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क्या हमारे सौरमंडल के बाहर भी कोई दुनिया है, जो सिग्नल भेज रही है? यह सवाल इसलिए उठा है, क्योंकि अंतरिक्ष की अथाह गहराइयों से पहली बार एक अनोखा रेडियो सिग्नल मिला है, जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. दक्षिण अफ्रीका के एक हाईटेक टेलीस्कोप से पता चला है कि यह सिग्नल किसी तारे से नहीं, बल्कि सीधे उसी ग्रह से निकल रहा है, जहां हमारी पृथ्वी से हजारों गुना ज्यादा ताकतवर चुंबकीय तूफान आ रहे हैं. यह किसी एलियन का संदेश नहीं है, बल्कि उस ग्रह पर होने वाली एक बेहद ताकतवर कुदरती घटना का नतीजा है, जिसे वैज्ञानिक पहली बार इतने करीब से समझ पाए हैं.
'हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स' और 'यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन' के शोधकर्ताओं की एक टीम ने पुष्टि की है कि ये रेडियो तरंगें पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित 'बीटा पिक्टोरिस बी' (Beta Pictoris b) नाम के एक विशाल गैसीय एक्सोप्लैनेट (सौरमंडल के बाहर स्थित ग्रह) से आ रही हैं.
'बीटा पिक्टोरिस बी' नाम का यह ग्रह पहली बार साल 2008 में खोजा गया था. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, यह इतना विशाल है कि इसका द्रव्यमान हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से भी करीब 12 गुना ज्यादा है. यह अपने तारे से काफी दूर है और उसका एक चक्कर लगाने में इसे 23 साल से भी ज्यादा का समय लग जाता है. वैज्ञानिकों को इस इलाके से पहले भी रेडियो सिग्नल मिल रहे थे, लेकिन उस वक्त ऐसी तकनीक नहीं थी जिससे यह साफ हो सके कि आवाज तारे की है या उसके चक्कर लगा रहे ग्रह की.
सिग्नल असल में कहां से आ रहा है, यह पक्का करने के लिए वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका के ताकतवर 'मीरकैट' (MeerKAT) रेडियो टेलीस्कोप की मदद ली. इस टेलीस्कोप से पूरे इलाके की कई बार बारीकी से जांच की गई. इस आधुनिक टेलीस्कोप की वजह से वैज्ञानिक तारे के शोर को अलग कर पाए और सीधे 'बीटा पिक्टोरिस बी' से निकल रही रेडियो तरंगों को साफ-साफ पकड़ लिया. इस पूरी रिसर्च की जानकारी फिलहाल arXiv प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई है, जिसकी समीक्षा जल्द ही एक प्रतिष्ठित साइंस जर्नल में पूरी की जाएगी.
अंतरिक्ष से जब भी कोई रहस्यमयी सिग्नल मिलता है, तो सबसे पहले यही ख्याल आता है कि कहीं दूसरी दुनिया के जीवों (एलियंस) ने संपर्क तो नहीं साधा? लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि यह किसी एलियन का भेजा हुआ मैसेज नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में होने वाली एक कुदरती घटना है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सिग्नल उस ग्रह पर उठने वाले बेहद विशाल 'ऑरोरा' (ध्रुवीय रोशनी) की वजह से निकल रहा है. जैसे हमारी पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर आसमान में खूबसूरत हरी-नीली रोशनी चमकती है, ठीक वैसा ही वहां भी हो रहा है फर्क सिर्फ इतना है कि उस ग्रह पर यह नजारा पृथ्वी से लाखों गुना ज्यादा बड़ा और भयंकर है.
अंतरिक्ष से आ रहे बेहद तेज और ऊर्जा से भरे कण जब इस ग्रह के भारी-भरकम चुंबकीय क्षेत्र के असर में आकर इसके वायुमंडल से टकराते हैं, तो वहां से बड़े पैमाने पर रेडियो ऊर्जा निकलती है. 'बीटा पिक्टोरिस बी' अपनी धुरी पर बहुत तेज रफ्तार से लट्टू की तरह घूमता है. यह ग्रह सिर्फ 8 से 9 घंटे में ही अपना एक चक्कर पूरा कर लेता है. इतनी तेज रफ्तार की वजह से वहां जबरदस्त करंट (इलेक्ट्रिकल करंट) पैदा होता है, और यही वजह है कि ये रेडियो सिग्नल थोड़ी-थोड़ी देर में बार-बार छूटते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ग्रह की चुंबकीय ताकत हमारी पृथ्वी से करीब 2,500 गुना ज्यादा है.
सौरमंडल के बाहर मौजूद किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) का यह पहला सीधा सबूत और नाप-जोख है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से दूर मौजूद नए ग्रहों की अंदरूनी बनावट, उनके माहौल और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने में काफी मदद मिलेगी. रिसर्चर्स का कहना है कि हमारे अपने सौरमंडल के ग्रहों में ऐसी रोशनी और रेडियो तरंगें पहले भी देखी गई हैं, लेकिन अंतरिक्ष के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सौरमंडल के बाहर किसी ग्रह से आ रहे रेडियो सिग्नल की बिना किसी संशय के 100% पक्की पहचान हुई है.