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अमेरिका मिडटर्म चुनावों में वही हुआ, जिसकी आशंका अलग-अलग सर्वे में जताई जा रही थी. डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को डेमोक्रेट्स के हाथों बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है. एपी के मुताबिक, सीनेट में 51 सीटें डेमोक्रेट्स और 39 रिपब्लिकन्स को मिली. वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 164 सीटें डेमोक्रेट्स ने जीतीं तो 104 सीटें रिपब्लिकन्स के खाते में गईं. वहीं गवर्नर के चुनावों में 22 सीटों पर डेमोक्रेट्स ने कब्जा जमाया तो वहीं 11 पर रिपब्लिकन्स ने बाजी मारी. डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह नतीजे किसी सदमे से कम नहीं हैं.
अमेरिका में जब भी मिडटर्म चुनाव होते हैं तो उसका असर सिर्फ उसके मुल्क ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ता है. महंगाई की मार झेल रही अमेरिका की जनता ने इन नतीजों के जरिए अपना गुस्सा जाहिर कर दिया है. इससे साफ है कि अमेरिकी अवाम डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से नाखुश है. अब एक्सपर्ट्स से समझते हैं इन नतीजों के मायने क्या हैं?
क्या अमेरिकियों को रास नहीं आई ट्रंप की नीतियां? इस सवाल पर पूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप चुनाव ईरान वॉर की वजह से नहीं हारे हैं, बल्कि महंगाई, इमिग्रेशन और बेरोजगारी के मुद्दे की वजह से हारे हैं. उन्होंने कहा कि मैं अमेरिका से लौटा हूं, वहां कोई ईरान के साथ शांति की बात नहीं करता. हर कोई उसे दुश्मन नंबर 1 बताता है. सिर्फ तीन ही सूरतों में यह जंग रुक सकती है. पहला सारे देश अमेरिका के खिलाफ हो जाएं.दूसरा अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र से बाहर निकाल दिया जाए और तीसरा अगर ईरान आत्मसमर्पण कर दे.' उन्होंने आगे कहा, 'मेरा मानना है कि ईरान के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप एटम बम का इस्तेमाल करेंगे.'
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— Zee News (@ZeeNews) November 4, 2026
वहीं, अमेरिका में से एक्सपर्ट पृमित मकोड़े ने कहा, 'अमेरिका में महंगाई का मुद्दा बहुत बड़ा है. यहां जंग शुरू होने से पहले मैसाचुसेट्स में गैसोलीन (पेट्रोल) 2.50 डॉलर प्रति गैलन था, कैलिफोर्निया में तीन या सवा तीन डॉलर प्रति गैलन था. ये अब डबल से ज्यादा हो गया है.मैसाचुसेट्स में 4 या 4.50 डॉलर प्रति गैलन गैस मिल रही है. कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी कभी नहीं देखी गई. शॉपिंग मॉल, ग्रोसरी स्टोर हर जगह महंगाई लोगों को बढ़ी हुई नजर आ रही है. दूसरी ओर, इमिग्रेशन में जो सख्ती की गई है, उससे लैटीनो वर्ग खुश नहीं है. अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय खुश नहीं है.'
मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद भारत से रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल पर पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी ने कहा, 'निश्चित रूप से यह भारत के लिए राहत की बात है क्योंकि रुझानों में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलती नजर आ रही है. इससे डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों पर अंकुश जरूर लग जाएगा. उनको मिलिट्री एक्शन लेने से पहले दोनों सदनों से इजाजत लेनी होगी. ईरान पर उनका दबाव कम होगा, जिससे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है.'
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला किया, रूस जैसे देश से डीजल डील कर ली, लेकिन बावजूद इसके वह हार गए, इस चुनाव में क्या चीज उनके खिलाफ गई, इस पर पूर्व राजनयिक प्रभु दयाल ने कहा, 'अमेरिका में नाराजगी बहुत ज्यादा है. लेकिन भारत के लिए ट्रंप की जो पॉलिसी हैं, उनमें नतीजों के बाद कितना बदलाव आएगा, यह फिलहाल कहना मुश्किल है क्योंकि एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी पर लगाम लगाना इतना आसान नहीं होता है यूएस कांग्रेस के अंदर. लिंडसे ग्राहम एक्ट के तहत ट्रंप टैरिफ लगा सकते हैं. यह अमेरिका का एक कानून है. इसको हटाने के लिए कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो डेमोक्रेट्स के पास नहीं है.तो, मेरा मानना है कि भारत के लिए खतरा बना रहेगा.'
वहीं, जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट धीरज कौल ने कहा, 'अमेरिका में एक ब्लैंक वेव है. हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स का डंका बज रहा है. तमाम सर्वे में सामने आया है कि डोनाल्ड ट्रंप के राज में महंगाई भयंकर तरीके से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप बैलेट पर होते तो शायद वह सीटें भी नहीं आतीं, जो आ रही हैं. लोग बहुत ज्यादा गुस्सा हैं. एच1बी1 को लेकर जो उन्होंने सख्तियां की हैं, उससे सिलिकॉन वैली में बहुत ज्यादा नाराजगी है.'