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ड्रैगन को मात: US-जापान मिलकर बनाएंगे घातक हथियार, आखिर क्या है 'ऑपरेशन सुपरचार्ज'; नया गठजोड़ देख टेंशन में चीन

जापान और अमेरिका 'ऑपरेशन सुपरचार्ज' प्लान पर काम करने जा रहे हैं. इस प्लान के तहत हवा से हवा में मार गिराने वाली मिसाइलों का उत्पादन जापान में किया जाएगा. फिलीपींस में दोनों दोनों देशों के बीच इस खास डील पर बात बनी है.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 29, 2026, 01:06 PM IST | Updated: Oct 29, 2026, 01:16 PM IST
Image Credit: चीन की बढ़ती आक्रमकता के बीच जापान और अमेरिका ने खास प्लान बना लिया. (फोटो- एआई)
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What is Operation Supercharge: चीन की लगातार बढ़ रही आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए जापान और अमेरिका ने एक अहम रक्षा समझौता किया है. आने वाले समय में दोनों देश मिलकर खास और एडवांस तकनीक पर आधारिक मिसाइलें बनाएंगे. हवा से हवा में मार गिराने वाली इन मिसाइलों का उत्पादन जापान में करने की योजना है. इसके लिए जापान में एक मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर बनाने की तैयारी है.

दरअसल, इस खास समझौते को लेकर जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी की ओर से बुधवार (28 अक्टूबर) को जानकारी दी गई. चीन पिछले कुछ समय से एशिया में लगातार अपनी सैन्य ताकत को दिखा रहा है. उसकी आक्रामकता को देखकर जापान जैसे देशों की चिंता बढ़ी है. इस बीच अमेरिका और जापान का यह कदम काफी महत्वपूर्ण है.

जापान और अमेरिका की अहम बैठक

फिलीपींस में हुई एक अहम बैठक के बाद जापान के रक्षा मंत्री ने इस समझौते के बारे में जानकारी साझा की. फिलीपींस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिंजिरो कोइजुमी ने बताया कि जापान और अमेरिका में मिसाइल उत्पादन के समझौते पर सहमति बनी है. इसी बैठक में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की मुलाकात हुई थी.

'ऑपरेशन सुपरचार्ज' पर काम करेंगे जापान- अमेरिका

जापान और अमेरिका के बीच बने इस खास मिसाइल प्रोजेक्ट का नाम 'ऑपरेशन सुपरचार्ज' रखा गया है. जापान के रक्षा मंत्री ने कहा कि ये खास प्रोजेक्ट एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए काफी अहम है. इस सेंटर में बनने वाली मिसाइलें खास तौर पर F-35 विमानों में इस्तेमाल की जाएंगी. हालांकि, इस दौरान जापानी रक्षा मंत्री की ओर से इस प्रोजेक्ट से जुड़ी बारीक जानकारी अभी साझा नहीं की गई है.

जापानी रक्षा मंत्री ने केवल इतना बताया कि मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर जापान में बनाया जाएगा. हालांकि, नया उत्पादन केंद्र जापान के किस शहर या इलाके में बनेगा, इसको लेकर जानकारी नहीं दी गई है. बता दें कि एफ-35 दुनिया के सबसे उन्नत और आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. इसका निर्माण फिलहाल अमेरिका में किया जा रहा है. जापान भी अपनी सुरक्षा के लिए इन्हीं लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करता है.

जापान और अमेरिका के मजबूत होते संबंध

फिलीपींस में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जापानी मंत्री ने बैठक के दौरान सुरक्षा पर लंबी चर्चा की. दोनों नेताओं ने एशिया में बिगड़ रहे सुरक्षा हालात पर चिंता भी जाहिर की. ऐसे में अमेरिका और जापान अपने पहले से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों का लक्ष्य अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाना है, जिससे वह किसी भी खतरनाक परिस्थिति में मजबूती से जवाब देने में सफल हो पाएं.

इस दौरान जापानी रक्षा मंत्री कोइजुमी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कानून पर आधारित होनी चाहिए और यह स्वतंत्र होनी चाहिए. जापानी रक्षा मंत्री ने ताकत और दबाव के दम पर एकतरफा बदलाव करने की कोशिशों की निंदा भी की. इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि उन्होंने यह बातचीत सीधे किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं कहीं.

अमेरिका का रुख बेहद सख्त

फिलीपींस में बुधवार (28 अक्टूबर) को आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक की मेजबानी फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो जूनियर की ओर से की गई. इस बैठक में अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

अमेरिका का रवैया मजबूत, शांत और स्पष्ट है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका इतना मजबूत बनना चाहता है, जिससे उसे कोई आंख उठाकर न देखे. इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया अमेरिका बेवजह तनाव और टकराव से बचना भी चाहता है.

अमेरिका का भरोसा- पूरी मदद करेंगे

वर्तमान स्थिति में दक्षिण चीन सागर में तनाव काफी बढ़ा है. ऐसे में अमेरिका ने अपने सबसे पुराने एशियाई सहयोगी फिलीपींस को पूरी मदद का भरोसा दिया है. अमेरिका ने स्पष्ट किया वह चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा. अमेरिका का कहना है कि दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार के लिए काफी अहम और जरूरी समुद्री रास्ता है.

इधर, इस पूरे इलाके पर चीन अपना दावा करता है. फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके कुछ हिस्सों पर अपना हक बताते हैं.  गौर करने वाली बात है कि हाल के समय में फिलीपीनी रक्षक बलों के बीच कई बार टकराव हो चुका है. ऐसे में अमेरिका ने सख्त लहजे में कहा कि अगर फिलीपींस की सेना या जहाजों पर हमला होता है, तो वह उसकी रक्षा करेगा. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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