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ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के नए दौर की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने क्यूबा के लोगों के माथों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. ट्रंप ने अपने इस बयान में बहुत जल्द ही क्यूबा में कूटनीतिक तनाव और सैन्य संघर्ष दिखने के संकेत दिए हैं. ट्रंप ने कहा है कि वो समय दूर नहीं है जब ईरान से लौटते समय अमेरिकी युद्धपोत क्यूबा के तट के नजदीक लंगर डाल सकते हैं. हालांकि ट्रंप की इस धमकी को सीरियस नहीं लेते हुए क्यूबा के विदेश मंत्री ने कहा है कि उनका देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
अमेरिका और क्यूबा के बीच तेज हुई जुबानी जंग के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी क्यूबा के लोगों से सीआईए के एजेंट्स के साथ क्यूबा की गोपनीय साझेदारी करने की अपील की है. इसके साथ वॉशिंगटन ने क्यूबा की सरकारी कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध और सख्त कर दिए हैं. बताते चलें कि ट्रंप क्यूबा पर वेनेजुएला जैसा पॉलिटिकल क्रैकडाउन करके वहां अपनी पसंद का राष्ट्रपति बिठाना चाहते हैं. इसी साल जनवरी में ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट, रीपोस्ट की जिसमें मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला नेता बताया गया था.
फ्लोरिडा में मध्यावधि चुनावों के प्रचार अभियान के दौरान ट्रंप ने कहा, 'ईरान से लौटते समय हम क्यूबा का भी ध्यान रखेंगे. हमारे वे खूबसूरत युद्धपोत क्यूबा के पास से गुजरेंगे. हम उनमें से किसी एक को तट से करीब 50 गज की दूरी पर रुकवाएंगे. वे अपने हाथ ऊपर उठा देंगे और फिर हम मार्को रुबियो को वहां भेज देंगे.'
ट्रंप के इस बयान पर क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए क्यूबा को लेकर अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं और धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिकी नेताओं को अपनी हद में रहने को कहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रोड्रिगेज ने लिखा, 'हमारे समुद्र तट खूबसूरत हैं, लेकिन यहां चूना पत्थर की बेहद नुकीली चट्टानें भी हैं, जो उन लोगों का काल बन सकती हैं, जो शत्रुतापूर्ण इरादों के साथ क्यूबा पर कब्जा करके राज करने की मंशा से हमारे तटों पर पहुंचने की बात कर रहे हैं.'
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के लोगों से नई सरकार यानी सत्ता में बदलाव लाने के लिए सीआईए के साथ गोपनीय साझेदारी करने की अपील करते हुए X पर यह बात लिखी- 'क्यूबा में बदलाव चाहने वालों के लिए ये सुनहरा मौका है. अधूरे वादों, भ्रष्टाचार और कुछ लोगों के विशेषाधिकार वाले सिस्टम से पैदा हुई निराशा के बीच मौके का फायदा उठाइए. CIA के साथ साझेदारी करके वो बदलाव लाइए, जिसकी आप इच्छा रखते हैं.'
To those who seek to create positive change in Cuba - now is the time. The disappointment of failed promises, corruption, and the privileged lives of only a few; seize this opportunity to create the change you desire through a discrete partnership with the CIA.
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) October 23, 2026
अमेरिका ने दशकों से क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे क्यूबा में ईंधन, बिजली और जरूरी सामानों की भारी किल्लत आए दिन बनी रहती है. ट्रंप प्रशासन के ताजा फैसलों के तहत क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और मेटल सेक्टर में काम करने वाली क्यूबा की नौ सरकारी कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.
वहीं इसके साथ अमेरिका ने उन नियमों को भी सख्ती से लागू किया है जो अमेरिकी नागरिकों को क्यूबा की सरकारी कंपनियों के साथ कारोबारी गतिविधियों में शामिल होने से रोकते हैं.
अमेरिका और क्यूबा के बीच पुरानी अदावत है. जिसे आज भी उस दौर के लोग भुला नहीं पाए हैं. क्यूबा की भौगोलिक दूरी अमेरिका से महज 145 किलोमीटर है. तत्कालीन सोवियत संघ यानी आज के रूस ने इस भौगोलिक निकटता और वैचारिक दूरी का इस्तेमाल 1962 में अपने फायदे के लिए किया था.
अमेरिका, क्यूबा को शुरुआत से ही अपनी जागीर मानता है. वो यहां किसी दूसरी बड़ी ताकत रूस का दखल बर्दाश्त नहीं करना चाहता था. हालांकि अमेरिकी चौकसी के बावजूद रूस ने एक जमाने में क्यूबा की धरती से ही अपनी परमाणु मिसाइलों का ऐसा ट्रेलर दिखाया था कि न सिर्फ अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी समेत रक्षा मंत्रालय पेंटागन के फौजी अफसरों के पसीने छूट गए थे.
साल 1959 में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांति के बाद क्यूबा एक कम्युनिस्ट देश बन गया था. इसके बाद अमेरिका और क्यूबा के रिश्ते खराब होते चले गए. क्यूबा ने रूस के साथ मिलकर अमेरिका को जो आंख दिखाई थी, उसे वाशिंगटन की सत्ता चलाने वाले लोग चाहे रिपब्लिकन हो या डेमोक्रेट भुला न पाए हैं.
ये वो किस्सा है जिसके गवाह रहे लोगों ने अमेरिकी अखबारों और टीवी चैनलों पर उस दौर का हाल बताया था कि कैसे सुपरपावर की सांसें हलक में अटक गई थीं.
इस किस्से का खुलासा 14 अक्टूबर 1962 को उस वक्त हुआ था जब अमेरिका के एक टोही विमान ने देखा कि महज चंद किलोमीटर दूरी पर क्यूबा में सोवियत संघ ने अपनी परमाणु मिसाइलों का जखीरा तैनात कर दिया है. इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति को सोवियत संघ के पास बातचीत के लिए प्रस्ताव भेजना पड़ा था. उस टोही विमान ने 800 से ज्यादा तस्वीरें खींची जिन्हें देखकर अमेरिका हिल गया था.
उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच 'कोल्ड वॉर' चरम पर था. रूस ने अमेरिका की नाक के नीचे क्यूबा में परमाणु हथियार तैनात करते हुए अमेरिका से अपना वो हिसाब किताब चुकता कर लिया था, जिसके तहत अमेरिका ने कुछ साल पहले ही ब्रिटेन, तुर्की और इटली में 100 से ज्यादा परमाणु मिसाइलें तैनात करके रूसी दबदबे को चुनौती देते हुए उसका इगो हर्ट किया था.
क्यूबा में रूस की परमाणु मिसाइलें देखते ही अमेरिका ने डैमेज कंट्रोल शुरू किया. राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने यूएस नेवी को क्यूबा की नौसैनिक घेराबंदी का आदेश दिया. इस कदम के साथ सोवियत संघ को बातचीत की टेबल पर लाया गया. 28 अक्टूबर को कैनेडी के सोवियत संघ को भेजे गए मैसेज से वो संकट तब टला जब सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव क्यूबा से अपनी मिसाइलों को हटाने के लिए तैयार हो गए. हांलाकि उन्होंने अमेरिका के सामने दो शर्तें रखीं, पहली- अमेरिका, क्यूबा पर हमला नहीं करेगा और दूसरी- अमेरिका तुर्किये और रूस की सीमा के नजदीक तैनात अपनी मिसाइलों को हटा लेगा.
समय का पहिया कुछ और घूमा तो राउल कास्त्रो ने क्यूबा की सत्ता संभाली. उसी दौरान अमेरिका में 'ओबामा युग' की शुरुआत हुई. बराक ओबामा ने क्यूबा से लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में कदम उठाने और मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने को कहा ताकि क्यूबा पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जा सके.
दिसंबर 2014 में ओबामा और राउल कास्त्रो ने ऐलान किया कि दोनों देश आपसी संबंध सामान्य करेंगे. जुलाई 2015 में दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में अपने दूतावास फिर से खोल दिए.
मार्च 2016 में ओबामा ने क्यूबा की ऐतिहासिक यात्रा की. 1928 के बाद किसी पद पर रहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की वो पहली क्यूबा यात्रा थी.
आगे दोनों देशों के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ा. ट्रंप, राष्ट्रपति बने तो तनाव चरम पर पहुंचा. इस तरह कारोबारी से नेता बने ट्रंप ने क्यूबा पर प्रतिबंधों की झड़ी लगाते हुए उसकी इकोनॉमी को दबा दिया.