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7 अक्टूबर 2023 के बाद क्या मध्य पूर्व में बदले हालात? सात मोर्चों की इजरायल क्यों करता है बात

गाजा युद्ध की आज तीसरी बरसी है. इससे पहले इजरायली पीएम ने युद्ध के दौरान सात मोर्चों पर काम करने का जिक्र किया. इजरायली पीएम ने उन सभी बचे हुए हमलावरों को खोज निकालने का आदेश दिया है, जो 7 अक्टूबर 2023 के हमले में शामिल रहे थे.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 07, 2026, 08:44 AM IST | Updated: Oct 07, 2026, 08:56 AM IST
Image Credit: गाजा युद्ध की तीसरी बरसी आज. (फोटो- एआई)
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पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. ये युद्ध अभी नहीं शुरू हुआ बल्कि, तीन साल पहले एक ऐसा संघर्ष शुरू हुआ, जो अब तक जारी है. दुनिया के कई देशों ने इसे कूटनीतिक तरीके से समाप्त करने की कोशिश कराई, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा. आलम यह है कि ये संघर्ष अब सैन्य टकराव में बदल गया है, जो केवल गाजा और इजरायल के बीच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ गया है.

दरअसल, 07 अक्टूबर 2023 की सुबह इजरायल के लिए सामान्य नहीं थी. करीब तीन साल पहले एक ऐसा संघर्ष शुरू हुआ, जिसने एक बड़ा रूप ले लिया. इस दिन दक्षिणी इजरायल पर हुए हमले के बाद शुरू हुई सैन्य कार्रवाई धीरे-धीरे एक ऐसे क्षेत्रीय संघर्ष में बदल गई. अब इसके तार गाजा से निकल कर लेबनान, सीरिया, इराक, यमन और ईरान तक पहुंच चुके हैं. ऐसे में वेस्ट बैंक भी इस संघर्ष एक अहम कड़ी बन चुका है.

इजरायली पीएम ने किया सात मोर्चों का जिक्र

हमास हमले की पूर्व संध्या पर इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान सात मोर्चों का जिक्र किया. बता दें कि 7 अक्टूबर के बाद से ही इजरालय इसे सात मोर्चों की लड़ाई के रूप में देखता रहा है. इन मोर्चों में गाजा, वेस्ट बैंक, लेबनान, सीरिया, इराक, यमन और ईरान शामिल है.  बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले ने इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत की थी. हमले के बाद इजरायल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया. शुरू में लगा कि यह एक्शन कुछ समय में समाप्त हो जाएगा, लेकिन समय के साथ यह पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया.

बता दें कि हमास के अटैक के अगले दिन ही लेबनान स्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल के उत्तरी हिस्से में हमले शुरू किए थे. संगठन की ओर से इसको गाजा के समर्थन में किया गया एक्शन बताया. इसके बाद ही इजरायल की ओर से हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले शुरू किए गए. आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव में बदल गया. इस संघर्ष का सीधा असर दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है. ऐसे में हजारों इजरायली नागरिकों को उत्तरी इलाकों से हटाया गया और दक्षिणी लेबनान भी लगातार सैन्य कार्रवाई का क्षेत्र बन गया.

युद्ध में बड़ा विस्तार

साल 2024 के आखिरी में फिर युद्ध में एक बड़ा विस्तार देखने को मिला. यमन भी इसमें शामिल हो गया. हूती विद्रोहियों ने गाजा के समर्थन में इजरायल की ओर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. बाद में उनका निशाना लाल सागर से गुजरने वाले जहाज हो गए. इसके बाद से गाजा युद्ध का सीधा असर वैश्विक व्यापार तक पहुंच गया. लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अपना रास्ता बदलना पड़ा. यह पहला मौका था, जब इजरायल और हमास के बीच शुरू युद्ध का सीधा असर वैश्विक समुद्री मार्ग का मुद्दा बना.

लाल सागर की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के बीच अब लाल सागर और बाब अल-मंदेब की सुरक्षा फिर से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. हाल के समय में हूती गतिनिधियों और समुद्री मार्गों पर बढ़ते दबाव ने क्षेत्रीय संघर्ष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जोड़ा गया है. गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद इराक और सीरिया में सक्रिय ईरान समर्थिक मिलिशिया समूहों ने भी अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को निशाना बना शुरू किया था. साल 2023 के अंत में इन हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी थी.

साल 2024 में केवल ये युद्ध केवल इजरायल और गाजा के बीच में सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका भी अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्रीय संघर्ष में और गहराई से शामिल हो गया. इजरायल-हमास युद्ध अब केवल दो पक्षों का सैन्य टकराव नहीं रह गया था, बल्कि इसमें अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी तथा समर्थित समूह अलग-अलग स्तरों पर शामिल होते चले गए.

सीरिया भी बना इस संघर्ष का अहम मैदान

गौरतलब है कि समय बीतने के साथ सीरिया भी इस संघर्ष का एक अहम महत्वपूर्ण मैदान बन गया. ऐसा इसलिए, क्योंकि वहां ईरान से जुड़े सैन्य ढांचे और हथियारों की आपूर्ति को लेकर इजरायल लंबे समय से कार्रवाई करता रहा है. इस घटनाक्रम में बदलाव तब आया, जब इजरायल और ईरान के बीच वर्षों से चल रहा अप्रत्यक्ष संघर्ष सीधे सैन्य टकराव में बदल गया.

साल 2024 में ईरान ने इजरायल पर पहली बार बड़े पैमाने पर सीधे ड्रोन और मिसाइल से हमले दागे. इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव एक नई वास्तविकता बन गया. धीरे-धीरे संघर्ष का दायरा बढ़ा और 2025 और 2026 में ईरान  जुड़े घटनाक्रमों ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को अपने लपेटे में ले लिया। यही कारण है, अब यह सवाल नहीं बचा कि गाजा युद्ध कब समाप्त होगा, बल्कि अब सवाल खड़ा होने लगा कि इजरायल और ईरान के बीच तनाव किस स्तर तक जा सकता है।

तीन साल में क्या-क्या बदला?

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 से पहले भी पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच तनाव, हिजबुल्ला-इजरायल टकराव और यमन का संकट मौजूद था. हालांकि, तीन साल पहले की उस तारीख ने काफी कुछ बदला. इन अलग-अलग संघर्षों के बीच संबंध अधिक स्पष्ट और प्रत्यक्ष हो गए.

जहां एक ओर गाजा युद्ध जारी रहा, तो दूसरी तरफ लेबनान हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष, यमन के हूती हमले, इराक और सीरिया में ईरान समर्थिक समूहों की गतिविधियां और अंत में ईरान के साथ सीधा टकराव सामने आया. विश्लेषक इसको क्षेत्रीय संघर्ष के फैलाव के तौर पर देखते हैं. लाल सागर से लेकर होर्मुज स्ट्रेट तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा अब पश्चिम एशिया के युद्ध की व्यापक कहानी का हिस्सा बन गई है. (इनपुट- आईएएनएस)

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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