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पिछले कुछ सालों से रूस और यूक्रेन के बीच जंग चल रही है. इस तनाव को खत्म कराने के लिए तमाम कोशिशें की गई हैं, लेकिन नतीजा नहीं निकला. अब इस भीषण जंग को खत्म कराने और दुनिया को बड़े आर्थिक संकट से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा दांव चल दिया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुलासा किया कि भारत इस युद्ध के सबसे संवेदनशील मसलों को सुलझाने के लिए रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ लगातार संपर्क में है.
अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एस. जयशंकर ने यह भी बताया है कि भारत ने दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए एक खास '3-पॉइंट प्लान' सामने रखा है, जिसका मकसद दुनियाभर में फूड सिक्योरिटी और एनर्जी क्राइसिस को टालना है.
#WATCH | Atlanta, US: On the G20 Foreign Ministers' Meeting, EAM S Jaishankar says, "We've had discussions with Russia, Europe and Ukraine about three aspects of the current conflict. One, not to attack civilian shipping and seafarers. The second, to find a way by which the grain exports from both Russia and Ukraine—these are two major exporters of grain for the global markets—can be restored, because that flow has cut down very sharply in the Black Sea. And the third is with regard to energy. Non-attack on energy is probably the most complicated piece because it means different things to the different players. There is energy infrastructure itself. To some, it would mean a refinery; to some, it would mean grids. There would be issues relating to ships carrying fuel. So, we have been trying to see if we can get them together to address these issues..."
— ANI (@ANI) November 1, 2026
एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा सबसे जटिल मसला है, क्योंकि हर पक्ष के लिए इसके मायने अलग-अलग हैं. उन्होंने कहा, 'एनर्जी पर हमला न करना संभवतः सबसे पेचीदा हिस्सा है, क्योंकि अलग-अलग देशों के लिए इसके अलग अर्थ हैं. किसी के लिए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब रिफाइनरी हो सकता है, तो किसी के लिए पावर ग्रिड. इसके अलावा ईंधन ले जाने वाले तेल टैंकरों और जहाजों की सुरक्षा का मसला भी इसमें शामिल है.'
भारत इन सभी पक्षों को एक मेज पर लाने की कोशिश में जुटा है ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर न टूटे, क्योंकि ब्लैक सी सिर्फ रूस या यूक्रेन का रास्ता नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के कारोबार की लाइफलाइन है. अगर वहां कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में जरा भी रुकावट आई, तो समुद्री भाड़ा और इंश्योरेंस का खर्च आसमान छूने लगेगा, जिसका सीधा असर हमारे-आपके रोजमर्रा के सामानों के दाम पर पड़ेगा. यह ठीक वैसा है कि अगर रिफाइनरियों, पावर ग्रिड्स या तेल टैंकरों पर मिसाइलें गिरती रहीं, तो इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बेकाबू हो जाएंगी.