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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन में जेलेंस्की की जगह नए नेता को लाने की बात कही है. साथ ही जेलेंस्की से रूसी तेल रिफाइनिरयों पर हमले की मांग की है. ट्रंप का यह बयान इसलिए अहम बताया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने मॉस्को के साथ डीजल समझौते को आगे बढ़ा रहा है. ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा,'उन्हें ये सब बंद करना ही होगा.' जबकि ट्रंप के इस कदम के बाद कीव को यह डर है कि इससे रूस के युद्ध को वित्त पोषित किया जाएगा.
रूस को वैश्विक बाजारों में डीजल की आपूर्ति करने की अनुमति देने वाले समझौते के ऐलान के एक दिन बाद, ट्रंप ने ये भी सुझाव दिया कि यूक्रेन को अपने राष्ट्रपति को बदल देना चाहिए. उन्होंने कहा,'मेरा सुझाव है कि उन्हें एक ऐसा नया नेता मिले जो समझौता कर सके'.
अमेरिकी राष्ट्रपति के ये तीखे बयान तब सामने आए, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ समझौते को आगे बढ़ाने के ट्रंप के फैसले को लेकर वाशिंगटन और कीव के बीच एक नया मतभेद उभर आया. मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक,'ट्रंप ने जेलेंस्की के जरिए रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के 6 अमेरिकी अनुरोधों को नजरअंदाज करने के बाद आगे बढ़ने का फैसला किया.'
अमेरिकी और रूस के इस समझौते से कीव नाराज है और जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि रूसी डीजल निर्यात पर पाबंदियों में ढील देने से मॉस्को को जंग को लंबा खींचने के लिए पैसा मिलेगा. यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यह समझौता उनके लिए हैरान करने वाला है.
अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप और उनके दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत में जेलेंस्की ने एक प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर रूस यूक्रेन के बिजली ढांचे पर हमले रोक देता है, तो यूक्रेन भी रूस की रिफाइनरियों पर हमले रोक सकता है, लेकिन ट्रंप चाहते थे कि रूस की तरफ से ऐसी कोई शर्त माने जाने का इंतजार किए बिना ही यूक्रेन अपने हमले रोक दे.
अमेरिका की इस मांग के पीछे एक वजह ईंधन की बढ़ती कीमतें भी थीं. अमेरिकी प्रशासन का मानना था कि यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से रूस को नुकसान तो हो रहा है, लेकिन इसका असर अमेरिका में भी पड़ रहा है और वहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं. अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'रिफाइनरियों पर हमले रूस के लिए परेशानी पैदा करते हैं, लेकिन इससे अमेरिका को भी नुकसान होता है.'