App

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका को एआई सुपरपावर बनाये रखना चाहते हैं तो एंथ्रोपिक के पीछे क्यों पड़े हैं?

अमेरिका को Ai सुपरपावर बनाने की राह पर चल रहे राष्ट्रपति ट्रंप और देश की प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक आमने-सामने आ गए हैं. सुरक्षा और साइबर खतरों को लेकर व्हाइट हाउस की सख्ती से सिलिकॉन वैली में नया विवाद शुरू हो गया है.

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका को एआई सुपरपावर बनाये रखना चाहते हैं तो एंथ्रोपिक के पीछे क्यों पड़े हैं?
Image Credit: ट्रंप और एंथ्रोपिक विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का लक्ष्य बिल्कुल साफ है. वो अमेरिका को चीन के मुकाबले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर बनाए रखना चाहते हैं. चाहे ये चुनौती कैसी भी हो. लेकिन पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की ही सबसे प्रमुख एआई कंपनियों में से एक, एंथ्रोपिक के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाए हैं. ट्रंप के इस कदम से अमेरिकी टेक कंपनियों को डर सताने लगा है कि कहीं वो चीन से एआई के मामले में पीछे न रह जाए. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ट्रंप एंथ्रोपिक के पीछे क्यों पड़े हैं? अगर ट्रंप को AI अच्छा लगता है तो एंथ्रोपिक बुरा क्यों लगता है?

7 अप्रैल को हुई थी शुरुआत

इस पूरे मामले की शुरुआत इसी साल 7 अप्रैल से हुई. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने वाशिंगटन में बैंक ऑफ अमेरिका, गोल्डमैन सैस, जेपी मॉर्गन और सिटीग्रुप जैसे बड़े बैंकों के प्रमुखों के साथ एक अर्जेंट मीटिंग बुलाई गई. इस मीटिंग की वजह थी एंथ्रोपिक कंपनी का नया एआई मॉडल, जिसका नाम है मिथोस. माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिकी प्रशासन को गुप्त रूप से चेतावनी दी थी कि मिथोस मॉडल में साइबर सुरक्षा की कमियों को बहुत तेजी से पकड़ने की क्षमता है. इसका मतलब यह था कि कोई भी कम अनुभव वाला व्यक्ति भी इस मॉडल की मदद से बैंकों, पावर ग्रिड और अमेरिकी सरकारी नेटवर्क पर बड़ा साइबर हमला कर सकता था.

लेकिन असली विवाद 9 जून को शुरू हुआ, जब एंथ्रोपिक ने अपना नया मॉडल फेबल सार्वजनिक रूप से जारी किया. लॉन्च के दो दिन बाद अमेजॉन के रिसर्चर्स ने भी पाया कि फेबल मॉडल के सुरक्षा चक्र यानी सेफ्टी गार्ड-रेल्स को तोड़ा जा सकता है. इसे तकनीकी भाषा में जेलब्रेक कहा जाता है. यानि कोई मझा हुआ साइबर एक्सपर्ट फेबल पर नियंत्रण पा सकता है. सोचिए जिस फेबल को डिजाइन किया गया बैंकिंग सुरक्षा के लिए. उसी फेबल का सुरक्षा घेरा टूटते ही बैंकिंग और डिजिटल सिस्टम की कमियां ढूंढकर ऑटोमेटेड साइबर हमले करने में इसे साइबर एक्सपर्ट सक्षम कर सकते हैं. इस खबर के सामने आने के बाद व्हाइट हाउस में अफरातफरी मच गई.

वाइट हाउस ने एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई से तुरंत फेबल मॉडल को बंद करने को कहा. लेकिन डारियो अमोदेई ने ऐसा करने से मना कर दिया. उनका तर्क था कि दुनिया के हर बड़े एआई मॉडल में जेलब्रेक की गुंजाइश होती है और इसे इस तरह बंद कराना पूरे एआई उद्योग के लिए एक गलत मिसाल बनेगा.

एंथ्रोपिक के इनकार के बाद वाइट हाउस ने वाणिज्य मंत्रालय के जरिए एंथ्रोपिक पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू कर दिए. इस निर्देश के तहत किसी भी विदेशी नागरिक या संस्था को फेबल और मिथोस मॉडल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई. हालांकि कंपनियों के आगे ट्रंप को झुकना पड़ा और 30 जून को कुछ प्रतिबंध हटा लिए गए. अब Fable 5 और Mythos 5 की पहुंच फिर से बहाल कर दी गई.

शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई बैठक

एआई के इस पूरे विवाद को लेकर सतर्कता बरतते हुए वाशिंगटन के सिचुएशन रूम में शीर्ष अधिकारियों की बैठकें हुईं. नेशनल साइबर डायरेक्टर सीन केर्न-क्रॉस ने एआई मॉडल्स की समीक्षा के लिए एक नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू कर दिया है.

पहले वाइट हाउस एआई मॉडल्स की 60 दिनों की अनिवार्य सरकारी समीक्षा का नया नियम लाना चाहता था. लेकिन गूगल, ओपन एआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने इसका विरोध शुरु कर कर दिया. ट्रंप के एआई सलाहकार डेविड सैस का भी तर्क था कि सख्त नियमों से अमेरिका चीन से पीछे छूट जाएगा. इसके बाद समझौते के तहत 2 जून को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए. अब 2 जून को जारी राष्ट्रपति ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की समय सीमा पूरी हो चुकी है. इसके तहत वाणिज्य मंत्रालय और सेंटर फॉर एआई स्टैंडर्ड्स एंड इनोवेशन ने एंथ्रोपिक, ओपन एआई और गूगल जैसे फ्रंटियर मॉडल डेवलपर्स के लिए अनिवार्य सेफ्टी असेसमेंट की नई गाइडलाइंस को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है.

असल में अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां सरकार के साथ साठ-गांठ करके एक तरह का कार्टेल बनाना चाहती हैं ताकि कोई नया कॉम्पिटिटर खड़ा न हो सके. लेकिन ट्रंप और टेक कंपनियों की इस अंदरूनी लड़ाई का सीधा फायदा चीन को मिल रहा है. जब अमेरिका अपनी ही टेक कंपनियों पर शिकंजा कसेगा, तो दुनिया चीन के सस्ते डीप-सीक मॉडल की तरफ भागेगी.

 AI एल्गोरिदम और डेटा सेंटर पर जोर

आज दुनिया में सुपरपावर बनने की होड़ परमाणु बमों से हटकर एआई एल्गोरिदम और डेटा सेंटरों पर आ चुकी है. और इस जंग में दो सबसे बड़े दावेदार हैं अमेरिका और चीन. अमेरिका की ओपन-आई और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज टेक कंपनियां एआई तकनीक पर अपना एकाधिकार जमाना चाहती हैं. इसके लिए किसी भी तरह का जोखिम लेने से पीछे नहीं हटना चाहती. दूसरी तरफ चीन एक अलग ही चाल चल रहा है. चीन ने ब्रिक्स की बैठक में प्रस्ताव रखा कि एआई को ओपन-सोर्स बनाया जाए. यानी चीन अपना सस्ता एआई मॉडल जैसे डीप-सीक पूरी दुनिया में मुफ्त बांट रहा है ताकि भविष्य के ग्लोबल नियमों की कमान उसके हाथ में आ जाए.

चीन को पीछे छोड़ने की तैयारी भी

24 सितंबर की ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक से ठीक पहले वॉशिंगटन का रुख साफ है. राष्ट्रपति ट्रंप चीन को पछाड़ने के लिए अमेरिकी एआई इंडस्ट्री को पूरी आजादी देना चाहते हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर खतरों की आती है, तो व्हाइट हाउस किसी भी टेक कंपनी को ढील देने के मूड में भी नहीं है. एंथ्रोपिक पर कसता शिकंजा यह साबित करता है कि आने वाले दिनों में सिलिकॉन वैली को व्हाइट हाउस के बनाए सुरक्षा नियमों के दायरे में ही काम करना होगा.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
Read More