पाकिस्तान ने बिजली पर झोंके 58 अरब डॉलर, लेकिन नहीं मिल रहा खरीदार! शहबाज को जनता ने दिखा दिया ठेंगा
कंगाली के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान एक बार फिर अपने अजीबोगरीब फैसले को लेकर सुर्खियों में है. पाकिस्तान ने 58 अरब डॉलर यानी लगभग 4 लाख 84 हजार करोड़ के नए बिजली प्लान को हरी झंडी दी है, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
कंगाली के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान एक बार फिर अपने हैरान करने वाले फैसले को लेकर सुर्खियों में है. मुल्क की हालत पहले से ही खस्ता है, बावजूद इसके शहबाज सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो किसी के गले नहीं उतर रहा. पाकिस्तान में पहले से लगे पावर प्लांट बिना काम के खाली पड़े हैं और सरकार उनका हर्जाना भर रही है. इस कंगाली के बीच सरकार 58 अरब डॉलर का नया बिजली प्लान लेकर आई है.
साल 2025-35 के लिए तैयार किए गए 58 अरब डॉलर के भारी-भरकम प्लान पर सवाल खड़े हो गए हैं. खुद पाकिस्तान के नियामक प्राधिकरण (NEPRA) के अधिकारियों ने इस पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
क्या है 58 अरब डॉलर का पावर प्लांट प्लान?
मालदीव इनसाइट की एक रिपोर्ट बताती है कि नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथॉरिटी (NEPRA) ने 11 सितंबर को 'इंटीग्रेटेड सिस्टम प्लान (ISP) 2025-35' को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है. इस योजना में 26,045 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने का टारगेट रखा गया है. अनुमान लगाया गया है कि साल 2035 तक देश की पीक डिमांड 35,521 मेगावाट तक पहुंचेगी.
इस प्लान को ग्रीन सिग्नल मिलते ही नियामक के भीतर भारी मतभेद सामने आए हैं. नेपरा के चेयरमैन समेत सभी 3 सदस्यों ने 45 पन्नों के आधिकारिक डॉक्यूमेंट में असहमति के साथ सलाह भी दर्ज कराई है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान को सच में उतनी बिजली चाहिए, जिसके लिए वह अरबों डॉलर का कर्ज और निवेश झोंक रहा है?
पाकिस्तान के सामने पहले से ही चुनौती
पाकिस्तान की मौजूदा हालत ये है कि उसका बिजली क्षेत्र कई सालों से कैपेसिटी चार्ज के जाल में फंसा हुआ है. इसका मतलब ये कि बिजली बने या न बने, सरकार को निजी कंपनियों को तयशुदा रकम देनी ही पड़ती है. अगर अनुमान के अनुसार मांग नहीं बढ़ी, तो नए पावर प्लांट और लाइनें पहले से खस्ताहाल सिस्टम पर भारी पड़ेंगे और इसका सीधा झटका जनता के बिजली बिल पर लगेगा.
क्या है सबसे कमजोर कड़ी?
इस पूरे प्लान की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी किसी से छिपी नहीं है. मुल्क में बिजली की खपत का पैटर्न तेजी से बदल रहा है. महंगी बिजली और बार-बार होने वाले पावर कट से परेशान आम आदमी ने अपनी छतों पर सोलर सिस्टम लगाने शुरू कर दिए हैं.
पाकिस्तान में लोग अब जरूरत के हिसाब से बिजली खुद ही बना ले रहे हैं. सौर ऊर्जा का हिस्सा अब कुल बिजली उत्पादन के 20% से ज्यादा हो चुका है. सरकारी और स्वतंत्र अनुमानों के मुताबिक, पाकिस्तान में सोलर उत्पादन कैपेसिटी 20 से 22 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 33 गीगावाट तक बताती हैं. इससे नेशनल ग्रिड पर उनकी डिपेंडेंसी कम हो रही है. यही वजह है कि पुराने ढर्रे पर बना पाकिस्तान का नया 58 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट देश के लिए एक 'सफेद हाथी' साबित हो सकता है.