PTI के 'तांडव मार्च' से शहजाब के छूटे पसीने: PAK सरकार को सता रहा सबसे बड़ा डर, नकवी बोले- ऐसा होने नहीं देंगे
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर एक बड़ा मार्च पीटीआई के नेतृत्व में निकाला जा रहा है. हजारों की संख्या में इमरान खान के समर्थक इसमें हिस्सा ले रहे हैं. गुरुवार को यह मार्च पेशावर पहुंच गया. समर्थकों का कहना है कि वह पूर्व पीएम रिहाई से अधिक कुछ नहीं चाहते हैं.
पाकिस्तान में पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई को लेकर उठी आवाज से पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ चिंता में आ गए हैं. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ता अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से कुछ दूर ही हैं. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की अगुवाई में यह मार्च रविवार (4 अक्टूबर) को लक्की मरवत से शुरू हुआ था और इसने कई बार अपना रास्ता बदला है.
दरअसल, पीटीआई के कार्यकर्ताओं का सीधा कहना है कि उन्हें इमरान खान की रिहाई से अधिक कुछ भी मंजूर नहीं है. यही कारण है कि पूर्व पीएम खान की रिहाई को लेकर हालात बिगड़ रहे हैं. फिलहाल इमरान के समर्थक इस्लामाबाद से केवल 180 किलोमीटर दूर हैं. पीटीआई के लॉन्ग मार्च से पाकिस्तान की शहबाज सरकार सकते में है. बताया जाता है कि इमरान के समर्थकों को पाकिस्तानी सरकार ने न्योता के लिए आमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया.
पाकिस्तान में बिगड़ रहे हालात
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर उठा हंगामा लगातार बढ़ रहा है. इस्लामाबाद की ओर जा रहा पीटीआई का लॉन्ग मार्च गुरुवार (08 अक्टूबर) को पेशावर पहुंचा और उम्मीद जताई जा रही है कि यहां से यह चारसड्डा की ओर आगे बढ़ेगा. अफरीदी ने कहा था कि वह आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे.
शहबाज शरीफ इस बात की जता रहे चिंता
सबसे खास बात है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का दावा है कि पीटीआई का लंबे समय तक चलने वाला ये प्रदर्शन पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाएगा. पीएम शहबाज शरीफ का कहना है कि पिछले ढाई साल से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का काम जारी है. उन्होंने कहा कि अगर इस प्रयास को रोका जाता है कि यह राज्य से दुश्मनी के बराबर होगी. शहबाज ने साफ किया कि उनका सरकार किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देगी.
पीटीआई के मार्च से क्यों घबरा रही शहबाज सरकार
कुछ जानकारों का मानना है कि इमरान समर्थकों के समर्थकों का लॉन्ग मार्च अब इस्लामाबाद से कुछ किलोमीटर ही दूर है. ऐसे में पेशावर पहुंचने के साथ मार्च शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा. ऐसे में अगर व्यापक समर्थन मिलता है कि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के लिए रोकना मुश्किल हो जाएगा. बहुत हद तक माना जा रहा है कि पेशावर से इस्लामाबाद तक पीटीआई के इस मार्च को समर्थन मिल सकता है. यही कारण है कि मार्च को लेकर शहबाज सरकार में हलचल बढ़ी है और इसको रोकने की कोशिश की जा रही है.
पाकिस्तान सरकार का सीधा फरमान
पीटीआई के समर्थक भले ही इस्लामाबाद की ओर कूच कर रहे हों, लेकिन पाक के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार किसी भी कीमत पर इस मार्च को इस्लामाबाद में घुसने की इजाजत नहीं देगी. नकवी की ओर से कहा गया कि इस मार्च को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पीटीआई अपनी मर्जी से राजधानी में कामकाज में बाधा डाल रही है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है.
इमरान खान 3 साल ले जेल में बंद, पत्नी भी कैद
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान (73) पिछले तीन साल से रावपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं. उनपर 100 से अधिक मामले दर्ज हैं. तीन मामलों में सजा भी सुनाई जा चुकी है, तो अन्य मामलों की अभी सुनवाई चल रही है. बता दें कि इमरान खान को अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, तोशाखाना केस में 3 साल और दस्तावेज लीक में 10 साल जेल की सजा मिली है. वहीं, उनकी पत्नी बुशरा भी तोशाखाना केस में अपनी सजा काट रही हैं.
इमरान के समर्थक क्यों कर रहे प्रदर्शन
पांच दिन पहले शुरू हुए इस मार्च की अगुवाई खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं. उन्होंने इस मार्च की सुनवाई करते हुए कहा कि यह इस्लामाबाद तक जाएगा और बिना इमरान की रिहाई के मार्च समाप्त नहीं होगा. हजारों की संख्या में पीटीआई के समर्थक इस मार्च में हिस्सा ले रहे हैं.
मार्च से पहले पीएम शहबाज शरीफ और पीटीआई के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला, जिसके बाद मार्च का आह्लान किया गया है. पीटीआई ने मांग रखी है कि इमरान खान की रिहाई के साथ उनका इलाज किसी निजी अस्पताल में कराया जाए. हालांकि, सरकार ने मांग मानने से इनकार किया और मार्च को समाप्त करने की बात कही.
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