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रूस में लैब वर्कर की रहस्यमयी मौत पर WHO सख्त, मांगी रिपोर्ट, जानिए दुनिया के लिए क्यों बढ़ा खतरा?

रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय महिला शोधकर्ता की संदिग्ध स्थिति में मौत के बाद हड़कंप मच गया है. गंभीर निमोनिया के लक्षणों के चलते हुई इस मौत के बाद WHO ने रूस से पारदर्शी रिपोर्ट और पूरी जानकारी मांगी है.

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Oct 08, 2026, 11:51 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 11:57 PM IST
Image Credit: रूस में लैब वर्कर की मौत से हड़कंप: WHO ने कहा- रिस्क असेसमेंट अधूरा, मांगी तुरंत जानकारी!
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रूस के इरकुत्स्क में एक लैब कर्मचारी की गंभीर निमोनिया के बाद मौत हो गई. अब इस मौत को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रूस से अतिरिक्त जानकारी मांगी है. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन के पास अभी इस घटना की पूरी तस्वीर नहीं है, इसलिए इसके संभावित स्वास्थ्य जोखिम का पूरा आकलन करना संभव नहीं है.

टेड्रोस ने बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि 2 अक्टूबर को सामने आई शुरुआती खबरों में इरकुत्स्क एंटीप्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक महिला कर्मचारी में प्लेग की आशंका जताई गई थी. खबरों में दावा किया गया था कि लैब में दुर्घटनावश संक्रमण के संपर्क में आने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और गंभीर निमोनिया के कारण उसकी मौत हो गई. WHO के मुताबिक, रूस सरकार ने भी 2 अक्टूबर को एक बैठक की थी. इसमें इरकुत्स्क क्षेत्र के एक निवासी में खतरनाक संक्रमण की आशंका पर चर्चा की गई थी.

रूस ने प्लेग के मामले से किया इनकार

WHO ने 3 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत रूस से घटना से जुड़ी जानकारी मांगी थी. रूस ने मंगलवार को जवाब देते हुए बताया कि इरकुत्स्क क्षेत्र में हाल में प्लेग का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि, करीब 200 लोगों को निगरानी और क्वारंटीन में रखा गया था. WHO ने मृत कर्मचारी और उसके संपर्क में आए लोगों की लैब जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है. संगठन यह भी जानना चाहता है कि स्वास्थ्य संबंधी ये कदम किस आधार पर उठाए गए और संपर्क में आए लोगों की मौजूदा स्थिति क्या है.

दूसरे कर्मचारी की भी जांच

WHO ने उस रिपोर्ट की भी पुष्टि करने को कहा है जिसमें एक दूसरे कर्मचारी को अज्ञात कारणों से निमोनिया होने की बात कही गई थी. टेड्रोस ने कहा कि WHO ने रूस को प्लेग से जुड़े तकनीकी मामलों के साथ-साथ लैब की जैव सुरक्षा और जैव-सुरक्षा से जुड़े मामलों में मदद की पेशकश की है. उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी मिलने तक WHO इस घटना से जुड़े जोखिम का पूरी तरह से आकलन नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत समय पर, पूरी और पारदर्शी जानकारी साझा करना जरूरी है, ताकि विरोधाभासी रिपोर्टों की स्थिति साफ हो सके और संभावित स्वास्थ्य जोखिम का सही आकलन किया जा सके.

28 साल की लैब असिस्टेंट की हुई थी मौत

रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेब्नाडजोर (Rospotrebnadzor) के हवाले से यूरोन्यूज (Euronews) ने बताया कि मृत कर्मचारी दरिया शिपिलोवा 28 साल की थीं और इरकुत्स्क के एंटीप्लेग इंस्टीट्यूट में लैब असिस्टेंट के तौर पर काम करती थीं. एजेंसी के मुताबिक, शिपिलोवा के जैविक नमूनों की जांच में ऐसे किसी सूक्ष्मजीव का पता नहीं चला जो उनके काम से जुड़ा हो. संस्थान में रोग फैलाने वाले खतरनाक सूक्ष्मजीवों से जुड़ी किसी दुर्घटना की जानकारी भी नहीं मिली. शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को गंभीर निमोनिया के बाद मौत हुई थी. इससे पहले क्षेत्रीय सुरक्षा सेवाओं के करीबी अज्ञात सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया था कि लैब में एक टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद वह निमोनिक प्लेग के संपर्क में आई हो सकती हैं.

प्लेग का सबसे संक्रामक रूप है निमोनिक प्लेग

WHO के अनुसार, प्लेग एक बैक्टीरियल बीमारी है और इसके कई रूप होते हैं. इनमें निमोनिक प्लेग सबसे ज्यादा संक्रामक माना जाता है. यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है और समय पर एंटीबायोटिक इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है. रूस में 2014 से प्लेग के कुछ छिटपुट मामले सामने आए हैं. इनमें ज्यादातर संक्रमण कृंतकों से जुड़ा रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन मामलों को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है.

WHO ने मोटापे को लेकर भी जारी की नई गाइडलाइन

इसी मीडिया ब्रीफिंग में टेड्रोस ने बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे पर भी बात की. उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में इस आयु वर्ग में मोटापे की दर चार गुना बढ़ी है. यह 2 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई है. WHO के अनुसार, दुनियाभर में 17 करोड़ से ज्यादा बच्चे और किशोर अब मोटापे के साथ जी रहे हैं. नई गाइडलाइन में मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों के लिए खान-पान, व्यवहार और शारीरिक गतिविधियों में व्यवस्थित बदलाव की सलाह दी गई है. इसमें दवाओं, बैरियाट्रिक सर्जरी और वजन कम करने वाले उपकरणों से जुड़े विकल्पों का भी उल्लेख है. टेड्रोस ने कहा कि मोटापे के इलाज का मकसद केवल वजन कम करना नहीं होना चाहिए. ध्यान स्वास्थ्य, रोजमर्रा की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने पर भी होना चाहिए. WHO ने स्वस्थ खान-पान और शारीरिक गतिविधियों को लोगों के लिए सुलभ और किफायती बनाने वाली नीतियों पर भी जोर दिया है.

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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