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हरीश द्विवेदी की पहली ही बैठक में फैल गया रायता: बीजेपी में शामिल होने गए थे राहुल-बंशीधर, MLC सदस्यता जाने की आ गई नौबत

बीजेपी पिछले कुछ दिनों से नादानियां करती जा रही है. जैसे बांकीपुर से चारा घोटाले के आरोपी के बेटे को टिकट दे दिया और किसी को इस बारे में पहले से पता नहीं था. नवनिर्वाचित दोनों निर्दलीय एमएलसी को पार्टी में शामिल कराने के लिए जलसा का आयोजन कर लिया और वो भी प्रभारी महासचिव की मौजूदगी में.

Written By Sunil Mishra
Published: Nov 02, 2026, 03:13 PM IST | Updated: Nov 02, 2026, 03:15 PM IST
Image Credit: बिहार में प्रभारी महासचिव हरीश द्विवेदी की पहली ही मीटिंग में फैल गया रायता (AI Image)
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बिहार भाजपा के प्रभारी महासचिव हरीश द्विवेदी की पहली ही बैठक में रायता फैल गया. इतना रायता फैला कि अब समेटे नहीं समेटा जा रहा है. विधान परिषद चुनाव में जीते निर्दलीय एमएलसी को बुला लिया गया विधायक दल की बैठक में और भाजपा का पटका भी पहना दिया गया. अब पटका पहने दोनों एमएलसी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की वहीं तस्वीर वायरल हो रही है और उन दोनों की सदस्यता जाने पर आन पड़ी है. अब पार्टी की ओर से दोनों एमएलसी को भाजपा की सदस्यता दिलाने की बात का खंडन किया जा रहा है. राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी भी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली है, लेकिन बीजेपी के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर इन दोनों नेताओं को लेकर पोस्ट किया था, वो अब वायरल होने लगे हैं. खुद जेडीयू प्रत्याशी अभिषेक झा ने डॉ. संजय कुमार जायसवाल और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी का पोस्ट शेयर किया है. संजय जायसवाल का पोस्ट तो ज्यों का त्यों है, लेकिन संजय सरावगी का पोस्ट एडिट कर दिया गया है.

हरीश द्विवेदी बिहार भाजपा प्रभारी के रूप में नियुक्ति के बाद पहली बार शनिवार को पटना पहुंचे थे. इस बैठक में इतना बखेड़ा हो गया कि उन्हें भी जिंदगी भर याद रहेगा. हरीश द्विवेदी आए तो थे भाजपा को मजबूत करने, लेकिन उनकी मीटिंग के बाद एनडीए में रार छिड़ गई. भारतीय जनता पार्टी पर जनता दल यूनाइटेड के नेता हमलावर हैं. दूसरी ओर, बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के खिलाफ 10वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है. राजद और जन सुराज पार्टी इन दोनों नेताओं के खिलाफ सभापति, कोर्ट और चुनाव आयोग जाने की बात कर रहे हैं.  

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क्या है 10वीं अनुसूची का पेंच

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और तिरहुत स्नातक क्षेत्र से जीते क्रमश: राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी चूंकि निर्दलीय हैसियत से अपने अपने क्षेत्र से जीतकर आए हैं, इसलिए वे किसी दूसरे दल में शामिल नहीं हो सकते. हां, विचारधारा के आधार पर समर्थन कर सकते हैं. अब उनके लिए सदस्यता बचाने का कानूनी रास्ता बेहद संकरा हो गया है. बैठक की तस्वीरें और खबरें वायरल हो चुकी हैं. अब वे दोनों नेता सफाई दे रहे हैं. विरोधी दल उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं.

अगर 10वीं अनुसूची के हिसाब से विधान परिषद सचिवालय से उनदोनों सदस्यों की सदस्यता चली जाती है तो बीजेपी में शामिल होने का उनका पूरा दांव उल्टा पड़ सकता है.

सवाल बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर भी उठेंगे कि वे 10वीं अनुसूची जैसी महत्वपूर्ण जानकारी रखने से कैसे चूक गए. भाजपा के रणनीतिकार असहज हैं. अति उत्साह में आकर भाजपाइयों ने न केवल अज्ञानता का परिचय दिया, बल्कि एनडीए में ही जेडीयू से रार छिड़ गई. जिस काम को करके शक्ति प्रदर्शन करने की मंशा थी, वह कानूनी समझ के अभाव में किरकिरी बन गई.

हरीश द्विवेदी की पहली बैठक से उपजा विवाद अब विधान परिषद के सभापति के पटल पर पहुंचने वाला है. दोनों सदस्यों के लिए यही कहा जा सकता है कि 'चौबे जी गए थे छब्बे बनने, दूबे जी बनकर लौट आए.'

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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