एक मुस्लिम युवक ने विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य परिसर में प्रवेश करके इसकी धार्मिक गरिमा और नियमों का उल्लंघन करते हुए एक टिकटॉक वीडियो बनाया है. 'हिंदू सम्राट सेना नेपाल' ने पशुपति क्षेत्र विकास कोष को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन मुस्लिम युवाओं के संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश का कड़ा विरोध किया गया है, जहां गैर-हिंदू धार्मिक लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है. कोष ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और दोषी मुस्लिम युवक के खिलाफ कार्रवाई के लिए नेपाल पुलिस के साइबर ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई है.
पशुपतिनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश सख्त वर्जित है. यहां तक कि प्रवेश द्वार पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था, मुस्लिम युवा मंदिर परिसर में घुसने और टिकटॉक वीडियो बनाने में कामयाब रहे. इन वीडियो को ट्विटर पर @priyankashimzyan143 और @priyanka8389 ने शेयर किया है. पशुपतिनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था भी रहती है. इसके बावजूद मुस्लिम युवक के परिसर के भीतर पहुंचने और वीडियो बनाने का दावा किया गया है.
साल 1988 में राजीव गांधी सोनिया गांधी के साथ नेपाल दौरे पर गए थे. तब राजीव गांधी के नेपाल के राजा बिक्रम सिंह के साथ काफी अच्छे संबंध थे. ऐसे में राजीव गांधी सपरिवार पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने बिक्रम सिंह के साथ बात भी की थी. इसके बावजूद भी सोनिया गांधी को मंदिर में एंट्री से बैन कर दिया गया था. दरअसल पशुपतिनाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है. ऐसे में इस मामले में नेपाल के राजा बिक्रम सिंह भी राजीव गांधी की मदद नहीं कर पाए और मंदिर के पुजारियों को आदेश देने में असमर्थता जताई. इसके बाद वो बिना दर्शन किए ही भारत वापस लौट आए.
उस समय नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थिति पशुपतिनाथ मंदिर के प्रबंधन में राजा बिक्रम सिंह की पत्नी और नेपाल की तत्कालीन महारानी ऐशवर्या का काफी दखल रहता था और उन्हें भी गैर-हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश पर आपत्ति थी. राजीव गांधी के राजा बिक्रम सिंह से आग्रह किए जाने के बाद भी जब सोनिया के साथ उनके परिवार को मंदिर में एंट्री नहीं मिली थी तब ऐसा माना जाता है कि राजीव गांधी ने इसे अपने अपमान के तौर पर लिया था और वो मंदिर में पूजा अर्चना किए बिना ही भारत वापस लौट गए थे.
इसके बाद ही भारत की ओर से नेपाल पर नाकाबंदी लगा दी गई, राजीव गांधी के इस एक्शन को पशुपतिनाथ मंदिर में सोनिया गांधी को प्रवेश नहीं मिलने पर बदले के तौर पर देखा गया. हालांकि, ऐसा भी माना गया कि इस नाकाबंदी के पीछे की वजह नेपाल द्वारा चीन से विमानभेदी तोपों और अन्य हथियारों की खरीद भी रहा था.