यारी दिखी; हिसाब बाकी: ट्रंप-शी की महा मुलाकात में क्या निकला? 5 बड़े Takeaways
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की. इस दौरान, दोनों नेता रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध बनाने पर सहमत हुए. आइए जानते हैं महाशक्तियों की मुलाकात के 5 बड़े Takeaways.
Trump-Xi meeting Takeaways: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच वैश्विक समस्याओं समेत आपसी विवाद के मुद्दों पर महामंथन हुआ. दोनों नेताओं ने आपसी चर्चा के बाद बनी सहमति को विन-विन सिचुएशन बताया है. इसी बीच, चीनी विदेश मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन की आर्थिक एवं कारोबारी टीमों के बीच बातचीत के नए दौर में दोनों पक्षों के बीच एक नई संयुक्त व्यवस्था बनी है, जो दोनों देशों के उद्योगों और आम लोगों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गुड न्यूज़ है. शी ने ये भी कहा कि कुछ मतभेदों के बावजूद अमेरिका और चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अपनी बातचीत जारी रख सकते हैं. दोनों इसके संभावित जोखिमों और फायदों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं और मिलकर AI के दुरुपयोग को रोकने के उपाय कर सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के लिए भव्य स्टेट डिनर की मेजबानी की. दिनभर की धूमधाम, औपचारिक समारोहों और द्विपक्षीय बातचीत जैसे दिखावटी तामझाम के पीछे दुनिया के दो सबसे बड़े आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच स्पष्ट तनाव नजर आए.
मंच पर सुपर-रिच और पर्दे के पीछे घमासान!
मेल-मिलाप और द्विपक्षीय वार्तालाप में अमेरिकी धनकुबेर यानी सुपर-रिच कारोबारी दिग्गज मौजूद रहे. खास मेहमानों में टेस्ला के मालिक एलन मस्क, एप्पल के टिम कुक, एनवीडिया के जेंसन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन शामिल थे. इससे संकेत मिले कि शी जिनपिंग के एजेंडे में कारोबारी तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दो अहम मुद्दे थे, जिन पर फोकस रहा.
चीनी विदेश मंत्रालय के पूरे बयान को पढ़ने के बाद जो पांच अहम बातें समझ में आती हैं, उनके बारे में आपको आगे बताएंगे. पहले देखिए ट्रंप और शी की केमिस्ट्री कैसी है. दोनों की दोस्ती का अंदाजा इस बात से लगता है कि शी से मिलने से पहले इसी महीने उन्होंने खुलेआम कहा था कि वह उनकी जासूसी करवाते हैं, क्योंकि चीन भी उन पर नजर रखता है.
मेजबान ट्रंप के आक्रामक स्वभाव और तीखे तेवरों के बीच शी का लहजा नरम है. वह नपे-तुले शब्द बोलते हैं. अपने उसी अंदाज में मेहमान शी ने कहा, 'जैसे नदी का प्रवाह नहीं रुकता, उसी तरह इतिहास भी एक जगह नहीं ठहरता. आइए, चीन-यूएस की दोस्ती के खूबसूरत रिश्ते को मजबूत बनाकर संबंधों का नया अध्याय लिखें.'
शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ दोस्ती का जाम टकराते हुए कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान बनाने का संकल्प लिया है' और चीन भी 'महान राष्ट्रीय पुनर्जागरण' हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है. ये दोनों लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं और निश्चित तौर पर एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं.
मेजबान ट्रंप ने भी शी को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और दोनों के बीच अपने करीबी व्यक्तिगत रिश्ते की जमकर तारीफ की.
पांच बड़ी बातें
कारोबार: अमेरिका और चीन ने ट्रंप के अमेरिका पहुंचने के साथ ही अपने व्यापारिक युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि दोनों देश उस डील को दो महीने के लिए और बढ़ाने पर सहमत हुए हैं. इस डील ने पिछले साल शुरू हुए व्यापार युद्ध को थामने में मदद की थी और इसकी डेडलाइन नवंबर में खत्म होने वाली थी. इस विस्तार से वॉशिंगटन और बीजिंग को 'आर्थिक मोर्चे पर दोनों क्या कर सकते हैं, यह समझने के लिए और समय' मिलेगा. दोनों देशों के बीच बराबरी का कारोबार करने पर फोकस है.
रेयर अर्थ मिनरल्स: दोनों नेताओं के बीच रेयर अर्थ खनिजों की आपूर्ति और तकनीक से जुड़े प्रतिबंध जैसे बेहद जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई. क्योंकि दोनों को तमाम जटिल समस्याओं के समाधान के लिए रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरत है.
ताइवान: चीनी राष्ट्रपति ने ट्रंप के सामने ताइवान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. चीनी सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शी ने कहा कि बीजिंग को उम्मीद है कि वॉशिंगटन 'ताइवान के सवाल को समझदारी और सावधानी से संभालेगा.' हालांकि, अमेरिका अब भी ताइवान की स्वतंत्रता का 'समर्थन' नहीं करने की अपनी पुरानी स्थिति पर कायम है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: AI को लेकर दोनों नेताओं के विचारों में मतभेद दिखा. इस पर वार्तालाप जारी रखने पर सहमति बनी है. शी जिनपिंग ने कहा, 'एआई के क्षेत्र में अग्रणी देशों के तौर पर अमेरिका और चीन को इसके विकास को जिम्मेदारी से संभालना होगा. हमारे पास एआई को अच्छे उद्देश्य के लिए विकसित करने और उसका प्रबंधन करने की क्षमता और जिम्मेदारी दोनों हैं. यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई का विकास हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहे और लोगों के कल्याण के काम आए.'
रणनीतिक खतरा: शी जिनपिंग ने एक बार फिर चेताया कि अमेरिका और चीन को 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' से बचना होगा. मई में ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान भी शी ने इसी तरह की चेतावनी दी थी. 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' यानी वह स्थिति जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित शक्ति की जगह लेने की स्थिति में पहुंचती है, तो अक्सर इसका नतीजा युद्ध के रूप में सामने आता है. तो ऐसा नहीं होना चाहिए.
शी जिनपिंग ने ये भी कहा, 'एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ होनी चाहिए, ऐसी कुश्ती नहीं ,जिसमें एक जीते और दूसरा हारे.' यानी सहयोग से दोनों देशों को फायदा हो सकता है, जबकि टकराव से दोनों को नुकसान होगा. निश्चित समय अंतराल पर दोनों देशों के बीच सैन्य बातचीत और संकट की स्थिति में टकराव रोकने के लिए एक असरदार सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए.
ट्रंप ने दोनों देशों के साझा इतिहास का हवाला देते हुए आपसी सहयोग की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा, 'साझा हितों को आगे बढ़ाकर दोनों काफी कुछ हासिल कर सकते हैं.' इसके लिए उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के खिलाफ अमेरिका और चीन की साझेदारी का भी जिक्र किया.
मौके पर मौजूद पत्रकारों ने नीतिगत बातचीत से जुड़े सवाल पूछे तो ट्रंप ने बात बदलते हुए उन्हें टाल दिया. ट्रंप ने कहा, 'उन्हें अच्छा ग्रेनाइट पसंद है... शानदार बैठक रही. थैंक यू.'