'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट': ईरान पर ट्रंप की फाइनेंशियल स्ट्राइक, क्यूबा तक कसा शिकंजा
ईरान के फाइनेंशियल नेटवर्क पर अमेरिकी कार्रवाई का दायरा अचानक बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कई देशों तक अपने एक्शन का दायरा बढ़ाते हुए उन बैंकों, तेल कारोबारियों और कंपनियों को टारगेट किया है, जो आईसीयू में औंधे मुंह गिरे ईरानी रियाल को किसी न किसी तरह से वेंटिलेटर सपोर्ट दे रहे थे.
US-Iran Tension: एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी संघर्ष को स्थाई शांति में बदलने की बात कर रहे हैं, दूसरी ओर वह पहले से दलदल में धंसी ईरानी इकोनॉमी को खत्म करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद जैसे सारे पैंतरे आजमा रहे हैं. इस कड़ी में व्हाइट प्रशासन में ट्रंप के खास वित्तीय सिपहलार यानी अमेरिकी वित्त मंत्री ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के तहत कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं.
ईरान को कोई नहीं बचा सकता: स्कॉट बेसेंट
ताजा प्रतिबंधों के तहत अमेरिका ने एक इराकी बैंक, एक ईरान से जुड़े ऑफशोर बैंक पर शिकंजा करने के साथ दुबई में काम करने वाले ईरान के एक तेल कारोबारी नेटवर्क, हांगकांग की एक फ्रंट कंपनी और क्यूबा के एक सरकारी बैंक को भी निशाना बनाया है. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपने एक्शन की जानकारी देते हुए बताया, 'ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और उसका कोई भी ज्ञात और अज्ञात सहयोगी उसे बचा नहीं बचा सकते.'
टारगेट क्लियर
अमेरिकी वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि उनका मंत्रालय तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक ईरानी सरकार के आर्थिक संसाधन खत्म नहीं हो जाते और उसकी सैन्य गतिविधियों को सहारा देने वाले सभी वित्तीय रास्ते बंद नहीं कर दिए जाते.
अमेरिकी फाइनेंस मिनिस्ट्री की विज्ञप्ति के मुताबिक, अमेरिकी अफसरों ने जिन संगठनों का टेटुआ दबाया है, वो सभी नेटवर्कों बार-बार मना करने के बावजूद ईरान की मदद करने के लिए मिडिल ईस्ट और एशिया में शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों के जरिए अरबों का लेन-देन कर रहे थे.
सादेघ बावी और रजावी भी नपे!
अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा बैन लगाए गए लोगों और संस्थाओं की सूची यानी ट्रंप की बैन लिस्ट में सैयद रूहोल्लाह रजावी का नाम भी लिखा है, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की सरकार के प्रमुख तेल कारोबारियों में से एक बताया है.
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, दुबई में रहने वाले रजावी अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी की ओर से हर महीने लाखों बैरल तेल विदेश भेजने का काम करते थे.
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ऐसे नेटवर्क हांगकांग के रास्ते धन को यूएई और तुर्किये तक पहुंचाते हैं, जहां उसे सोने और नकदी में बदला जाता है. बाद में ये पैसा 'महान एयर' की उड़ानों के जरिए ईरान और उसके प्रॉक्सी समर्थक संगठनों तक पहुंचाया जाता है.
'एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड' नाम की हांगकांग स्थित कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. आरोप है कि यह कंपनी ईरान के 'शहर बैंक' से जुड़े नेटवर्क के लिए धन के लेन-देन में मदद कर रही थी.
इसके अलावा, दुबई में रहने वाले ईरानी-डोमिनिकन नागरिक सादेघ बावी पर भी बैन लगा है. अमेरिका का आरोप है कि बावी ईरान की एलीट फोर्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स से जुड़ी गतिविधियों में मदद कर रहे थे.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इराक स्थित इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक फॉर इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस पर भी प्रतिबंध लगाया है. अमेरिका का आरोप है कि यह बैंक ईरान को अमेरिकी डॉलर तक पहुंच उपलब्ध करा रहा था.
इसके साथ ही ईरान के दो ऑफशोर बैंक, जजीरेह इंटरनेशनल बैंक कंपनी और चाबहार इंटरनेशनल बैंक ओवरसीज कंपनी भी प्रतिबंधों के दायरे में आ गए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलग से क्यूबा के सरकारी बैंक बैंको इंटरनेशनल डी कॉमर्सियो एस.ए. (BICSA) पर प्रतिबंधों की घोषणा की है. रुबियो का आरोप है कि यह बैंक 2022 से ईरान के पहले से प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को वित्तीय सेवाएं दे रहा था.
उन्होंने कहा, 'काफी लंबे समय से कम्युनिस्ट क्यूबा को ऐसे देशों और संगठनों के लिए ठिकाने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अमेरिका के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिनमें ईरान भी शामिल है.'
रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी तट से कुछ ही दूरी पर किसी भी विद्रोही राज्य को विदेशी सैन्य, खुफिया या आतंकी गतिविधियों की मेजबानी करने की छूट नहीं देगा.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि जिन विदेशी वित्तीय संस्थानों का संबंध प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ पाया जाएगा, उन पर भी सेकेंडरी सैंक्शंस भी लगाए जा सकते हैं.
एक और एहतियाती कदम उठाते हुए, अमेरिका के फाइनेंशियल क्राइम इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट ने बैंकों को सतर्क रहने का निर्देश देते हुए कहा है कि वो ऐसे लेन-देन को फौरन रिपोर्ट करें, जिनमें ईरान किसी भी तरह से धार्मिक चैरिटी नेटवर्क का दुरुपयोग कर रहा हो. अमेरिका को आशंका है कि धार्मिक दान, विशेष रूप से 'खुम्स' के रूप में दिए जाने वाले योगदान, का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में हम ईरानी सरकार को धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके अपने नेताओं को फायदा पहुंचाने और आतंकवाद के वित्तपोषण की अनुमति नहीं देंगे.'
ट्रंप प्रशासन ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत 24 अगस्त को की थी. इस अभियान का उद्देश्य ईरान के उन वित्तीय और कारोबारी नेटवर्कों पर कार्रवाई करना है, जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है. इससे पहले भी यूएई, हांगकांग, चीन और अन्य देशों में मौजूद ईरान से जुड़े शिपिंग, खरीद-फरोख्त और वित्तीय नेटवर्कों पर कार्रवाई की जा चुकी है.