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धरती पर एक ऐसी जगह, जहां 50 साल से धधक रही आग... क्या कभी बुझ पाएगी ये 'ज्वाला'; दुनिया कहती है 'नरक का दरवाजा'

तुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में एक बड़े गड्ढे में पिछले 50 साल से अधिक समय से आग धधक रही है. इस आग को बुझाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. हालांकि, अब कहा जा रहा है कि समय के साथ आग की लपटें कमजोर हो रही हैं.

धरती पर एक ऐसी जगह, जहां 50 साल से धधक रही आग... क्या कभी बुझ पाएगी ये 'ज्वाला'; दुनिया कहती है 'नरक का दरवाजा'
Image Credit: 50 साल से धधक रही ज्वाला कब बुझेगी?(फोटो- एआई)

पृथ्वी पर कई ऐसी जगहें हैं, जो वास्तव में किसी रहस्य से कम नहीं हैं. ठीक एक ऐसी ही जगह तुर्कमेनिस्तान का 'नरक का दरवाजा', जहां पर पिछले 50 साल से अधिक समय से आग धधक रही है. सबसे खास बात है कि ये आग खुद से धधक रही है और बुझ नहीं रही. बताया जाता है कि आग के जलने की शुरुआत एक वैज्ञानिक अभियान के दौरान हुए हादसे से हुई थी. हालांकि, इस बीच कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया जा रहा है कि यहां पर आग की लपटें धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं.

दरअसल, तुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में मौजूद है, जिसको दुनिया गो टू हेल यानी नरक का दरवाजा कहती है. देखा जा सकता है कि यहां पर जमीन के बीचोंबीच एक बड़ा सा गड्ढा है, जहां पर आग धधकती रहती है. रात के अंधेरे में मानों ये कोई और दुनिया हो. इस आग को बुझाने को लेकर कई प्रयास भी किए जाने का दावा है, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. ये आग क्यों धधकती और ये कब बुझेगी इसको लेकर कुछ भी कहा नहीं जा सकता है.

क्या है इस जगह का असली नाम?

तुर्कमेनिस्तान की इस जगह का नाम दारवाजा गैस क्रेटर है. यह तुर्किमेनिस्तान के दरवाजा गांव के पास स्थित है. स्थानीय लोग इस जगह को शाइनिंग ऑफ कराकुम के नाम से जानते हैं. सबसे खास बात है कि यह कोई ज्वालामुखी नहीं है, लेकिन यह प्रकृतिक गैस के कारण जल रहा गड्ढा है. इसी रहस्यमयी आग ने इसको पूरी दुनिया में मशहूर बना दिया है.

कैसे आग जलनी शुरू हुई?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अनोखी घटना की कहानी 1971 में शुरू हुई थी. उस समय सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक कराकुम रेगिस्तान में प्राकृतिक गैस की तलाश कर रहे थे. ठीक इसी समय जमीन के नीचे मौजूद गैस का भंडार अचानक धंस गया. इसके बाद देखते वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया. इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया.

जैसे ही वहां पर गड्ढा बना उसके बाद से वहां से प्राकृतिक गैस बाहर आने लगी. इस कारण आसपास के वातावरण में जहरीली गैस फैल गई. कहा जाता है कि इस दौरान वैज्ञानिकों ने गैस को जलाने का फैसला किया. इसका उद्देश्य था कि ये गैस वातावरण में फैलने से पहले आग में जल जाए. हालांकि, उस दौरान जलनी शुरू हुई आग आज तक जल रही है. ऐसे में लोगों को इस आग के कारण प्रकृति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता सताती है. ऐसे में बायोटेक्नोलॉजिस्ट, डॉ. सौरभ कुमार झा से इस संबंध में हम कुछ सवालों के जवाब जानेंगे.

सवाल-जवाब भी जानिए

तुर्कमेनिस्तान में धधकती इस आग को लेकर बायोटेक्नोलॉजिस्ट, डॉ. सौरभ कुमार झा ने अपनी बात को रखा है. जब डॉ. झा से पूछा गया कि 54 साल से ये आग जल रही है, क्या ये कभी बुझ पाएगी इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले 54 साल से लगातार ये आग जल रही है, इसकी पहली वजह है प्रकृतिक गैस का रिसाव लगातार हो रहा है.

यहां पर मिथेन गैस का लगातार रिसाव हो रहा है, इसी गैस के कारण लगातार आग जल रही है. उन्होंने कहा कि पानी के माध्यम से इसको नहीं बुझाया जा सकता है. इसको बुझाने के लिए तुर्कमेनिस्तान सरकार लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में प्राकृतिक गैस के रिसाव को कम करके इस समस्या का समाधान किया जा सकता है.

वहीं, डॉ. सौरभ कुमार झा से पूछा गया कि जब क्या ये गैस जो नीचे से निकल रही है, तो हमारे वातावरण के लिए कितनी खतरनाक हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस रिसाव और आग की घटना का प्रकृति पर बहुत गहरा असर पड़ेगा. इसके कारण ग्लोबल वार्मिंग पर सबसे अधिक इफेक्ट आता है, क्योंकि ये ग्रीनहाउस गैस है. जैसा की हम जानते हैं कि ग्रीनहाउस गैस के कारण आने वाले समय में ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या पूरे विश्व में देखने को मिल रही है. हम आशा करते हैं कि इस प्रकार की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक गैस को नियंत्रित किया जाएगा और आग पर काबू पाया जाएगा. 

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About the Author

abhinav tripathi

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अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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