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राहुल राज-बंशीधर ब्रजवासी मामले में BJP रणनीतिकारों से कैसे हुई बड़ी चूक, क्या कहती है 10वीं अनुसूची? जानें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील से

बिहार भाजपा के रणनीतिकारों में लगता है सुशील कुमार मोदी जैसे जानकार नेता अब नहीं बचे हैं. जो लोग बचे हैं, वो या तो सतही जानकारी वाले हैं या फिर उनसे सलाह नहीं ली गई. नहीं तो राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी जैसी चूक कैसे हो सकती है.

राहुल राज-बंशीधर ब्रजवासी मामले में BJP रणनीतिकारों से कैसे हुई बड़ी चूक, क्या कहती है 10वीं अनुसूची? जानें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील से
Image Credit: बीजेपी इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है. (AI IMage)

बिहार विधान परिषद चुनाव में बतौर निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा को समर्थन देने के बाद सियासी विवाद गहरा गया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज पार्टी ने दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद मनोज कुमार झा ने रविवार को कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने जाने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होना संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन है और यह अयोग्यता का आधार बन सकता है. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को विधान परिषद के सभापति के सामने उठाएगी और कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएगी. झा ने दावा किया कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से संबंधित पर्ची दिखाई थी. उनका यह भी दावा है कि इस घटनाक्रम के वीडियो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं.

क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता?

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक जैन का कहना है कि 10वीं अनुसूची का पैरा 2(2) ऐसे निर्दलीय चुने गए सदस्य को अयोग्य ठहराता है, जो चुनाव के बाद किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाता है. यह नियम विधान परिषदों और विधानसभाओं, दोनों पर लागू होता है. पैरा 4 के तहत 'विलय' से मिलने वाली छूट निर्दलीय सदस्यों पर लागू नहीं होती.

वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक जैन मानते हैं कि किसी पार्टी में शामिल हुए बिना उसका समर्थन करना या उसके पक्ष में वोट देना, अपने आप में अयोग्यता का कारण नहीं बनता. यह तथ्य का सवाल है, और किसी व्यक्ति के आचरण से यह साबित हो सकता है कि वह किसी पार्टी में 'शामिल' हो गया है.

उनका कहना है कि बाद में अपनी बात से मुकर जाने से स्थिति अपने आप ठीक नहीं हो जाती. अदालतें सदस्य के बाद के स्पष्टीकरण को नहीं, बल्कि उसके आचरण (जैसे सदस्यता फॉर्म, पार्टी नेताओं द्वारा स्वागत, तस्वीरें या पोस्ट, सार्वजनिक बयान) को देखती हैं.

दीपक जैन मानते हैं कि किसी सदस्य की याचिका पर, 10वीं अनुसूची के पैरा 6 के तहत परिषद के सभापति निर्णय लेते हैं. इस निर्णय की सीमित न्यायिक समीक्षा की जा सकती है.

वरिष्ठ अधिवक्ता ने इन मामलों का दिया रेफरेंस

किहोतो होलोहन बनाम ज़ाचिल्हू (1992 Supp (2) SCC 651): इसमें 10वीं अनुसूची को सही ठहराया गया, पैरा 7 (जो अदालती अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाता था) को रद्द कर दिया गया और सीमित न्यायिक समीक्षा की अनुमति दी गई.

जगजीत सिंह बनाम हरियाणा राज्य (2006) 11 SCC 1: यह सबसे सटीक नज़ीर है. इसमें निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस में शामिल होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था; उनके शामिल होने का निष्कर्ष उनके आचरण से निकाला गया था.

जी. विश्वनाथन बनाम अध्यक्ष, तमिलनाडु विधानसभा (1996) 2 SCC 353 और रवि एस. नाइक बनाम भारत संघ (1994 Supp (2) SCC 641): किसी पार्टी की सदस्यता लेने या उसे छोड़ने का निष्कर्ष व्यक्ति के आचरण से निकाला जा सकता है.

महाचंद्र प्रसाद सिंह बनाम सभापति, बिहार विधान परिषद (2004) 8 SCC 747: यह बिहार विधान परिषद के एक सदस्य (MLC) से जुड़ा मामला है, जिसमें दसवीं अनुसूची के तहत सभापति की शक्तियों पर चर्चा की गई है.

सभापति ने सही फैसला नहीं लिया तो कोर्ट जाएंगे: मनोज झा

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद ने भी संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि निर्वाचन के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने वाले निर्दलीय सदस्य को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल इस मामले में चुनाव आयोग भी जाएगा. मनोज झा का कहना है कि भाजपा ने जदयू को कमजोर करने के उद्देश्य से दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने साथ जोड़ा है.

मनोज झा ने कहा कि यदि राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के मामले में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी कोर्ट जाएगी. सभापति के सामने यह तय करने का अवसर है कि वे निष्पक्ष संवैधानिक भूमिका निभाते हैं या नहीं. झा ने भाजपा पर चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक अनैतिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल समर्थन का मामला नहीं, बल्कि जनादेश के सम्मान से जुड़ा सवाल है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी इस मामले में परीक्षा होने वाली है. झा ने कहा कि यदि संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों को संरक्षण दिया गया, तो जनता इसका जवाब देगी.

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी को लेकर जेडीयू में सरगर्मी

नवनिर्वाचित एमएलसी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने या न होने को लेकर जनता दल यूनाइटेड में भी सरगर्मी तेज हो गई है. जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर बिहार के ताजा राजनीतिक हालात से उन्हें अवगत कराया. निशांत कुमार के यूपी मिशन को लेकर भी संजय झा और उमेश कुशवाहा ने नीतीश कुमार को जानकारी दी. बिहार की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी की आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई.

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About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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