हवा नहीं, जहर सूंघ रहा लाहौर! 449 के पार पहुंचा AQI; घनी धुंध में गायब इमारतें, जानलेवा बने हालात
पाकिस्तान की हवा खराब हो चुकी है. लाहौर के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. वहां सांसों पर कितना संकट है, आइए जान लेते हैं...
वायु प्रदूषण का कहर सिर्फ राजधानी दिल्ली में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी दिख रहा है. पड़ोसी मुल्क की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने वाला लाहौर इन दिनों गैस चैंबर बन चुका है. वहां की आबोहवा जहरीली होती जा रही है. चारों तरफ स्मॉग ही स्मॉग नजर आ रहा है. 5 नवंबर को हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए कि सड़कों पर सामने की गाड़ियां दिखना बंद हो गईं. घनी धुंध में बड़ी इमारतें गायब हो गईं. हवा में घुले इस जहर ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है.
पंजाब एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के अनुसार, गुरुवार सुबह 11 बजे लाहौर का कुल AQI 312 पर पहुंच गया, जिसे 'बेहद खतरनाक' माना जाता है. शहर के कुछ इलाकों में तो सांस लेना तक मुश्किल हो गया है. वाघा बॉर्डर के पास AQI 212 था, जबकि काहना नौ इलाके में यह 449 के पार चला गया. वहीं इंटरनेशनल ट्रैकर IQAir के हिसाब से पूरे दिन शहर का AQI 195 से 364 के बीच ऊपर-नीचे होता रहा.
अस्पतालों में उमड़ी भीड़
जहरीली हवा का सबसे ज्यादा असर लोगों की सेहत पर दिख रहा है. लाहौर के अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में तेज जलन और इन्फेक्शन की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है.
गले में खराश और आंखों में जलन से जनता परेशान
हाल ही में बाईपास सर्जरी कराने वाले एक स्थानीय बुजुर्ग ने बताया कि जहरीले धुएं के चलते उनका दम घुट रहा है. आंखों में भारी इन्फेक्शन हो गया है. एक अन्य स्थानीय नागरिक ने पराली जलाने और धुआं उगलने वाले वाहनों पर तुरंत सख्त पाबंदी लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि इस दमघोंटू हवा की वजह से गले में खराश, नाक बंद होना और आंखों में लगातार जलन की समस्या आम हो चुकी है.
'कभी-कभी 1000 पार कर जाता है AQI'
लाहौर में जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है. एक डॉक्टर के मुताबिक, लाहौर का रोजाना का AQI वैसे तो 200 से 300 के आसपास रहता है, लेकिन कुछ मौकों पर यह 1,000 के पार भी चला जाता है. यह स्थिति खासकर पहले से दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.
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