बिहार के बाढ़ पीड़ितों को CM सम्राट आज देंगे ₹7000, 8 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा पैसा
गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत कई नदियों में पानी बढ़ने से बिहार के 15 जिलों के 49.67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. प्रभावित लोगों की मदद के लिए सामुदायिक रसोई और राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज बड़ी राहत देने वाले हैं.
बिहार में बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों के लिए राहत भरी खबर है. सीएम सम्राट चौधरी आज (मंगलवार, 15 सितंबर) बाढ़ पीड़ित करीब 8 लाख से ज्यादा परिवारों को 7-7 हजार रुपये की आर्थिक मदद देंगे. इस मौके पर दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा भी मौजूद रहेंगे. यह राशि मुख्यमंत्री आवास के संकल्प सभागार से भेजी जाएगी और पैसा सीधे पीड़ित परिवारों के खाते में आएगा. इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार (14 सितंबर) की देर शाम तक जिलों से 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों की पूरी विवरणी मंगा ली है. इन परिवारों को 579.23 करोड़ अनुग्रह सहायता के तौर दिए जाएंगे.
पीड़ित परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री आज सुबह करीब साढ़े 11 बजे एक कार्यक्रम के जरिए 8,27,472 बाढ़ प्रभावित परिवारों को पैसा भेजेंगे. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा करेंगे और इसमें दोनों डिप्टी सीएम (विजय कुमार चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव) मौजूद रहेंगे. इस राशि से बाढ़ के कारण प्रभावित हुए परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद मिलेगी और वे अपनी जरूरी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे. बाढ़ के दौरान घर-गृहस्थी, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों को लेकर प्रभावित परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में सरकार की ओर से सीधे बैंक खाते में भेजी जाने वाली यह सहायता राशि उनके लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
घट रहा नदियों का जलस्तर
वहीं, बिहार में नदियों का जलस्तर में अब गिरावट दर्ज की जा रही है. भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी का जलस्तर कम हो रहा है. हालांकि, कई अन्य जिलों में अब भी गंगा खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. पटना और मुंगेर में गंगा नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है. सुपौल, पूर्णिया और कटिहार समेत कई क्षेत्रों में कोसी नदी का पानी कम हो रहा है, जिससे लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है. जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. नदी का पानी कम होने से कटाव का खतरा बढ़ जाएगा. इसको लेकर NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हैं.