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बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के परिणामों के तुरंत बाद राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीते वंशीधर ब्रजवासी, दोनों नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करने पर तीखा विरोध शुरू हो गया है. सत्ता और विपक्ष के बीच संविधान की 10वीं अनुसूची (दल बदल कानून) को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है.
हाल ही में खत्म हुए बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनावों में इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने जेडीयू (JDU) के उम्मीदवारों को शिकस्त दी थी. जीत के बाद, दोनों ने कल (31 अक्टूबर) मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और औपचारिक रूप से बीजेपी का दामन थाम लिया. राहुल राज पहले बीजेपी में ही थे, लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था.
वहीं, वंशीधर ब्रजवासी पहले भी निर्दलीय एमएलसी रह चुके हैं. जैसे ही इनकी तस्वीरें बीजेपी नेताओं के साथ सामने आईं, इन पर सवाल उठने लगे. शुरुआत में वंशीधर ब्रजवासी ने स्वीकार किया था कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता ले ली है. हालांकि, वे अपने बयान से पलट गए. वहीं, अब उन्होंने वीडियो जारी कर ये साफ किया है कि हमने सिर्फ समर्थन दिया है, सदस्यता नहीं ली है.
RJD के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सारण और तिरहुत से नवनिर्वाचित निर्दलीय MLC, राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी को उनके पदों से अयोग्य घोषित करने की मांग की है. संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची पैरा 2(2) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतता है और बाद में किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. एक स्वतंत्र उम्मीदवार सदन में किसी भी दल को समर्थन दे सकता है, वह किसी दल में शामिल नहीं हो सकता है.
उन्होंने सीधे कहा कि मैं सभापति से अनुशंसा करूंगा कि इन दोनों को अयोग्य घोषित किया जाए और इन्हें विधान मंडल दल का सदस्य नहीं बनने दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि लोग संवैधानिक नियमों का खिलवाड़ कर रहे हैं, पहले कुछ और बयान दिए और अब कुछ और बयान दिए. उन्होंने तस्वीर दिखाते हुए साफ कहा कि इस तस्वीर में दिख रहा है कि दोनों लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली है और अब झूठ बोल रहे हैं. राजद नेता ने कहा कि विधान परिषद के सभापति को इस मामले में निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी न्यायालय का रुख करेगी. उन्होंने कहा कि सभापति के सामने यह तय करने का अवसर है कि वे निष्पक्ष संवैधानिक भूमिका निभाते हैं या नहीं.
वहीं, जन सुराज पार्टी ने भी इसे दलबदल कानून का उल्लंघन बताया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ सिंह ने घोषणा की है कि जन सुराज इस मामले को विधान परिषद के सभापति, चुनाव आयोग और अदालत में चुनौती देगा.
संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत कोई संसद, विधानसभा या विधान परिषद का मेंबर अयोग्य होगा, अगर वह जीतने के बाद किसी और राजनीतिक दल में शामिल हो जाए. 2020 में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था. उस समय दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय जीते सर्वेश कुमार चुनाव के बाद बीजेपी में शामिल होना चाहते थे. जानकारी के अनुसार, तब पार्टी के नेता सुशील कुमार मोदी ने उन्हें दलबदल कानून का हवाला देते हुए ऐसा करने से रोक दिया था. इसी के साथ पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी कांग्रेस के मंच पर दिखने के बावजूद पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं बन पाए थे.