App

491 दिन सिर पर मंडराती रही मौत, सड़ने लगा पैर तो खुद काट लिया; यूक्रेनी सैनिक की 'वीरगाथा' कर देगी हैरान

रूस से जंग के बीच यूक्रेन का एक सैनिक करीब 491 दिनों तक एक लोहे की भट्टी में छिपा रहा और अपनी जान बचाता रहा. इस दौरान उसने खुद अपना पैर काटा. बाद में एक विशेष अभियान चलाकर यूक्रेनी सेना ने उसको बचाया है. सैनिक की वीरता की दुनिया तारीफ कर रही है.

491 दिन सिर पर मंडराती रही मौत, सड़ने लगा पैर तो खुद काट लिया; यूक्रेनी सैनिक की 'वीरगाथा' कर देगी हैरान
Image Credit: यूक्रेनी सैनिक की वीरगाथा ने दुनिया को किया हैरान. (फोटो- स्क्रीनशॉट)

जरा सोचिए, आप एक ऐसे जंग के बीचोंबीच फंसे हैं, जो किसी नरक से कम नहीं है. सिर पर हर समय ड्रोन और मिसाइलों के अटैक का खतरा मंडरा रहा है. आपका शरीर काम करना बंद कर चुका है और एक हिस्सा सड़ने लगा है. चारों ओर केवल दुश्मनों के हथियार हैं, खाने के लिए अन्न का एक दाना नहीं बचा है. एक तंग लोहे की भट्टी में दुबके हुए बस अपने जीवन की रक्षा कर रहे हैं. ऐसी स्थिति को सोचने मात्र से ही शरीर सिहर उठती है, लेकिन एक सैनिक ने इस कल्पना को सच कर दिखाया है.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं यूक्रेन की सेना में तैनात कोस्त्यंतिन व्लासेंको की, जो करीब  491 दिनों तक युद्ध के मोर्चे में फंसे रहे. उनकी उम्र करीब 49 साल है. यूक्रेन के खार्किव इलाके में वह एक-छोटी सी जगह पर फंसे थे, रूसी ड्रोन और बारूदी सुरंगों के कारण उन्हें वहां से निकालना बहुत मुश्किल था. हालांकि, बाद में उन्हें रेस्क्यू कर सही-सलामत निकाला गया. उन्होंने जिंदा बचने के लिए बहुत बड़ा संघर्ष किया. अब इस सैनिक की वीरगाथा लोगों के सामने आई है.

जिंदा रहने के लिए खुद काटे पैर

रिपोर्ट्स में बताया जाता है कि यू्क्रेनी सैनिक कोस्त्यंतिन व्लासेंको को भीषण ठंड के कारण फ्रॉस्टबाइट (frostbite) हो गया था. इस कारण ठंड से उनका बायां पैर सड़कर गिर गया. उनका दायां पैर भी लटकने लगा था. ऐसे में उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए खुद दायां पैर काट लिया. जिस दौरान पर एक जगह पर छिपे थे, वहां रूसी सेना बार-बार सरेंडर करने को कह रही थी. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और डटे रहे.

शुरुआत के समय में कोस्त्यंतिन व्लासेंको अपने एक साथी बास्की के साथ छिपे थे. दोनों एक कंक्रीट पाइप में रहते थे. पिछली सर्दियों में उस पाइप में पानी भर गया. जिस कारण उन्हें वह जगह छोड़नी पड़ी. इसके बाद दोनों ने एक खाली पड़े स्कूल में शरण ली. लेकिन अपने 50वें जन्मदिन पर बास्की मारे गए. हालांकि, व्लासेंको अकेले डटे रहे. रूस ने लाउडस्पीर से उन्हें सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह बोले रूसी युद्धपोतों भाड़ में जाओ.

दुश्मन के ड्रोन से बचने के लिए लगाए ये उपाय

बताया गया है कि रूस के ड्रोन के हमलों से बचने के लिए वह एक लोहे की भट्टी के भीतर छिप गए. इस भट्टी में उन्होंने करीब 8 महीने का वक्त गुजारा. हालांकि, इस दौरान यूक्रेनी ड्रोन उन्हें मदद पहुंचाते रहे. दवाइयां और खाना यूक्रेन की ओर से उन्हें पहुंचाया जाता रहा. उनकी पत्नी ने एक केयर पैकेज भी भेजा था. इसमें लेखक स्टीफन किंग का नॉवेल 'द आउटसाइडर' भी था.

यूक्रेनी सेना ने कैसे किया रेस्क्यू

अंततः यूक्रेन की सेना ने उनका रेस्क्यू किया और एक खास तरीके से उन्हें निकाला. बता दें कि यह दुनिया का पहला हवाई ड्रोन इवैक्यूएशन था. सेना ने व्लासेंको के पास एक फोन गिराया. इसमें निर्देश दिए गए थे कि कैसे खुद को इस ड्रोन से बांधना है. बता दें कि यूक्रेनी सेना की ओर से एक बॉम्बर में बदलाव किया गया था. इसको इस हिसाब से बनाया गया कि वह एक इंसान का वजन सुरक्षित तरीके से उठा सके. इसके बाद व्लासेंको ने खुद को ड्रोन के निचले हिस्से से बांध लिया.

65 फीट की ऊंचाई पर उड़ा ड्रोन

जब उन्होंने खुद को उस ड्रोन में बांधा, उसके बाद उन्हें लेकर ड्रोन करीब 65 फीट की ऊंचाई पर उड़ा. ड्रोन ने करीब 18 किलोमीटर का सफर तय किया. इस ड्रोन की सुरक्षा में तीन 'वैम्पायर' ड्रोन भी साथ में उड़ रहे थे. बाद में करीब 1 घंटे 14 मिनट के मिशन के बाद व्लासेंको सुरक्षित जमीन पर उतर गए. वहां ड्रोन ऑपरेटर ने उनका स्वागत किया और कहा कि आपका जमीन पर स्वागत है.

पत्रकारों को बताई अपनी कहानी

व्लासेंको को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उन्होंने यूक्रेनी पत्रकार यूरी बुटुसोव को अपनी कहानी बताई. व्लासेंको ने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है. यह एक अजूबा है और एक चमत्कार है. इस पूरी घटना की जानकारी यूक्रेन की सेना ने फेसबुक पर दी है. पोस्ट में कहा गया कि भारी दुश्मन ड्रोन और बारूदी सुरंगों के कारण उन्हें जमीनी वाहनों से निकालना मुश्किल था.

बयान में कहा गया कि युद्ध के पहले व्लासेंको एक खदान के ट्रक के चालक थे. रूसी हमले के बाद वह खुद सेना में शामिल हो गए. सेना की 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड की दूसरी बटालियन में उन्हें जगह मिली थी. खार्किव में एक एक घायल सैनिक को निकालने और उसकी जगह लेने के लिए भेजा गया था. 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
Read More