)
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बार फिर भारी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला है. ढाका में रविवार (01 नवंबर) को गारमेंट (कपड़ा) उद्योग के मजदूरों ने वेतन को लेकर हिंसक प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. इस बीच ढाका के साथ गाजीपुर में तोड़फोड़ और झड़पों की खबरें सामने आई हैं. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने पुलिस और 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' (BGB) को तैनात किया.
दरअसल, प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने भारी आगजनी की और जमकर तोड़फोड़ की. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस चौकियों में तोड़फोड़ की और पुलिस के वाहनों में आग लगा दी. इसके बाद आज ढाका के मीरपुर और गाजीपुर के कोनाबारी जैसे इलाकों में प्रदर्शन ने हिंसा का रूप लेना शुरू कर दिया. बताया जाता है कि औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए सरकार ने पुलिस के साथ-साथ 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' की टुकड़ियों को भी तैनात किया है.
दरअसल, पूरा मामला न्यूनतम वेतन से जुड़ा हुआ है. बांग्लादेश में गारमेंट मजदूरों का न्यूनतम वेतन 12,500 टका है. 30,000 टका प्रति माह करने की मांग पर अड़े हैं. बता दें कि हाल में ही बांग्लादेश की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नया वेतन ढांचा घोषित किया है. नए सैलरी स्ट्रक्चर के कारण सरकारी कर्मचारियों का वेतन दोगुनी के करीब हो गए. इसी बदलाव को आधार बनाते हुए गारमेंट मजदूर भी अपने वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं.
#WATCH | Dhaka, Bangladesh: Bangladeshi garment workers launch massive violent protests over wages. Vandalism and clashes reported in Dhaka and Gazipur. A heavy police force and Border Guard Bangladesh have been deployed to restore order in the industrial areas. https://t.co/Ga0zZ8fo5X
— ANI (@ANI) November 1, 2026
मजदूरों का कहना है कि न्यूनतम वेतन 30,000 टका प्रति माह तय किया जाए. इस बीच गारमेंट्स फैक्ट्री के मालिकों का कहन है कि उन्हें मिलने वाले ऑर्डर कम हो चुके हैं और उत्पादों की कीमतें भी बढ़ नहीं रही हैं. ऐसे में मजदूरों का वेतन बढ़ा पना मुश्किल हो रहा है. अब स्थिति को देखते हुए सरकार ने कपड़ा उद्योग से जुड़े मजदूरों लिए नया वेतन बोर्ड का गठन भी किया है. हालांकि, वेतन बोर्ड के गठन के बाद भी मजदूर अभी सड़कों पर हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े गारमेंट्स निर्यातकों में से एक माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की कुल निर्यात कमाई इस उद्योग का 80 फीसदी से अधिक है. यहां से करीब 40 लाख लोग सीधे तौर पर काम करते हैं. (इनपुट- एएनआई)