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बिहार कांग्रेस की गुटबाजी दिल्ली पहुंच गई है. दिल्ली स्थित कांग्रेस के मुख्यालय इंदिरा भवन की दहलीज तक यह मामला पहुंच गया है. बिहार कांग्रेस के दो परस्पर विरोधी गुट दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. बागी नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. इसके उलट मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के समर्थक भी नारेबाजी करते हुए एक तरह से शक्ति प्रदर्शन करने लगे. अब बिहार कांग्रेस की गुटबाजी से कांग्रेस आलाकमान की पेशानी पर बल पड़ गए हैं.
पार्टी को गर्त में धकेल रहा मौजूदा नेतृत्व: बागी गुट
मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ धरने पर बैठे बागी गुट के नेताओं ने बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम और प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावुरू के काम के तरीके को लेकर नाराजगी जताई. इस दौरान बागी खेमे ने आलाकमान से तत्काल दखल देने की मांग की. बागी नेताओं ने मौजूदा संगठन के कर्ता-धर्ताओं पर कई तरह के आरोप भी लगाए:
1. बागी नेताओं ने आरोप लगाया कि समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है और खासमखास नेताओं को ही तरजीह दी जा रही है.
2. बागी नेताओं का यह भी आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व की गलत कार्यशैली के चलते पार्टी राजद और अन्य सहयोगी दलों के सामने अपनी सियासी जमीन खोती चली जा रही है.
3. प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि जब तक मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई
बागी कांग्रेस नेताओं ने एक तरफ मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की तो मौजूदा नेतृत्व के समर्थक नेताओं ने उनके खिलाफ काउंटर नारेबाजी करनी शुरू कर दी. इस वजह से कांग्रेस मुख्यालय के सामने विचित्र स्थिति पैदा हो गई. हालात को देखते हुए दिल्ली पुलिस भी सतर्क हो गई और सुरक्षाकर्मियों को वहां मोर्चा संभालना पड़ा.
आने वाले समय के लिए स्थिति चिंताजनक
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार कांग्रेस में इस तरह से आपसी बगावत होना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है. इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल डाउन हो सकता है.
जानकार यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस को इस समय अपने भविष्य की प्लानिंग करनी चाहिए, लेकिन वह आपस में ही उलझ रही है.
कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने जल्दी ही इस मुसीबत से मुक्ति नहीं पाई तो वह सहयोगी दलों के सामने आगे के चुनावों में मोलभाव की स्थिति में नहीं रह जाएगी.
खरगे और राहुल गांधी से मिलना चाहते हैं बागी
बागी नेताओं का कहना है कि राज्य में कांग्रेस की राजनीति केवल कमरे में सिमटकर रह गई है. बागी नेताओं ने बताया कि वे किसी मध्यस्थ से बातचीत करने के बजाय राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलकर बिहार कांग्रेस की हकीकत से रूबरू कराना चाहते हैं. इन नेताओं में बिहार कांग्रेस रिसर्च विंग के पूर्व प्रमुख आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव और पूर्व कांग्रेस युवा अध्यक्ष राजकुमार राजन शामिल हैं. इनमें वे कांग्रेसी भी शामिल हैं, जिन्हें प्रदेश नेतृत्व ने निकाल दिया था या कारण बताओ नोटिस जारी किया था.