आमतौर पर सीसीटीवी को लोग अपनी सिक्योरिटी टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आज के दौर में सीसीटीवी कैमरे मिसाइल भी बन सकते हैं. जंग में उलझे दुनिया के तमाम देश आज सीसीटीवी कैमरों को हैक करके, उन्हें घातक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. हाल ही में इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ कुछ ऐसा ही काम किया था. इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने तेहरान की सड़कों पर लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों को हैक किया और उस डेटा का इस्तेमाल करते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबियों को ट्रैक किया गया. इसके बाद इन नेताओं को टारगेट करते हुए मिसाइल अटैक किए गए, जिनमें सभी नेता मारे गए. यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस ने भी कुछ ऐसा ही काम किया. रूसी हैकर्स ने कीव में रहने वाले आम लोगों के घरों में लगे वेबकैम को हैक करके यूक्रेनी सैन्य ठिकानों की जानकारी जुटाई थी.
1.2 अरब कैमरों का हो रहा इस्तेमाल
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में इंटरनेट से जुड़े लगभग 1.2 अरब कैमरे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. इनमें सुरक्षा सिस्टम, डोरबेल, ट्रैफिक मॉनिटर और बेबी मॉनिटर भी शामिल हैं. हैकिंग से बचने के लिए इनमें बहुत कम या फिर कोई प्रोटेक्शन नहीं होती है. आम तौर पर जब तक इन उपकरणों के हैक की जानकारी मिलती है, तब तक हैकर्स डेटा चुरा चुके होते हैं और किसी बड़ी घटना को अंजाम दे चुके होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर की इंटेलिजेंस एजेंसियां अक्सर कमजोर कैमरों का पता लगाने के लिए इंटरनेट को स्कैन करती हैं और एक्सेस पाने के लिए लाखों पासवर्ड्स को सिस्टमैटिक तरीके से आजमाती हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस प्रोसेस को आसान बना दिया है.
AI के आने से खतरा और ज्यादा बढ़ा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस प्रोसेस को आसान बना दिया है. AI की मदद से ऐसी बारिकियों पर भी नजर रखी जा सकती है, जिन्हें इंसानी आंखें शायद ना देख पातीं. रिपोर्ट में दावा किया गया कि दुनिया के तमाम देश टारगेट की पहचान करने, दुश्मन देश की मिलिट्री गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों के असर का अंदाजा लगाने के लिए हैक किए गए कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
WSJ से पहले साइबर सिक्योरिटी एजेंसी Check Point Research ने भी कुछ इसी तरह की एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर इंटरनेट से जुड़े IP कैमरों को टार्गेट करना शुरू कर दिया है. रिसर्च के मुताबिक, इस हैकिंग का दायरा सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है. इजरायल के अलावा UAE, कतर, बहरीन, कुवैत, लेबनान और साइप्रस जैसे देश भी इंटरनेट से जुड़े कैमरों को स्कैन करने की कोशिश करते पाए गए हैं.
भारत को इससे कितना खतरा?
भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. भारत के लिए चिंता के तीन बड़े कारण हैं, पहला- हमारे पड़ोसी पाकिस्तान और चीन जैसे देश हैं, जो भारत की तरक्की को देख नहीं सकते. दूसरा- हमारे यहां लगाए जाने वाले ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे लगभग एक दशक पहले मार्केट में आए थे, इसलिए उनमें एंटी-हैकिंग टेक्नोलॉजी नहीं पाई जाती है. तीसरा- अब तमाम देश सीसीटीवी कैमरों को हैक करके उन देशों का डेटा जुटाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. इजरायल की ओर से ईरानी नेताओं की हत्या के बाद राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में चीन में निर्मित सीसीटीवी कैमरे हटाए गए थे.