लगता है पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद को मुल्क का प्रधानमंत्री समझने लगे हैं. तभी उन्होंने अपने लोगों को पदों पर बैठाना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान ने मिलिट्री के 9 रिटायर्ड अफसरों को विदेशों में राजदूत या उच्चायुक्त नियुक्त किया है. इसकी जानकारी विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने सीनेट में दी है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने विदेशों में अपने राजनयिक मिशनों के लिए 17 ऐसे राजदूतों और उच्चायुक्तों को नियुक्त किया है, जो पेशेवर डिप्लोमैट्स नहीं हैं. इनमें सेना के 9 रिटायर्ड सीनियर अफसर शामिल हैं.
अब इस खुलासे ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि पाकिस्तान अपने डिप्लोमैट्स का चयन कैसे करता है, और क्या पेशेवर फॉरेन सर्विस के अनुभव को दरकिनार करके मिलिट्री बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को तवज्जो दी जा रही है.
CNN-News18 के मुताबिक, लिस्ट में सेना के रिटायर्ड जनरल, एक एयर मार्शल और एक वाइस एडमिरल शामिल हैं, जिन्हें मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, यूरोप और एशिया में विभिन्न मिशनों पर तैनात किया गया है. इन नियुक्तियों से साफ हो गया है कि आज भी पाकिस्तान में सिर्फ सेना की ही चलती है, सरकार मुखौटा है.साथ ही, गैर-करियर राजनयिकों के चयन के मानदंडों के अलावा फॉरेन सर्विस के अफसरों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
यह जानकारी सीनेटर मुहम्मद तल्हा महमूद को दिए गए लिखिति जवाब में सामने आई है. सीनेटर ने विदेशों में तैनात नॉन-करियर डिप्लोमैट्स के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें उनके नाम, पेशेवर अनुभव, रहने की जगह और उनकी नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रियाएं शामिल थीं. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सीनेट के जवाब में जिन नौ रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों का नाम है, वे हैं:
यह लिस्ट कई इलाकों तक फैली हुई है, जिसमें पूर्व सीनियर मिलिट्री अधिकारियों को ऐसी भूमिकाओं में रखा गया है, जहां वे पाकिस्तान के प्रतिनिधि हैं.
सीनेट के जवाब में पाकिस्तान की फॉरेन सर्विस के बाहर के आठ अन्य लोगों की भी पहचान की गई है, जिन्हें राजनयिक पदों पर नियुक्त या नामित किया गया है. वे हैं:
कुल मिलाकर, इन 17 नियुक्तियों से पता चलता है कि पाकिस्तान राजनयिक प्रतिनिधित्व में किस हद तक गैर-करियर कर्मियों का इस्तेमाल करता है. हालांकि, इस खुलासे से यह पता नहीं चलता कि हर उम्मीदवार के चयन के लिए क्या मानदंड अपनाए गए थे, या क्या किसी नियुक्ति में तय प्रक्रिया को दरकिनार किया गया था.
9 रिटायर्ड सैन्य अफसरों की नियुक्ति से मेरिट और प्रोफेशनल डिप्लोमैटिक एक्सपीरियंस को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. पेशेवर डिप्लोमैट्स फॉरेन सर्विस में रहते हुए आमतौर पर वार्ताओं, अंतरराष्ट्रीय कानूनों, द्विपक्षीय रिश्तों और कॉन्सुलर अफेयर्स के जरिए अनुभव हासिल करते हैं. अब इस कैडर के बाहर की नियुक्तियों से यह सवाल खड़े होते हैं कि बिना ऐसे एक्सपीरियंस के ये रिटायर्ड सैन्य अफसर बाहरी मुल्क में अपने पद से न्याय कैसे कर पाएंगे.
पाकिस्तान की सेना का लंबे वक्त से मुल्क की सुरक्षा के अलावा सरकार पर भी दबदबा रहता है. राजनयिक मिशनों में रिटायर्ड सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी यह भी दिखाती है कि देश के बाहरी प्रतिनिधित्व में सेना की कितनी पहुंच है.