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4 सीटों का खेल, ट्रंप होंगे पास या फेल: डेमोक्रेट्स या रिपब्लिकन... मिडटर्म चुनाव में US संसद पर किसका होगा कब्जा?

मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप की कुर्सी को कोई खतरा नहीं होगा, लेकिन उनकी प्रतिष्ठा जरूर दांव पर लगी हुई है. अगर ट्रंप की पार्टी चुनाव हार गई, तो सरकार के कामकाज पर बड़ा असर पड़ सकता है.

4 सीटों का खेल, ट्रंप होंगे पास या फेल: डेमोक्रेट्स या रिपब्लिकन... मिडटर्म चुनाव में US संसद पर किसका होगा कब्जा?
Image Credit: अमेरिका का मिडटर्म चुनाव (AI तस्वीर)

अमेरिका में कल यानी मंगलवार (3 नवंबर) को मिडटर्म चुनाव में मतदान होने वाला है. मिडटर्म इलेक्शन को सत्तारूढ़ राष्ट्रपति के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता का जनमत संग्रह माना जाता है. यही वजह है कि इस चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. अगर ट्रंप की पार्टी चुनाव हार गई, तो सरकार के कामकाज पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप की कुर्सी को कोई खतरा नहीं होगा. पूरा चुनाव 4 के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है. दरअसल, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच 4 राज्यों में जबरदस्त संघर्ष देखने को मिल रहा है, तो वहीं सीनेट और हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत के लिए सिर्फ 4 सीटों की दरकार है. इसी तरह से भारतीय मूल के चार उम्मीदवारों पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

अमेरिकी संसद को जानें

भारत की तरह अमेरिका में भी द्विसदनीय व्यवस्था है. देश के निचले हाउस को 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' कहते हैं, जबकि उच्च सदन 'सीनेट' के नाम से जानी जाती है. 'हाउस' को मोटे तौर पर भारत की 'लोकसभा' जैसा माना जा सकता है, जिसके सदस्य 'कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट्स' यानी चुनावी क्षेत्रों से चुनकर आते हैं. वहीं, सीनेट का काम राज्यों का प्रतिनिधित्व करना है. हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं, राज्य में जनसंख्या चाहे जितनी हो. 'हाउस' के सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है, जबकि सीनेटरों का कार्यकाल 6 साल का होता है. सीनेट के एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव हर 2 साल में होता है. भारत की राज्यसभा के सदस्यों के विपरीत, अमेरिकी सीनेटर सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं.

मिडटर्म इलेक्शन को समझिए

अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर 4 वर्ष में होता है. अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे होते ही मध्यावधि चुनाव कराए जाते हैं. इन चुनावों में जनता को राष्ट्रपति के कामकाज पर मुहर लगाना होता है. अगर सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी जीतती है, तो जाहिर है कि राष्ट्रपति का काम शानदार है. हालांकि, अमेरिका के मध्यावधि चुनावी इतिहास में जनता सत्ताधारी पार्टी को दंडित ही करती आई है. 1934 से 2022 तक 23 मध्यावधि चुनाव हुए हैं, जिनमें सिर्फ तीन बार (1934, 1998 और 2002) ही सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म चुनाव जीत सकी है.

  • हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन)- इसके सभी 435 सदस्यों का कार्यकाल केवल दो साल का होता है. यही वजह है कि मिडटर्म चुनाव में सभी सीटों पर फिर से चुनाव हो रहे हैं.
US Midterm Elections
  • सीनेट (उच्च सदन)- 100 सीट वाली सीनेट में सांसदों (सीनेटरों) का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है. हालांकि, हर 2 साल में सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों- 35 पर चुनाव कराए जाते हैं. इस बार भी 35 सीटों (33 नियमित और 2 विशेष चुनाव) पर चुनाव हो रहे हैं.
  • गवर्नर और स्थानीय चुनाव- अमेरिकी संसद के अलावा देश के 50 में से 36 राज्यों में गवर्नर का चुनाव हो रहा है. इसके अलावा मध्यावधि चुनाव में राज्य विधायिकाओं और स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों के लिए भी चुनाव हो रहा है. गवर्नर पद के लिए ओहायो प्रांत में भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन और रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी गवर्नर और डेमोक्रेटिक प्रत्याशी एमी एक्टन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. इसी तरह से कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा और टेक्सस में भी दोनों दलों के उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर है.
US Midterm Elections

4 का चक्रव्यूह ट्रंप कैसे फंसे?

राष्ट्रपति चुनाव के वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने जनता का भरोसा जीतने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन उनकी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी को दो सदनों में सिर्फ मामूली बहुमत हासिल हुआ था. मामूली ही सही, लेकिन बहुमत के मिल जाने के कारण राष्ट्रपति ट्रंप को अपने फैसलों को संसद में पास कराना आसान रहा. सीनेट और हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत के लिए सिर्फ 4 सीटों की दरकार है. अगर मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी किसी भी एक सदन में बहुमत खो देती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घरेलू विधायी एजेंडे, आर्थिक नीतियों और बजट प्रस्तावों पर ब्रेक लग सकता है. सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा होते ही ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संसदीय जांच बिठाई जा सकती है. रिपब्लिकन सीनेटरों को महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है.

क्या कहते हैं सर्वे

पिछले कई महीनों से आ रहे पोल सर्वे भी डेमोक्रेट्स के पक्ष में आए हैं. सर्वे के मुताबिक, अमेरिकी संसद के निचले सदन में जरूरी 218 सीटों से कहीं ज्यादा सीटों पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं, उच्च सदन यानी सीनेट मुकाबलों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार या तो बराबरी पर हैं या मामूली बढ़त में दिख रहे हैं. हाल ही में आए न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वेक्षण में साउथ कैरोलाइना की सीनेट सीट पर मुकाबला बराबरी का दिखाया गया. यह वही राज्य है, जहां 2024 में रिपब्लिकन ने 18 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत दर्ज की थी.

चार भारतीय-अमेरिकी फिर से चुनावी मैदान में

  1. रो खन्ना (डेमोक्रेट), कैलिफोर्निया का 17वां हाउस डिस्ट्रिक्ट: इनका मुकाबला भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार रितेश टंडन से है. 
  2. प्रमिला जयपाल (डेमोक्रेट), वाशिंगटन का 7वां डिस्ट्रिक्ट: इनका मुकाबला रिपब्लिकन नीरव सेठ से है, जो खुद भी एक भारतीय-अमेरिकी हैं.
  3. सुहास सुब्रमण्यम (डेमोक्रेट), वर्जीनिया का 10वां डिस्ट्रिक्ट: इनका मुकाबला रिपब्लिकन डेव बेकविथ और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों से है.
  4. अमी बेरा (डेमोक्रेट), कैलिफोर्निया का 3वां डिस्ट्रिक्ट: इनका मुकाबला रिपब्लिकन रॉब टकर से है.
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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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