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Flydubai Attack Case Attacker Co-pilot Identity: संयुक्त अरब अमीरात से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट फ्लाईदुबई (Flydubai) में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हो गई है. अल अरबिया इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर का नाम हम्मम अल-हमामी है और वह ओमान का रहने वाला है. उसने अपना अधिकांश समय सीरिया में बिताया था. वह शुरू से कट्टरपंथी इस्लामिक विचारों को मानने वाला रहा है. इसलिए उसे शुरू में प्लेन उड़ाने से प्रतिबंधित भी कर दिया गया था.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट हम्मम अल-हमामी का जन्म संयुक्त अरब अमीरात में एक ओमानई पिता और सीरियाई मां से हुआ था. उसने अपने जीवन के कई साल यूएई में बिताए थे. उसके विचार कट्टर इस्लामी चरमपंथ से भरे हुए थे. वह यहूदियों समेत गैर-मुसलमानों से नफरत करता था.
उसके इन्हीं चरमपंथी विचारों को देखते हुए ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन ने उसे विमान उड़ाने से प्रतिबंधित कर दिया था. इसके बाद एयरलाइन में उसे दूसरी भूमिका दी गई थी लेकिन उसे यह पसंद नहीं आया था.
ओमान में नौकरी छिनने के बाद हमामी ने ओमान छोड़ दिया और सीरिया चला गया. इस दौरान वह आईएसआईएस समेत अन्य चरमपंथी गुटों के संपर्क में आया, जिसके बाद वह जिहाद की आग में जलने लगा. इसके बाद अपना मकसद पूरा करने के लिए वह यूएई गया.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि संदिग्ध हमलावर ने केवल आठ महीनों के लिए फ्लाईदुबई के लिए काम किया था. वहीं, एक अन्य सूत्र ने कहा कि उसने फ्लाईदुबई से पहले रॉयल एयर मारोक के लिए काम किया था.
i24 न्यूज ने एक अमीराती सूत्र का हवाला देते हुए बताया कि हमलावर को-पायलट के सामान से फ्री फिलीस्तीन के पर्चे और फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिली थी. हमामी ने बार-बार फिलिस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन और इजरायल के प्रति नफरत जाहिर की थी. ऐसे में माना जा रहा है कि उसने जानबूझकर साजिश के तहत फ्लाईदुबई वाली फ्लाइट को उड़ाने की जिम्मेदारी हासिल की, जिससे उसमें सवाल इजरायल के 180 यात्रियों को मारा जा सके.
इस घटना से सन्न इजरायल की आंतरिक खुफिया एजेंसी शिन बेट, बाहरी मामलों को संभालने वाली मोसाद, सेना और परिवहन मंत्रालय समेत तमाम एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि ओमान का पायलट उड़ान दल का हिस्सा कैसे बना. वे यह जानना चाहती हैं कि फ्लाइट में ओमान के एक नागरिक को तेल अवीव जाने वाली उड़ान पर पायलट के रूप में सेवा देने की अनुमति कैसे दी गई. जबकि ओमान इजरायल को मान्यता नहीं देता है.
इसी बीच, द जेरूसलम पोस्ट ने जांचकर्ताओं के हवाले से स्पष्ट किया कि ओमान के को-पायलट के पास कोई दूसरी राष्ट्रीयता नहीं थी. वह ओमान का ही नागरिक था और उसके पास ओमान का ही पासपोर्ट था. अब जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या हाईजैकिंग कर प्लेन को क्रैश कराने की साजिश हमामी की खुद की थी या इसके पीछे दूसरे आतंकी संगठनों या देशों का हाथ था.
अगर घटना में किसी आतंकी संगठन या देश का नाम सामने आता है तो उसका इजरायल के निशाने पर आ जाना तय है. इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने एलान किया है कि वे इस घटना की तह तक जाएंगे और जो भी इसके पीछे होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा.
बताते चलें कि यह सनसनीखेज घटना 30 सितंबर को हुई थी. जब दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट में ओमान के सह-पायलट ने कॉकपिट में पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया था. उसने हमले के लिए कॉकपिट में पहले से मौजूद छोटी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया. इस दौरान उसने जोर-जोर से 'नारा ए तकबीर, अल्लाह ओ अकबर' के नारे भी लगाए.
एकाएक हुए हमले में बुरी तरह लहूलुहान होने के बावजूद पायलट कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहा, जिसके बाद प्लेन में मौजूद इजरायल के दूसरे यात्रियों ने हमलावर को काबू में कर लिया. प्लेन में सफर कर रहे दो ऑफ ड्यूटी पायलटों ने प्लेन का कंट्रोल संभाला और उसे पास में सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर लैंड करवाने में सफल रहे. जहां पर कैप्टन स्मित का इलाज किया गया. इसके बाद प्लेन में सवार 180 यात्रियों को दूसरे प्लेन से तेल अवीव भेज दिया गया.
अब कैप्टन स्मित को बेहतर इलाज के लिए तबुक से यूएई के दुबई शहर शिफ्ट कर दिया गया है. साथ ही ओमानी को-पायलट को भी यूएई को सौंप दिया गया है. जहां पर उससे विभिन्न एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं. वहीं कैप्टन स्मित की हालत अभी स्थिर लेकिन सुरक्षित बनी हुई है. पीएम मोदी ने वीडियो कॉल पर स्मित से बात करके उनका हौसला बढ़ाया. वहीं इजरायल समेत दुनियाभर में उनकी बहादुरी के लिए सराहना की जा रही है.
(एजेंसी ANI)