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नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने से बौखलाए ट्रंप! US ने वर्ल्ड कोर्ट पर गिराई प्रतिबंधों की गाज, दाना-पानी किया बंद

भारतीय मूल की नवी पिल्लई को 'नोबेल शांति पुरस्कार' मिलने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं. ट्रंप ने न सिर्फ नवी को उल्टा-सीधा सुनाया, बल्कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर कड़े बैन भी लगा दिए. आइए जानते हैं पूरा मामला...

Written ByBhoopendra Rai
Published: Oct 10, 2026, 12:01 AM IST|Updated: Oct 10, 2026, 12:06 AM IST
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नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने से बौखलाए ट्रंप! US ने वर्ल्ड कोर्ट पर गिराई प्रतिबंधों की गाज, दाना-पानी किया बंद
Image Credit: US ने वर्ल्ड कोर्ट पर गिराई प्रतिबंधों की गाज (AI फोटो)

About the Author

Bhoopendra Rai

Bhoopendra Rai

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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भारतीय मूल की नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल पीस प्राइज मिला है. इसका ऐलान होते ही अमेरिका का रोना-धोना चालू हो गया है. पहले तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नफरती पोस्ट शेयर कर पिल्लई को भला-बुरा कहा और अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC को भी नहीं छोड़ा, जहां वो जज रह चुकी हैं. अमेरिका ने आईसीसी पर कुछ कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. नवी पिल्लई इसी अदालत की अपील चैंबर में 2003 से 2008 तक न्यायाधीश रह चुकी हैं.

दरअसल, जब से ट्रंप राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हैं, उनके सिर पर एक ही भूत सवार है, वो है नोबेल शांति पुरस्कार पाना. वो किसी भी तरह इस अवॉर्ड को पाना चाहते हैं. यही वजह है कि आए दिन वो सीना ठोककर दावे करते हैं कि उन्होंने 8-8 युद्ध रुकवाए हैं. खुद ही अपनी तारीफों के कसीदे पढ़ते हैं और फिर मुंह उठाकर नोबेल मांगते हैं, लेकिन वो यह भूल जाते हैं कि दुनिया जानती है कि वो खुद ईरान से युद्ध लड़ रहे हैं, जहां उन पर वॉर क्राइम तक के आरोप हैं.

Today, the Trump Administration is sanctioning the ICC. This action should encourage our Allies within the Court to work for solutions to end this threat to U.S. sovereignty forever. https://t.co/D86dCqLUaZ

— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) October 9, 2026

पिछले साल भी जब ट्रंप के हाथ शांति नोबेल नहीं लगा था तो वो बच्चों की तरह बिलबिला उठे थे. उन्होंने इसका गुस्सा यूरोपीय देशों पर पाबंदियां ठोककर निकाला था. उन्हें लगा था कि दुनिया को डराएंगे-धमकाएंगे, तो कमेटी डर के मारे उनके हाथ में नोबेल थमा देगी, जैसे एक जिद्दी बच्चे को बहलाने के लिए झुनझुना दे दिया जाता है, लेकिन अफसोस इस बार भी ट्रंप का यह दांव काम नहीं आया.

पिल्लई का नाम आते ही सातवें आसमान पर पहुंचा पारा

इस बार जब ट्रंप को शांति नोबेल नहीं मिला तो ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है. यही वजह है कि पहले तो उन्होंने पिल्लई को लेकर की गई एक नफरती पोस्ट शेयर की, जिसमें नोबेल समिति को भी खूब कोसा गया है और नोबेले समिति पर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए. अब ट्रंप के मन के मुताबिक विदेश मंत्री मार्को रुबियो मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने ICC को एक दुष्ट कोर्ट करार दिया और कहा 'अमेरिका इस संस्था के साथ लेन-देन पर रोक लगाएगा, ताकि उसके संसाधनों को खत्म किया जा सके.उसकी काम करने की क्षमता को कमजोर किया जा सके.'

अब आईसीसी पर मढ़ दिया सारा गुस्सा

दरअसल, ट्रंप सरकार ने शुक्रवार को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर तगड़ी पाबंदियां ठोक दी हैं. अमेरिका का आरोप है कि यह अंतरराष्ट्रीय अदालत सीधे तौर पर उसके और उसके सहयोगियों के हितों को चोट पहुंचा रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो जारी कर आईसीसी को खरी-खोटी सुनाई, जिसमें उन्होंने साफ कह दिया कि यह अदालत युद्ध अपराधों के नाम पर इजराइली और अमेरिकी नागरिकों पर गलत और गैर-कानूनी तरीके से मुकदमा चलाने पर तुली हुई है.

'या तो कोर्ट सुधरे, या हम खत्म कर देंगे'

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने धमकी भरे बयान में कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को किसी अमेरिकी नागरिक पर केस चलाने की इजाजत नहीं देंगे, इसलिए आज अमेरिका इस 'भगोड़े कोर्ट' पर प्रतिबंध लगा रहा है. हम इस कोर्ट के सारे वित्तीय संसाधन काट देंगे और इसे अपाहिज बना देंगे.' रुबियो ने यहां तक कह दिया, 'या तो ICC अपनी हरकतों से बाज आए और अपनी धमकियां बंद करे, वरना हम ICC को ही खत्म कर देंगे. हमारे जो सहयोगी अपनी रक्षा के लिए अमेरिकी सैनिकों पर निर्भर हैं, उन्हें इस कोर्ट पर लगाम लगाकर रखना पड़ेगा.'

बैंक-सॉफ्टवेयर तक सब बंद, दाना-पानी ठप

ट्रंप सरकार का यह नया चाबुक बेहद खतरनाक साबित होने वाला है, क्योंकि इस बार सिर्फ कोर्ट के जजों या वकीलों के निजी खाते ही बैन नहीं किए गए, बल्कि उन कंपनियों पर भी भारी जुर्माना ठोकने का फरमान सुना दिया गया, जो इस कोर्ट को बैंकिंग, इंश्योरेंस या सॉफ्टवेयर जैसी जरूरी सुविधाएं देती हैं. ऐसे में कोर्ट के पास अपने पूरे सिस्टम और सॉफ्टवेयर को रातों-रात बदलने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचा है.

आईसीसी ने क्या जवाब दिया?

अमेरिकी प्रतिबंधों के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून पर हमला करार दिया है. अदालत ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चेतावनी दी. आईसीसी ने कहा कि यह कदम 'कानून के शासन' और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की नींव पर हमला है, जो इस साधारण सिद्धांत को चोट पहुंचाता है कि 'कानून से ऊपर कोई नहीं है.' अदालत ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद कर्मचारियों को डराना और काम में बाधा डालना है, लेकिन वह पीछे नहीं हटेगी.

125 देशों से एकजुट होने की पुकार

आईसीसी की अध्यक्ष तोमोको अकाने ने बयान में कहा, 'गंभीर अपराधों के अनगिनत पीड़ितों की खातिर अदालत पूरी स्वतंत्रता, निष्पक्षता और केवल कानून व सबूतों के आधार पर अपने जनादेश का पालन करती रहेगी.' अदालत ने अपने 125 सदस्य देशों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि संस्था का भविष्य अब उन देशों के हाथों में है जिन्होंने इसे बनाया था.

नोबेल कमेटी का करारा जवाब

डोनाल्ड ट्रंप भले ही नवी पिल्लई को 'अमेरिका का विरोधी' बताकर उनका कद छोटा करने की कोशिश में जुटे हों, लेकिन नोबेल कमेटी ने उन्हें अवॉर्ड देने की जो वजह दुनिया के सामने रखी है वो सीधे तौर पर ट्रंप जैसे नेताओं के मुंह पर जोरदार तमाचा है. कमेटी ने साफ कहा कि आज के दौर में जब दुनिया के ताकतवर नेता और मुल्क अंतरराष्ट्रीय अदालतों और जजों पर सियासी हमले बोल रहे हैं, ऐसे माहौल में पिल्लै को यह अवॉर्ड देना पूरी दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश है. कमेटी का मानना है कि दुनिया में अमन-चैन तभी कायम रह सकता है, जब युद्ध अपराधियों को उनके किए की सजा मिले और पीड़ितों को हर हाल में इंसाफ मिले.

ये भी पढ़ें: नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिलते ही भड़के डोनाल्ड ट्रंप! खुन्नस में शेयर की नफरती पोस्ट


 

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