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अमेरिकी ठिकानों को बना रहा था निशाना... IRGC के इस साइबर कमांडर पर ट्रंप ने रखा 10 मिलियन डॉलर का इनाम

अमेरिका के विदेश विभाग ने Rewards for Justice कार्यक्रम के तहत IRGC के साइबर इलेक्ट्रॉनिक कमांडर आमीर अरब पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है. अमेरिका हमेशा ईरानी साइबर इलेक्ट्रॉनिक कमांड पर अपने संस्थानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाता रहा है.

Written By abhinav tripathi
Published: Sep 04, 2026, 09:40 AM IST | Updated: Sep 04, 2026, 04:19 PM IST
Image Credit: IRGC के साइबर इलेक्ट्रॉनिक कमांडर पर US ने रखा इनाम. (फाइल फोटो)
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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी 'महासंघर्ष' के बीच वाशिंगटन ने तेहरान के एक सीनियर साइबर अधिकारी पर 10 मिलियन डॉलर का ईनाम रखा है. अमेरिकी विदेश विभाग ने यह घोषणा अपने Rewards for Justice कार्यक्रम के अंतर्गत की है. अमेरिका की ओर से बताया गया कि जिस ईरानी अधिकारी पर इस इनाम की घोषणा की गई है, उसका नाम आमीर अरब है. वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साइबर इलेक्ट्रॉनिक कमांड से जुड़ा है.

दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, आमीर अरब ईरान के साइबर ऑपरेशन कमांड का नेतृत्व करता है. वह ऐसे साइबर समूहों को निर्देश देता है, जो ऑपरेशन कमांड अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का काम करते हैं.

अमेरिका के आरोप क्या हैं?

अमेरिका का दावा है कि आमीर अरब की भूमिका ईरान की साइबर गतिविधियों में अहम मानी जाती है. ऐसे में उसके नेतृत्व में काम करने वाले समूहों ने अमेरिका के कई अहम ढांचों को निशाना भी बनाया है. अपने नोटिस में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से शहीद हेम्मत और शुश्तारी नाम के एक साइब ग्रुप का जिक्र किया गया है. विभाग का मानना है कि इन ग्रुप्स को ही अमेरिकी बुनियादी ढांचे के खिलाफ साइबर गतिविधियों के लिए निर्देशित किया गया था.

इस प्रकार की गतिविधियों को अमेरिका ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना है. अमेरिका का कहना है कि अगर इन समूहों की पहचान करने के साथ इन्हें रोका नहीं गया, तो यह बिजली, पानी, संचार और दूसरी विशेष सेवाओं से जुड़े सिस्टम साइबर हमलों के निशाने पर आ सकते हैं.  

अमेरिका ने रखा 10 मिलियन डॉलर का इनाम

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से आईआरजीसी के साइबर नेटवर्क या फिर अमीर यारयाब से संबंधित विश्वसनीय जानकारी देने वाले लोगों से संपर्क करने को कहा गया है. सरकार ने माना कि उपयोगी जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा. इतना ही नहीं, जानकारी देने वाले की पहचान की जानकारी गुप्त रखी जाएगी और कुछ मामलों में उन्हें स्थान बदलने में भी मदद की जाएगी.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा है तनाव

गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय पर की गई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. दोनों देशों के बीच एक बार फिर से जंग शुरू हो चुकी है. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सैन्य और आर्थिक तनाव के साथ साइबर क्षेत्र में भी टकराव की संभावना बढ़ रही है.

बता दें कि पिछले काफी समय से ईरान और उससे जुड़े साइबर ग्रुप्स पर अमेरिकी संस्थानों और कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहता है. अमेरिका की ओर से लगाए गए इस आरोप और आमीर अरब पर घोषित किए गए इनाम के बाद तनाव और अधिक बढ़ने की संभावना है. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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