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Shehbaz Sharif UN Speech in Hindi: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात संयुक्त राष्ट्र आम सभा को संबोधित किया. इस दौरान पुरानी आदत से मजबूर उन्होंने एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा और कहा कि पाकिस्तान इस खित्ते के अपने भाई-बहनों के साथ खड़ा है. उन्होंने बेशर्मी के साथ पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष में अपनी जीत का दावा भी किया. साथ ही, सिंधु जल संधि का पानी रोकने पर युद्ध की गीदड़भभकी भी दी. जब वे यूएन के मंच से बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहे थे तो उनके सामने वाली कुर्सियों पर बैठे भारतीय राजनयिक मंद-मंद मुस्करा रहे थे.
पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए शहबाज शरीफ ने कहा, 'एक साल पहले, पाकिस्तान को भारत की ओर से झूठे बहाने से बाहरी हमले का सामना करना पड़ा था. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने स्वाभाविक अधिकार का इस्तेमाल किया. हमारी बहादुर और साहसी सेना ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के दिलेर नेतृत्व में सटीकता और पेशेवर अंदाज़ में जवाब दिया. उन्होंने दुश्मन को चुप करा दिया. उसके हमले को नाकाम किया और उसे ऐसा सबक सिखाया जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा.'
जब पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने मई 2025 के संघर्ष में पाकिस्तान की 'जीत' का दावा करना शुरू किया तो सामने की पंक्ति में बैठे भारतीय डिप्लोमैट आर. श्रीनिवास हंस पड़े.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताते हुए शहबाज़ शरीफ बोले, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मज़बूत और दूरदर्शी लीडरशिप की वजह से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बची. उन्होंने ऐसे अहम मोड़ पर सही समय पर दखल दिया, जब परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसी देश पूरी तरह से युद्ध के कगार पर खड़े थे. कौन जानता है कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस नाज़ुक घड़ी में साफ़ सोच और सही कदम के साथ दखल न दिया होता, तो कितनी तबाही मच सकती थी. इसलिए हमें यह पक्का करना होगा कि दक्षिण एशिया फिर कभी उस खतरनाक मोड़ पर न पहुंचे.'
LIVE: Pakistan PM Muhammad Shehbaz Sharif Addresses UN General Assembly I ECONOMIC CRISIS | IMF | TERRORISM
— ANI (@ANI) September 25, 2026
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अपना कश्मीर राग गाने से नहीं चूके. उन्होंने कहा, 'आठ दशकों से कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने के अपने गंभीर वादे को पूरा करने का इंतज़ार कर रहे हैं. कई पीढ़ियों ने अवैध कब्ज़े, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, ज़बरदस्ती गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सज़ा का सामना किया है.'
जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान की शह-रग बताते हुए शहबाज शरीफ ने कहा, 'हाल ही में, डेमोग्राफिक री-इंजीनियरिंग (जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव) और अन्य अवैध तरीकों से जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं. इस मंच से, मैं अपने कश्मीरी भाई-बहनों को पूरे अधिकार के साथ भरोसा दिलाता हूं कि हम उन्हें आत्म-निर्णय का अधिकार मिलने तक अपना पूरा राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे. कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान की 'शह-रग' (जीवन-रेखा) रहा है और हमेशा रहेगा.'
सिंधु के पानी पर भारत को गीदड़भभकी देते हुए शहबाज ने कहा, 'सिंधु नदी प्रणाली का साझा पानी न सिर्फ़ पाकिस्तान के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवन-रेखा है. पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. भारत को इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए.'
भारत को धमकी देने के साथ ही शहबाज शरीफ शांति का राग अलापने से भी नहीं चूके. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने अपना फैसला कर लिया है. हमने टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना है. हमने जबरदस्ती के बजाय सहयोग को चुना है. हमने जंग के बजाय शांति को चुना है.'
संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर भी शहबाज शरीफ आरएसएस पर निशाना साधना नहीं चूके. उन्होंने कहा, 'इस्लामोफ़ोबिया में तेजी से हो रही बढ़ोतरी बहुत चिंताजनक है, क्योंकि मुसलमानों को हेट स्पीच, भेदभाव, मस्जिदों पर हमलों और पवित्र क़ुरान के अपमान का सामना करना पड़ रहा है. हमारी सीमा के ठीक उस पार (भारत में), RSS की विचारधारा धार्मिक नफ़रत फैला रही है. जिससे लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, पूजा-स्थलों पर हमले और धार्मिक आज़ादी पर पाबंदियां जैसी घटनाएं हो रही हैं.'
अपने मुल्क पाकिस्तान को आतंक पीड़ित बताते हुए शहबाज शरीफ ने कहा, 'हमने अपने ही शहरों और पहाड़ों में आतंकवादियों का मुक़ाबला किया है. इस दौरान हमने लगभग एक लाख कीमती जानें गंवाई हैं और 150 अरब डॉलर से ज़्यादा का आर्थिक नुकसान उठाया है. आज दुनिया ज़्यादा सुरक्षित है. मैं पूरी विनम्रता के साथ यह कहना चाहता हूं कि आज दुनिया हमारी बहादुर सेना और दिलेर नागरिकों की कीमती कुर्बानियों की वजह से सुरक्षित है. जिन्होंने इन आतंकवादियों और भाड़े के लड़ाकों का डटकर सामना किया.'
अफगानिस्तान को आतंक प्रायोजित देश बताते हुए पाकिस्तानी पीएम बोले, 'विदेशों से फंड पाने वाले गुट अफ़ग़ानिस्तान के अंदर मौजूद सुरक्षित ठिकानों से पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं. ऐसे सभी हमले, जिनमें अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से होने वाली घुसपैठ भी शामिल है, पूरी तरह से बंद होने चाहिए. यह पक्का करने के लिए ठोस और निर्णायक कार्रवाई की जानी चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल कभी भी पाकिस्तान या किसी दूसरे देश के ख़िलाफ़ न हो. हर हाल में अफ़ग़ान लोगों, खासकर महिलाओं और लड़कियों के बुनियादी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए.'
सऊदी अरब के साथ फर्जी सहानुभूति का इजहार करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा, 'हम सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के हालिया निंदनीय हमलों की एक बार फिर कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. पवित्र शहर मक्का अल-मुकर्रमा पर ड्रोन हमले की कोशिश ने दुनिया भर के मुसलमानों को आक्रोशित कर दिया है. हरमैन शरीफ़ैन की सुरक्षा और पवित्रता के लिए कोई भी खतरा हमारी 'रेड लाइन' है, जिसे कभी पार नहीं किया जाना चाहिए. कोई भी मुसलमान ऐसे घिनौने अपराध के बारे में सोचने की हिम्मत भी नहीं कर सकता.'
शहबाज शरीफ ने कहा, 'पाकिस्तान सऊदी अरब के भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है, जैसा कि हम हमेशा से अपने इतिहास में रहे हैं. शांति के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के बीच हुए ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' से भी झलकती है. यह गठबंधन किसी भी देश के ख़िलाफ़ नहीं है. यह इस क्षेत्र में रक्षा, स्थिरता और शांति के लिए एक सामूहिक प्रतिबद्धता है.'
ईरान में कथित शांति वार्ता के लिए खुद के मुल्क की पीठ थपथपाते हुए शहबाज शरीफ ने कहा, 'इस अहम मोड़ पर, पाकिस्तान ने तेज़ी से कदम उठाने का फ़ैसला किया. मिली-जुली कोशिशों से, पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान को इस्लामाबाद में एक साथ लाने में कामयाबी हासिल की. इस्लामाबाद में हुई बातचीत से लेकर 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग' तक, इस गंभीर टकराव को खत्म करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए. यहां मैं पाकिस्तान के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ और आर्मी चीफ़, फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की दिल से तारीफ़ करता हूं, जिनकी लगातार कोशिशों ने बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हालात में भी कूटनीति के लिए गुंजाइश बनाने में मदद की.'
जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तानी पीएम बोले, 'दुनिया भर में होने वाले उत्सर्जन में पाकिस्तान का हिस्सा 1% से भी कम है, फिर भी उसे बार-बार जलवायु परिवर्तन के भयानक नतीजों का सामना करना पड़ता है. इसलिए, विकसित देशों को बिना किसी देरी के जलवायु वित्त से जुड़े अपने वादों को पूरा करना चाहिए. उन्हें नुकसान और क्षति के लिए तेजी से फंड देना चाहिए. साथ ही, हालात के अनुकूल ढलने और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता के लिए मदद सुनिश्चित करनी चाहिए.'