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ईरान पर भी ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ गिरा सकता है US! 9.8 टन का वो हथियार, जिसने अफगानिस्तान में मचाई थी तबाही

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग छिड़ सकती है. CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरान के ठिकानों पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' का इस्तेामल कर सकता है. चलिए जानते हैं कि यह क्या है?

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 16, 2026, 08:03 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 08:10 PM IST
Image Credit: AI की मदद से बनाई गई तस्वीर
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अमेरिकी और ईरान के बीच जारी तनाव से जुड़ा एक दावा यह किया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही एक ऐसी बम का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसे मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स के नाम से जाना जाता है. यह दावा CNN की रिपोर्ट के आधार पर किया जा है. सीएनएन ने कई अमेरिकी अफसरों के हवाले से बताया कि अमेरिकी फौज ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु स्थलों पर GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) बम से हमले की योजना बनाई है. हालांकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई कि ट्रंप इसके लिए राजी हैं या नहीं.

MOAB का पूरा नाम मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट है. इस हथियार को 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' के नाम से भी जाना जाता है. इसके उपनाम से ही जाहिर होता है कि यह बहुत भयानक तबाही वाला हथियार है. इससे पहले अमेरिका इस हथियार का इस्तेमाल अफगानिस्तान में कर चुका है. अमेरिका ने 13 अप्रैल 2017 को अफगानिस्तान में इस बम का पहली बार युद्ध में इस्तेमाल किया था. अमेरिका के इस हमले का मकसद इस्लामिक स्टेट-खुरासान के आतंकियों की सुरंगों के नेटवर्क को तबाह करना था.

मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ एक बहुत बड़ा और गैर-परमाणु बम है. इसका असल नाम 'Massive Ordnance Air Blast' है. इसके उपनाम के पीछे इसकी तबाही और विशाल बनावट है. इस बम का वजन लगभग 9.8 टन के आसपास बताया जाता है. साथ ही इसमें 8.5 टन विस्फोटक सामग्री भरी जा सकती है. अपने टार्गेट तक पहुंचने के लिए इसमें GPS भी मौजूद है. इस बम को विशेष रूप से तैयार 'C-130' कैटेगरी के विमान से छोड़ा जाता है.

MOAB से कितनी तबाही मच सकती है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक MOAB का असली प्रभाव इसकी विशाल विस्फोटक तरंगें हैं. सबसे पहले इसमें लोकेशन तय की जाती है और फिर स्पेशल विमान से इसे नीचे की तरफ छोड़ा जाता है. टार्गेट पर जाने के बाद यह बम फटता है और तेज दबाव वाली तरंग पैदा करता है. ये तरंगें इतना भयानक होती हैं कि आसपास की इमारतें, ढांचे और लोगों को भारी नुकसान पहुंचता है. इसके धमाके से कितना नुकसान होगा यह जगह और बनावट पर निर्भर करता है.

संघर्ष विराम के बीच जंग की बातें क्यों?

ईरान और अमेरिका में फिलहाल संघर्ष विराम है, लेकिन इसके बावजूद तनाव चरम पर है. क्योंकि, समुद्री नाकेबंदी, होर्मुज और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी कोई स्थिति साफ नहीं है. ईरान इन चीजों को छोड़ना नहीं चाहता और अमेरिका चाहता है कि ईरान होर्मुज को उसके हवाले करे और परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगानी होगी. जबकि ईरान अमेरिकी नौसैनिकों की नाकेबंदी से परेशान है. रॉयटर्स के मुताबिक, सितंबर 2026 में ईरान का कच्चे तेल का निर्यात शून्य तक पहुंच गया था.

यह भी पढ़ें: US में राष्ट्रपति से ही चुनाव बचाने की तैयारी! ट्रंप के डर से क्यों अलर्ट हुए अधिकारी? हो सकता है 2020 जैसा बवाल

मिड-टर्म चुनाव के बाद कुछ बड़ा सकते हैं ट्रंप

अमेरिका में 3 नवंबर को मिड-टर्म चुनाव हैं, इन चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी की हालत ठीक नजर नहीं आ रही है. रॉयटर्स की 8 अक्तूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, Reuters/Ipsos सर्वे में करीब 60% अमेरिकी नागरिकों ने ईरान के मामले को संभालने के ट्रंप के तरीके पर असहमति जताई. युद्ध की वजह से पेट्रोल की कीमतें बढ़ी थीं और महंगाई वोटर्स की बड़ी चिंता बनी हुई थी. यही वजह है कि ट्रंप ने फिलहाल शांति को अपनाया हुआ है.

ट्रंप खुद भी यह बात कह चुके हैं कि वो मिड-टर्म चुनाव के बाद फिर से ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा था,'अमेरिका मिड-टर्म चुनाव से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेगा.' इसके अलावा भी ट्रंप कई जगहों पर इस तरह के इशारे दे चुके हैं. 

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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