दूसरों को आंख दिखाने वाला 'आतंकिस्तान' खुद अपनी नीतियों के बोझ तले पस्त, दो जून की रोटी के लिए भी लोग कर रहे संघर्ष
दूसरों को आंख दिखाने वाला 'आतंकिस्तान' अब खुद अपनी नीतियों के बोझ तले पस्त हुआ नजर आ रहा है. वहां पर कंगाली इस तरह फैल गई है कि लोगों को दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
पाकिस्तान के हुक्मरानों की नाकामी ने आज अवाम को ऐसे दौर में ला खड़ा किया है जहां दो वक्त की रोटी तो दूर, चूल्हा जलाने के लाले पड़ गए हैं. ईरान से सीमा चौकियां बंद होने और एलपीजी की सप्लाई ठप होने के बाद पाकिस्तान में गैस सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं. महंगाई और भुखमरी से जूझते पाकिस्तान के हालात ये गवाही दे रहे हैं कि आतंक के साए में पलने वाला देश अब खुद अपनी ही नीतियों के बोझ तले दम तोड़ रहा है.
आतंक के आका पाकिस्तान की रग-रग में कर्ज, गरीबी और भुखमरी इस कदर दौड़ रही है कि अब वहां के अवाम का जीना मुहाल हो चुका है. वहां पर हाल ऐसा है कि आटा और चावल के दाम तो आसमान छू ही रहे हैं, डीजल-पेट्रोल भी लोगों के हाथों से निकल चुका है. अब तो पाकिस्तान के घरों में चूल्हा जलने पर भी बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है.
पाकिस्तान में LPG सिलेंडर के दाम 10 हजार के पार
वजह है, पाकिस्तान के वो नासमझ और लफ्फाज हुक्मरान, जिनकी हरकतों से पाकिस्तान में एक गैस सिलेंडर की कीमत दस हजार रुपए के पार पहुंच चुकी है. इसके चलते पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है.
अचानक बरसी इस महंगाई का किस्सा 17 अक्टूबर से शुरू होता है, जब पाकिस्तान और ईरान के बीच दो प्रमुख सीमा चौकियां गाबद-रिमदान और ताफ्तानअचानक बंद कर दी गईं. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा चिंताओं और तस्करी रोकने का रोना रोया. इसके जवाब में ईरान ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर गैस की सप्लाई पर ब्रेक लगाया तो पाकिस्तान की हवा टाइट हो गई.
पाकिस्तान ये भूल गया कि वो ईरान ही था, जो उसकी एनर्जी की आधी से ज्यादा भूख मिटाता था. जब ईरान से मदद चाहिए थी, तब पाकिस्तान दुनिया के सामने अमेरिका से सुलह कराने वाला तुर्रमखां बन रहा था. लेकिन जैसे ही काम निकला सीमाएं ही बंद कर दी गईं.
ईरान ने दिखाए तेवर तो पाकिस्तान में मचा कोहराम
अब ईरान ने भी तेवर दिखा दिए हैं. तेहरान ने अपना एलपीजी निर्यात पाकिस्तान से पूरी तरह हटाकर अफगानिस्तान की तरफ मोड़ दिया है, जिसके बाद आतंकिस्तान में कोहराम मच गया है.
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पाकिस्तान में 12 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 10 हजार रुपये से 13 हजार रुपये के बीच पहुंच गई है. सीमाएं बंद होने और सप्लाई रुकने के बाद लाहौर और आसपास के शहरों में एलपीजी की करीब 6 हजार दुकानें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं.
अब आम आदमी सुबह से खाली सिलेंडर लेकर एक दुकान से दूसरी दुकान भटक रहा है, लेकिन गैस का नामो-निशान तक नहीं है. हालात से परेशान पाकिस्तान के हुक्मरान अब शेखी बघार रहे हैं कि उसने ओमान से गैस की दो खेप खरीद ली हैं और कीमतें कम हो जाएंगी लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है.
रोटी बनाने के भी लोगों को पड़े लाले
पाकिस्तान अपनी एलपीजी जरूरत का 70 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है, जिसमें ईरान के अलावा इराक और ओमान भी शामिल हैं. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में ईरान जंग की वजह से इराक और ओमान से होने वाले आयात पर भी भारी रुकावट आ गई है. पाकिस्तान के पास न तो विदेशी मुद्रा भंडार बचा है न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कोई साख बची है.
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आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान के हुक्मरानों ने अपनी नीतियों से देश को ऐसी गड्ढे में धकेल दिया है. जहां न पेट भरने के लिए चावल है और न ही खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर.
पड़ोसी देशों से दुश्मनी मोल लेना और पूरी दुनिया से भीख मांगकर अपनी गाड़ी चलाना पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है. लेकिन इस बार जनता चूल्हे की आग के लिए तरस रही है और हुक्मरान अपने एसी कमरों में बैठकर नाकामी छिपाने में लगे हैं.
(ब्यूरो रिपोर्ट जी मीडिया)