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गाजीपुर में मां और बच्चों के पवित्र रिश्ते को शर्मसार करने वाले एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अपने ही तीन मासूम बच्चों को चाय में जहरीला पदार्थ मिलाकर पिलाने की दोषी सुनीता देवी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने अपने फैसले में मां के रिश्ते की गरिमा और बच्चों के भरोसे का जिक्र करते हुए इस अपराध को पूरी मानव सभ्यता को शर्मसार करने वाला बताया है.
शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि मामला 15 अगस्त 2022 का है. थाना सुहवल क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अभियुक्ता सुनीता देवी की शादी रेवतीपुर के सईताबाद निवासी बालेश्वर यादव से हुई थी. घटना से करीब एक महीने पहले वह अपने मायके ढढ़नी भानमल राय आ गई थी. उसके चार बच्चे थे, जिनमें तीन बेटे और एक बेटी शामिल थी. बताया गया कि घटना वाले दिन सुनीता देवी ने चाय में जहरीला पदार्थ मिलाकर अपने तीन बच्चों को पिला दिया. संयोगवश उसका सबसे छोटा बेटा दिव्यांशु उस समय अपनी नानी के साथ चला गया था, जबकि हिमांशु, प्रियांशु और सुप्रिया जहरीली चाय की चपेट में आ गए. इस घटना में हिमांशु और प्रियांशु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुप्रिया ने वाराणसी में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को पेश किया गया. गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्ता सुनीता देवी को दोषी करार दिया.
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गाजीपुर शक्ति सिंह की अदालत ने स्टेट बनाम सुनीता देवी, धारा 302 आईपीसी, थाना सुहवल के मुकदमे में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अदालत ने अपने फैसले में बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय समाज व्यवस्था में मां का स्थान बच्चों के लिए ईश्वर के समान माना जाता है. बच्चे अपने परिवार में सबसे ज्यादा भरोसा और सुरक्षा अपनी मां से महसूस करते हैं. ऐसे में जिस मां ने नौ महीने अपनी कोख में रखकर बच्चों को जन्म दिया, उसी के द्वारा उनके प्रति इतनी क्रूरता न केवल मां-बच्चों के रिश्ते, बल्कि पूरी मानव सभ्यता को शर्मसार करने वाली है.
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अखिलेश सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और सात गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया है. सजा सुनाए जाने के दौरान अभियुक्ता की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी.
(गाजीपुर से आलोक त्रिपाठी की रिपोर्ट)