अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका मध्यावधि चुनाव तक ईरान पर हमला नहीं करेगा. ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. ट्रंप के मुताबिक ईरान इस समय आर्थिक और सैन्य, दोनों मोर्चों पर बेहद खराब स्थिति में है. इसके बावजूद अमेरिका ईरान पर लगी नाकाबंदी को पूरी तरह लागू रखेगा.
ट्रंप ने कहा कि पिछले रात अकेले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रिकॉर्ड 2.2 करोड़ बैरल तेल गुजरा. उन्होंने दावा किया कि इस तेल में ईरान का कोई बैरल शामिल नहीं था और न ही कोई बैरल ईरान की ओर जा रहा था. ट्रंप ने अपने बयान में साफ कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा.
क्या डोनाल्ड ट्रंप मिड-टर्म चुनावों से पहले ईरान पर हमला न करने के अपने वादे पर कायम रहेंगे? #DonaldTrump #Poll #ZeeNews
— Zee News (@ZeeNews) October 8, 2026
ईरान ने चेतावनी दी है कि वह उन समुद्री रास्तों को बंद कर सकता है, जिन्हें उसकी मंजूरी नहीं मिली है. इससे तेल टैंकरों पर हमले और उन्हें डराकर रास्ता बदलने का खतरा बढ़ गया है. पिछले सप्ताह युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों पर हमले सबसे ज्यादा हुए. इसी दौरान इस अहम जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी दो महीने से ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.

ईरान ने खाड़ी के देशों को चेतावनी दी है कि तेल निर्यात के लिए नए समुद्री रास्ते बनाने की कोशिश को वह शत्रुतापूर्ण कदम मानेगा. ईरान के राजनीतिक नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखने की नीति तय की है. ऐसे में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले का खतरा बना हुआ है. नौकाओं के जरिए जहाजों को डराकर रास्ते से हटाने की आशंका भी जताई गई है.
खाड़ी के तेल उत्पादक देश हाल के महीनों में तेल की खेपों को होर्मुज के ओमान वाले हिस्से के करीब से ले जा रहे हैं. इसके बाद खुले समुद्र में तेल को दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया जा रहा है. इसी बीच कतर के तट से करीब 51 समुद्री मील दूर एक टैंकर पर कई प्रोजेक्टाइल दागे गए. हमले में चालक दल के कुछ सदस्य मामूली रूप से घायल हुए. इस घटना के बाद कतर के साथ बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत और इराक में भी समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.