क्या कहेगा? बहुत जगह लोग चुनाव में फ्रेंडली फाइट करते हैं, लेकिन बात अभी एमएलसी चुनाव से हटकर देश बचाने की है. चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने जा रहे हैं.
जनता दल यूनाइटेड के विधायक श्याम रजक का कहना है,
महागठबंधन कभी बना ही नहीं. सब अपनी ढोल, अपना मंजीरा बजा रहे हैं. यह लोग जनता को गुमराह करने के लिए एकजुटता दिखा रहे हैं. लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, इनमें एकता की कमी है. आप जनता का विश्वास भी यह लोग खो चुके हैं. इन्हें कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है. एनडीए एकजुट है और पूरी एकजुटता के साथ बिहार के सभी एमएलसी सीट पर चुनाव जीतना तय है.
भाजपा विधायक संजय पांडेय ने कांग्रेस और राजद की ओर से प्रत्याशियों को उतारने को लेकर कहा,
महागठबंधन के लोग आपस में ही लड़ रहे हैं. एनडीए एकजुट है और पूरी एकजुटता के साथ बिहार की 8 MLC सीटों पर चुनाव जीतना तय है. यूपीए के लोग पूरी तरह से बिखरे हुए हैं.
बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने MLC चुनाव को लेकर महागठबंधन में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए कहा,
गठबंधन के सभी दलों को अपने हिसाब से फैसला लेने का अधिकार है. कांग्रेस की लड़ाई बीजेपी और NDA के खिलाफ है, न कि गठबंधन के सहयोगी दलों के खिलाफ. कांग्रेस ने अपने जिलाध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करते हुए उम्मीदवार उतारे हैं. जहां इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार होगा, वहां कांग्रेस अपनी ताकत लगाएगी और जहां कांग्रेस का उम्मीदवार होगा, वहां पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी. उम्मीदवार उतारना कांग्रेस का अधिकार है और बीजेपी को मात देना उनकी चुनौती है.
विधानसभा चुनाव वाला हाल न हो जाए महागठबंधन का
बिहार विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस का यह आमना-सामना सिर्फ सीटों का झगड़ा नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर गहरे असंतोष और संवादहीनता को उजागर कर रहा है. विधान परिषद चुनाव के बहाने जेहन में विधानसभा चुनाव, 2025 याद आ रहा है, जब इसी तरह कुछ सीटों पर राजद, कांग्रेस, वाम दल और विकासशील इंसान पार्टी ने मनमाने तरीके से उम्मीदवार उतार दिए थे और करीब दर्जन भर से अधिक सीटों पर फ्रेंडली फाइट की नौबत आ गई थी. विधानसभा चुनाव में विपक्ष ने इसका खामियाजा भी भुगता और न्यूनतम स्कोर पर सिमट गया था. अब देखना यह है कि विधान परिषद चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है.
पटना से रूपेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट के साथ