)
Russia Ukraine War: दुनिया ने अब तक रोबोटिक सैनिकों और लोहे के सूट को सिर्फ हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्मों में देखा था, लेकिन आज जेलेंस्की की फौज ने इसे यूक्रेन के जलते हुए मैदानों में सच साबित कर दिया है. यूक्रेन ने फ्रंट लाइन पर अपनी सबसे एडवांस 'कॉम्बैट एक्सोस्केलेटन' प्रणालियों को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है. आखिर ये तकनीक कैसे एक आम सैनिक को लोहे का सिपाही बना देती है, देखिए इस रिपोर्ट में.
विज्ञान की कथाओं, फिल्मों में आपने आयरन मैन या हॉलीवुड की 'एज ऑफ टुमॉरो' जैसी फिल्मों में सैनिकों को लोहे के सूट पहनकर लड़ते देखा होगा. लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच चल रही असली जंग में अब ये हकीकत बन चुका है.
ऐसे खौफनाक मंजर के बीच यूक्रेनी सेना ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने रूस के कमांडरों के होश उड़ा दिए हैं. यूक्रेन के रक्षा नवाचार प्लेटफॉर्म 'BRAVE1' के तहत विकसित किए गए 'कॉम्बैट एक्सोस्केलेटन' अब फ्रंट लाइन पर सैनिकों की सबसे बड़ी ढाल बन चुके हैं. ये कोई साधारण लोहे का ढांचा नहीं है, बल्कि मानव शरीर की क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाली एक आधुनिक मशीन है.
ये सैनिक की पीठ और पैरों पर पड़ने वाले शारीरिक दबाव को 30% तक कम करता है.
महज 2 किलो का ये मैकेनिकल ढांचा सैनिक को 70 किलो तक का भार आसानी से उठाने की ताकत देता है.
एल्युमीनियम मॉडल में लगे सेंसर्स सही कमांड देते हैं, जिससे वो 20 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक को मुख्य रूप से दो रूपों में उतारा गया है. पहला है पैसिव मॉडल जो बिना बैटरी के सिर्फ स्प्रिंग और लीवर मैकेनिक्स पर काम करता है. इसे पहनने में सिर्फ दो मिनट का समय लगता है. वहीं दूसरा है एआई-संचालित एक्टिव मॉडल, जिसके सेंसर्स सैनिक की चाल को रीयर-टाइम में समझकर उसकी मांसपेशियों की थकान को पूरी तरह मिटा देते हैं. तोपखाने के जो सैनिक दिनभर में केवल 50 भारी गोले उठा पाते थे, वे अब बिना थके 75 से ज्यादा गोले दाग रहे हैं.
लेकिन इस तकनीक का सबसे घातक रूप है एंटी-ड्रोन सुरक्षा फ्रेम.
आज के युद्ध में रूसी FPV सुसाइड ड्रोन यूक्रेन के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. इनसे बचने के लिए सैनिकों को भारी-भरकम 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' यानी EW जैमर्स और एक्स्ट्रा सुरक्षा कवच ढोना पड़ता था. अब इस एक्सोस्केलेटन के ऊपर ही एक सुरक्षा घेरा यानी एंटी-ड्रोन फ्रेम लगा दिया गया है. ये ढांचा भारी जैमर्स के वजन को खुद संभाल लेता है और सैनिक के चारों तरफ एक ऐसा अदृश्य सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे टकराकर ड्रोन हवा में ही रास्ता भटक कर तबाह हो जाते हैं.
#UCRANIA comienza a usar exoesqueletos en el frente .
Soldados con armazon antidrones se empezaran a ver en combate real pic.twitter.com/bpAJsK2vCD— la exocet (@pampaIIIpelis) September 25, 2026
फिलहाल इसे पूरी यूक्रेन आर्मी के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन फ्रंट लाइन, रसद सप्लाई और घायल सैनिकों को बचाने वाली रेस्क्यू टीमों के लिए ये एक 'स्टैंडर्ड हथियार' बनता जा रहा है.
दरअसल सैनिकों की कमी से जूझ रहे यूक्रेन के लिए ये तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि ये कम उम्र या कम शारीरिक क्षमता वाले रंगरूटों को भी पल भर में 'सुपर-सोल्जर' बना देती है.
साफ है कि यूक्रेन ने पहली बार वास्तविक युद्ध में एक्सोस्केलेटन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके भविष्य के युद्ध की परिभाषा बदल दी है. अब लड़ाई सिर्फ इंसानी जज्बे की नहीं, बल्कि इंसानी शरीर और रोबोटिक तालमेल की बन चुकी है.