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चैनल पार, अवैध प्रवासियों को हिजाब का उपहार, ब्रिटेन में प्रवासी नीति पर अब क्यों भड़का विवाद?

ब्रिटेन में अवैध प्रवासियों को हिजाब बांटने का मुद्दा गरमाने लगा है. दावा किया गया है कि सरकार की ओर से छोटी नावों से ब्रिटेन पहुंचने वाले अवैध प्रवासियों को सरकारी पैसे से कपड़े बांटे जा रहे हैं. इस मुद्दे को वहां के विपक्ष ने उठाया और आरोप लगाया कि टैक्सपेयर्स के पैसे का गलत इस्तेमाल हो रहा है.

चैनल पार, अवैध प्रवासियों को हिजाब का उपहार, ब्रिटेन में प्रवासी नीति पर अब क्यों भड़का विवाद?
Image Credit: ब्रिटेन में फ्री हिजाब बांटने पर बवाल. (फाइल फोटो)

ब्रिटेन में अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है. इस बीच ब्रिटेन में एक नया मामला गरमा गया है, जिससे सियासी पारा बढ़ने लगा है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में अवैध प्रवासियों को मुफ्त हिजाब बांटे जा रहे हैं. ब्रिटेन के मुख्य विपक्षी दल कंजर्वेटिव पार्टी (टोरी) का दावा है कि सरकार टैक्सेपेयर्स के पैसे का गलत इस्तेमाल कर रही है. इसी मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है.

दरअसल, इस साल ब्रिटेन पहुंचने वाले 'स्मॉल बोट' प्रवासियों को 1000 से अधिक हिजाब बांटे जा चुके हैं. सरकार के इस कदम की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी (टोरी) ने आलोचना की है. विपक्षी दल की ओर से हिजाब को 'महिला दमन का साधन' बताया गया और कहा कि अवैध रूप से देश में घुसने वालों पर आम जनता की कमाई करना देश का आपमान है.

ब्रिटेन में क्यों गरमाया ये मुद्दा

ब्रिटेन सरकार के आंतरिक आंकड़ों से पता चलता है कि छोटी नावों के जरिए देश में अवैध रूस से प्रवेश करने वाले प्रवासियों को हर महीने करीब 162 मुस्लिम हेड कवर (हिजाब) बांटे जा रहे हैं. ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) के दस्तावेजों से पता चलता है कि इस साल जनवरी से जून के बीच प्रवासियों को 974 हिजाब बांट दिए. ऐसे में इस रफ्तार को देखते हुए माना जा रहा है कि अभी तक ये आंकड़ा 1500 के करीब पहुंच चुका होगा.

सरकार के इस कदम पर विपक्षी दल कंजर्वेटिव पार्टी (टोरी) ने तीखा हमला बोला है. शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिल्प ने कहा कि सरकार अवैध प्रवासियों को हिजाब बांटना तुरंत बंद करे. उनका कहना है कि हमारे देश में अवैध रूप से घुसपैठ करने वालों के धार्मिक पहनावे के लिए टैक्सपेयर्स का पैसा खर्च करना देशवासियों का अपमान है. किसी भी धार्मिक प्रथाओं के लिए फंड नहीं देना चाहिए.

'केवल पैसों को लिए ब्रिटेन आते हैं अवैध प्रवासी'

फिल्प की ओर से यहां तक दावा किया गया कि अवैध प्रवाली ब्रिटेन के मूल्यों से नफरत करते हैं और यहां केवल नौकरी और पैसे कमाने के सिलसिले में आते हैं. उनकी ओर से अवैध प्रवासियों को तुरंत निर्वासित करने की वकालत की गई. फिल्प के अलावा एजुकेशन सेक्रेटरी लौरा ट्रॉट की ओर से भी स्कूलों में हिजाब का विरोध किया गया है. उनकी ओर से कहा गया कि मेरा मानना है कि देश में महिला दमन के किसी भी साधन को हिस्सा नहीं बनाना चाहिए.

सरकार ने दिया अपना पक्ष

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सरकार की ओर सफाई जारी की गई है. होम ऑफिस के एक सूत्र ने दावा किया कि 'शॉर्ट-टर्म होल्डिंग फैसिलिटी नियमों' को मानते हुए केवल कानूनों का पालन किया जा रहा है. सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अवैध प्रवासियों को कपड़े मुहैया कराए. सरकार ने कहा कि इसमें सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की चीजें भी शामिल हैं.

आवश्यकता पड़ने पर सभी प्रवासियों को सूखे कपड़े का एक बेसिक पैक दिया जाता है.  रिपोर्ट्स में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि नावों से आने वाले प्रवासियों में तीन-चौथाई संख्या पुरुषों की होती है. यही कारण है कि इस साल 10,694 पैक पुरुषों को दिए गए हैं. इसके अलावा महिलाओं को 2,670 कपड़ों के पैक दिए गए.  

सुरक्षा का मुद्दा भी गरमाया

ब्रिटेन का यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब प्रवासियों के मुद्दे पर जनता में असंतोष काफी बढ़ा है. इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जाहिर की जा रही हैं. गत शुक्रवार (02 अक्टूबर) को दो ईरानी नागरिकों पर यहूदी समुदाय पर आतंकी हमले की साजिश रचने का आरोप लगा है. हैरान करने वाली बात है कि ये दोनों ईरानी छोटी नावों के जरिए ब्रिटेन आए थे.

इस बीच ब्रिटेन के लिए एक राहत की खबर भी सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल अवैध रूप से ब्रिटेन में दाखिल होनों वालों की संख्या में कमी देखने को मिली है. ब्रिटिश गृहमंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि क्रॉसिंग में काफी गिरावट देखने को मिली है और साल 2020 के बाद इस गर्मी सबसे कम प्रवासी यहां पहुंचे. बताया जाता है कि इस साल अभी तक करीब 19,000 प्रवासी आए हैं, जो साल 2025 की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम है.

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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