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नेपाल में लगातार हो रही बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. पानी का दबाव बढ़ने के कारण शनिवार (26 सितंबर) को वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 फाटक उठा दिए गए और करीब 4 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया. यह इस साल का रिकॉर्ड है. हालांकि, इस कारण से निचले इलाकों में एक बार फिर से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. खड्डा क्षेत्र के महदेवा, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरीचहवा समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

प्रशासन ने फिर लगाए राहत कैंप
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए चकदहवा, झंडू टोला और भेडियारी इलाके में तीन-तीन राहत कैंप लगाए हैं, जहां कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गई है. शिविरों में पीड़ितों के लिए भोजन, रहने सहने , मेडिकल टीम और दवाओं का व्यापक प्रबंध किया गया है. इसके अलावा बाढ़ पीड़ितों का रेस्क्यू करके उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है. शनिवार से खुद पूरे दिन बगहा एसडीएम चांदनी कुमारी के साथ सीओ वसीम अकरम और ADM राजीव कुमार समेत SSB कमांडेंट तपेश्वर संवित राउत दल-बल के साथ जुटे रहे.
बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत मिली
बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन की इस राहत व्यवस्था पर संतोष जताया है. रहुआ टोला के रहने वाले बाढ़ पीड़ित शत्रुघ्न ने बताया कि बाढ़ के कारण उनका घर, राशन और सामान सब पानी में बह गया है. उन्होंने कहा कि राहत शिविर में भोजन और रहने की अच्छी व्यवस्था की गई है, जिससे काफी सुकून मिला है. हालांकि, उन्होंने गन्ने और धान की फसलों के डूबने पर चिंता जताते हुए स्थायी समाधान के लिए तटबंध (बांध) निर्माण की मांग भी की है. इसी तरह, शिविर में मौजूद गोबरी यादव और राजकली देवी ने भी प्रशासन द्वारा किए गए खाने-पीने और रहने के इंतजामों पर संतोष जाहिर किया है.
रिपोर्ट- इमरान अजीज