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US Midterm Election: अमेरिकी मिडटर्म का वो इतिहास, जिसने हर राष्ट्रपति को डराया! 1934 से अब तक सिर्फ 3 की बची लाज

राष्ट्रपति के कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे होते ही मध्यावधि चुनाव कराए जाते हैं. 1934 से 2022 तक 23 मध्यावधि चुनाव हुए हैं, जिनमें सिर्फ तीन बार (1934, 1998 और 2002) ही सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म चुनाव जीत सकी है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Nov 04, 2026, 12:49 PM IST | Updated: Nov 04, 2026, 12:52 PM IST
Image Credit: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव का इतिहास
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अमेरिका मिडटर्म चुनावों में जनता ने दशकों पुरानी पंरपरा को बरकरार रखा और वही हुआ, जिसका पहले से अंदाजा लगाया जा रहा था. इस मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को डेमोक्रेट्स के हाथों बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा देखने को मिला. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को 164 सीटें मिलीं, जबकि रिपब्लिकन के खाते में 104 सीटें सीटें आईं. इसी तरह से सीनेट में डेमोक्रेट्स को 51 सीटें मिलीं, जबकि सत्ताधारी रिपब्लिकन्स को 39 सीटों पर संतोष करना पड़ा. गवर्नर के चुनावों में भी राष्ट्रपति ट्रंप को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. गवर्नर के चुनावों में 22 सीटों पर डेमोक्रेट्स ने कब्जा जमाया तो वहीं 11 पर रिपब्लिकन्स ने बाजी मारी.

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकारी अपनी हार

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी हार स्वीकार कर ली है. ट्रुथ पर एक पोस्ट करके उन्होंने कहा कि वह अब चुनावी 'पंडित' बनेंगे और इस चुनाव में उम्मीदवारों की जीत और हार की वजहों पर अपनी राय देंगे. इसके अलावा, एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह नतीजों को स्वीकार करते हैं और विपक्ष के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. इससे पहले उन्होंने कहा था कि मैं चुनाव मैदान में नहीं था और अगर होता, तो हम भारी बहुमत से जीतते. उधर, ट्रंप की हार के कारणों की अब समीक्षा हो रही है. इस मुद्दे पर पूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने कहा कि ईरान वॉर की वजह से डोनाल्ड ट्रंप चुनाव नहीं हारे हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप की हार के सबसे बड़े मुद्दे- महंगाई, इमिग्रेशन और बेरोजगारी रहे.

व्हाइट हाउस का डेथ ट्रैप!

अमेरिका में 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' का कार्यकाल दो वर्ष का होता है. वहीं, सीनेट में हर 2 साल में एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है. यही वजह है कि एक बार राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हाउस और सीनेट के मेंबर चुने जाते हैं और दूसरी बार राष्ट्रपति के कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे होते ही मध्यावधि चुनाव कराए जाते हैं. 1934 से 2022 तक 23 मध्यावधि चुनाव हुए हैं, जिनमें सिर्फ तीन बार (1934, 1998 और 2002) ही सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म चुनाव जीत सकी है, यानी 90 साल के इस कालखंड में सिर्फ 3 राष्ट्रपतियों ने अपनी लाज बचाने में कामयाबी हासिल की है. इनमें फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश का नाम शामिल है.

कब और किस राष्ट्रपति को मिली थी कामयाबी?

  1. 1934 का मध्यावधि चुनावः अमेरिकी मिडटर्म चुनावी इतिहास में इस चुनाव को सबसे ऊपर रखा जाता है. आम तौर पर अमेरिका में मिडटर्म चुनावों में सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन 1934 के चुनाव में इसके बिल्कुल उलट हुआ. महामंदी के दौर में तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट की न्यू डील नीतियों को जनता का समर्थन मिला. देश के गरीब और श्रमिक वर्ग के समर्थन की बदौलत रूजवेल्ट की पार्टी डेमोक्रेटिक ने दोनों सदनों में 9-9 सीटों की बढ़त हासिल की थी. अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार था कि जब किसी सत्तारूढ़ राष्ट्रपति की पार्टी ने मिडटर्म में सीटें गंवाने के बजाय जीती हों.
  2. 1998 में बिल क्लिंटन ने रचा इतिहास: अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में 1998 का मिडटर्म इलेक्शन भी काफी अनोखा माना जाता है. यह चुनाव तत्कालीन डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दूसरे कार्यकाल के दूसरे कार्यकाल के दौरान आयोजित हुआ था. 1934 के बाद दूसरी बार सत्तारूढ़ राष्ट्रपति की पार्टी ने अपनी सीटें नहीं गंवाई थीं. इस चुनाव में राष्ट्रपति क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस में 5 सीटों की बढ़त हासिल की थी. हालांकि, बहुमत बचाने में रिपब्लिकन को कामयाबी मिली थी. वहीं, सीनेट में दोनों दलों को कोई फायदा या नुकसान नहीं हुआ था.
  3. 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश का कारनामा: यह मिडटर्म चुनाव भी अमेरिकी राजनीति के सबसे असाधारण और ऐतिहासिक अपवादों में गिना जाता है. यह चुनाव 9/11 आतंकी हमले के 14 महीने बाद हुआ था. 9/11 आतंकी हमले के बाद देश पूरी तरह से अपने राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के साथ खड़ा था. आतंकवाद के खिलाफ बॉर्ज डब्ल्यू बुश की कठोर नीतियों का उनकी पार्टी को फायदा मिला. इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हाउस में 8 सीटें और सीनेट में 2 सीटें की बढ़त हासिल हुई थी.

मिडटर्म चुनाव में ट्रप की हार के कारण?

अमेरिकी सियासत के एक्सपर्ट पृमित मकोड़े ने ट्रंप की हार पर कहा कि अमेरिका में महंगाई का मुद्दा बहुत बड़ा है. यहां जंग शुरू होने से पहले मैसाचुसेट्स में गैसोलीन (पेट्रोल) 2.50 डॉलर प्रति गैलन था, कैलिफोर्निया में तीन या सवा तीन डॉलर प्रति गैलन था. ये अब डबल से ज्यादा हो गया है.मैसाचुसेट्स में 4 या 4.50 डॉलर प्रति गैलन गैस मिल रही है. कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी कभी नहीं देखी गई. शॉपिंग मॉल, ग्रोसरी स्टोर हर जगह महंगाई लोगों को बढ़ी हुई नजर आ रही है. 

ये भी पढ़ें- वादों की हवा-हवाई, महंगाई ने लुटिया डुबोई: मिडटर्म के नतीजों से ट्रंप को लगा शॉक, अब ईरान वॉर और भारत से रिश्तों पर क्या होगा असर?

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About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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