बिहार में अब गंडक, नारायणी और बागमती समेत तमाम नदियों का जलस्तर घटने लगा है. इससे बाढ़ की मार झेल रहे लोगों ने राहत की सांस ली है. बाढ़ का पानी भले ही कम होने लगा हो, लेकिन प्रशासन के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब संक्रमण और महामारी का खतरा बढ़ने लगा है. गांवों में आवागमन अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है. प्रशासन के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य होने में एक से दो सप्ताह तक का समय लग सकता है. छपरा के मकेर के फुलवरिया समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब सरकारी राहत के साथ सामाजिक संगठनों ने भी मोर्चा संभाल लिया है. कई संगठनों और समाजसेवियों की ओर से बाढ़ पीड़ितों के बीच फल-फ्रूट, पका हुआ भोजन, सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है.
पानी कम होने से मोटरबोट चलाने में आ रही दिक्कत
पानी कम होने से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मोटरबोट के संचालन में भी कई जगह परेशानी सामने आ रही है. ऐसे में प्रभावित गांवों तक पहुंचने के लिए हल्की नावों की व्यवस्था बढ़ाई जा रही है. फुलवरिया में राहत सामग्री लेकर पहुंचे सामाजिक संगठनों के लोगों ने कहा कि बाढ़ के इस संकट में पीड़ित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है. वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी कम होने के बावजूद उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. गांवों में गंदगी, जलजमाव और आवागमन की समस्या बनी हुई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है.
जन-प्रतिनिधि भी मैदान में उतरकर कर रहे हैं मदद
स्थानीय विधायक कृष्ण कुमार मंटू सिंह उर्फ मंटू सिंह ने राहत कार्य में सामाजिक संगठनों के आगे आने का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन लगातार बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह अभियान और मजबूत हो रहा है. वहीं, बिहार स्वर्ण आयोग के अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि बाढ़ के निर्माण और तटबंध से जुड़ी लापरवाही की शिकायतें मिल रही हैं. इन शिकायतों की जांच कराई जाएगी और अगर जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की सक्रियता से बाढ़ पीड़ितों को कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन पानी उतरने के बाद गांवों में बीमारी और संक्रमण से निपटना प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी.
जिला प्रशासन दिन-रात राहत सामग्री बांटने में जुटा
सारण में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन दिन-रात जुटा हुआ है. छपरा मुख्यालय स्थित खेल भवन इन दिनों बाढ़ राहत के लिए सूखा फूड पैकेट तैयार करने का बड़ा सेंटर बना हुआ है. यहां लगातार 24 घंटे फूड पैकेट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित इलाकों में अधिक से अधिक लोगों तक समय पर राहत सामग्री पहुंचाई जा सके. आपदा विभाग के प्रभारी एडीएम प्रमोद कुमार पांडे के नेतृत्व में खेल भवन में फूड पैकेट तैयार करने का काम निरंतर गति से चल रहा है. यहां जीविका दीदियां, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, विकास मित्र, डीलर्स और ट्रेनी कांस्टेबल समेत बड़ी संख्या में कर्मी दिन-रात पैकेजिंग के काम में जुटे हुए हैं.
अब तक 30 हजार से अधिक सूखे फूड पैकेट बांटे गए
राहत पैकेट में बाढ़ प्रभावित परिवारों की तत्काल जरूरत को ध्यान में रखते हुए चूड़ा, गुड़, चना, नमक जैसी खाद्य सामग्री के साथ माचिस और मोमबत्ती जैसी जरूरी चीजें भी पैक की जा रही हैं. तैयार पैकेटों को लगातार बाढ़ प्रभावित प्रखंडों और गांवों में भेजा जा रहा है. जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक 30 हजार से अधिक सूखा फूड पैकेट बाढ़ प्रभावित लोगों तक पहुंचाए जा चुके हैं. वहीं, जरूरत के मुताबिक नए पैकेट तैयार करने का काम लगातार जारी है. खेल भवन में पैकेजिंग का काम रुकने न पाए, इसके लिए कर्मियों की अलग-अलग टीमों के माध्यम से लगातार काम कराया जा रहा है.
दूसरे जिलों से मंगाई जा रही सूखी खाद्य सामग्री
सारण के अलावा दूसरे जिलों से भी बाढ़ राहत के लिए सूखी खाद्य सामग्री मंगाई जा रही है. वैशाली, मुजफ्फरपुर, सिवान और आरा समेत अन्य स्थानों से राहत सामग्री सारण पहुंच रही है, ताकि राहत पैकेट तैयार करने और उनके वितरण की प्रक्रिया लगातार जारी रखी जा सके. प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों तक राहत सामग्री की कमी नहीं होने दी जाए. इसके लिए खेल भवन में पैकेट तैयार करने से लेकर उन्हें संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाने तक की पूरी व्यवस्था लगातार संचालित की जा रही है. वहीं, जिला प्रशासन का राहत पैकेट तैयार करने का यह अभियान फिलहाल लगातार जारी है.
बागमती, नारायणी और गंडक का जलस्तर घटा
मुजफ्फरपुर में बागमती, नारायणी और गंडक का जलस्तर में कमी आई है. इसके बाबजूद गांव में घुसे बाढ़ का पानी लोगों के लिए संकट बना हुआ और लोग ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए हैं. इस वर्ष नेपाल से आने वाली बागमती नदी ने कटरा और गायघाट में तबाही मचाई तो दूसरी ओर नारायणी, गंडक, पारू और साहेबगंज में तबाही मचा दी. इससे दोनों इलाकों के दर्जनों गांव बाढ़ से घिर गए. लोगों को घर में समान छोड़कर अपनी जान बचा ऊंचे स्थान पर जाना पड़ा. फिलहाल, राहत की बात है कि दोनों नदियों के जलस्तर में कमी आई है और लोगों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनके घरों से पानी निकल जाएगी.
DM कुमार गौरव खुद राहत-बचाव कार्य में जुटे
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव खुद लोगों के राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं और लोगों के बीच जा कर राहत सामग्री का वितरण कर रहे हैं. दूसरे ओर लगातार तटबंधों का निरीक्षण कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं. साथ ही लोगों के खाने पीने लिए कई जगहों सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं. लोगों का स्वास्थ जांच के लिए डॉक्टरों की तैनाती की गई है. वहीं, बांध पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए सीटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी और नगर आयुक्त ऋतुराज सिन्हा अपने टीम के साथ बाइक से गस्त कर रहे है. किसी आपात स्थिति के लिए NDRF टीम की भी तैनात है.
सारण से राकेश कुमार और मुजफ्फरपुर से मणितोष कुमार की रिपोर्ट