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कोरोना महामारी को बना लिया अरबपति बनने का 'मौका', फर्जी टेस्ट करके लैब मालिक ने सरकार से बटोरे 418 करोड़ रुपये

अमेरिका में अरबपति बनने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी मेडिकल लैब के जरिए कोरोना की 3 लाख से ज्यादा फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार की. इसके बाद उन रिपोर्टों को सरकार को भेजकर 418 करोड़ रुपये ऐंठ लिए.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 23, 2026, 04:17 PM IST | Updated: Oct 23, 2026, 06:05 PM IST
Image Credit: यूएस में कोरोना जांच के नाम पर हुआ 418 करोड़ रुपये का नुकसान
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अमेरिका में कोरोना जांच से जुड़ा एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. पता चला है कि एक प्राइवेट लैब मालिक ने कोरोना महामारी की जांच के दौरान सरकार से समझौता कर जरूरतमंद लोगों की फ्री जांच की. इसके बाद 3.8 लाख लोगों की जांच का बिल बनाकर सरकार को भेज दिया. उसके बिल पर यकीन करके अमेरिकी सरकार ने करीब 629 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया. इसमें से 418 करोड़ रुपये फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले लैब मालिक को मिले.

मजे की बात ये भुगतान ऐसी जांच के लिए किया गया, जो लैब ने कभी किए ही नहीं. यानी उसकी ओर से भेजे गए सभी बिल फर्जी थे. अब अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी एफबीआई पूरे मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही है.

कोरोना महामारी को बना लिया अवसर

अमेरिकी न्याय विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरे घोटाले की विस्तार से जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस के इलिनॉइस में एक मेडिकल लैब है. इस लैब के मालिक पटेल सरनेम वाले कोई एनआरआई हैं. यह लैब कोरोना महामारी के दौरान लोगों के पीसीआर टेस्ट करती थी.

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जब अमेरिका में कोरोना का प्रकोप तेजी से फैलना शुरू हुआ वहां की जो बाइडेन सरकार ने सभी के लिए पीसीआर जांच अनिवार्य कर दी. लेकिन काफी लोग ऐसे थे, जिनके पास अपनी जांच करवाने के लिए पैसे नहीं थे. ऐसे में उन लोगों की मदद के लिए बाइडेन प्रशासन ने 'मेरिडियन मेडिकल स्टाफिंग इंक' को यह काम सौंप दिया. प्रत्येक मरीज की जांच के लिए एजेंसी को धनराशि रिफंड की जानी थी.

बिना टेस्ट के बनाकर भेज दी फर्जी रिपोर्टें

आरोप की पटेल की लैब ने अवसर देखकर 'मेरिडियन मेडिकल स्टाफिंग इंक' से संपर्क किया और उन्हें यकीन दिलाया कि उनकी प्रयोगशाला इस काम को बेहतर तरीके से कर सकती है. उस पर भरोसा करके एजेंसी ने लैब के साथ समझौता कर लिया.

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अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि समझौते के बाद लैब मैनेजमेंट ने जरूरतमंद लोगों की निशुल्क जांच करने के बजाय फर्जीवाड़े का खेल शुरू कर दिया. बयान के मुताबिक, लैब प्रबंधन ने मई 2021 से अप्रैल 2022 के बीच 3.8 लाख फर्जी कोरोना नेगेटिव टेस्ट रिजल्ट तैयार किए. इसके बाद 6.62 करोड़ डॉलर यानी लगभग 628.7 करोड़ रुपये का बिल बनाकर रिफंड के लिए 'यूएस हेल्थ रिसोर्सेज एंड सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन (HRSA) अनइन्श्योर्ड प्रोग्राम' को भेज दिया.

अमेरिकी सरकार से ऐंठ लिए 418 करोड़ रुपये

आरोप है कि लैब ने जिन लोगों की रिपोर्ट भेजी, उनमें से कईयों ने कभी भी उस लैब को सैंपल दिए ही नहीं थे या उक्त नामों के लोग अस्तित्व में ही नहीं थे. इस तरह फर्जीवाड़ा करके अमेरिकी सरकार से 4.41 करोड़ डॉलर यानी करीब 418 करोड़ रुपये का भुगतान हासिल कर लिया है. इस रकम में करीब 265 रुपये लैब के मालिक पटेल की जेब में गए.

इलिनॉइस के सहायक अटॉर्नी जनरल कोलिन एम. मैकडोनाल्ड का कहना है कि यह एक आर्थिक घोटाला ही नहीं है, बल्कि भरोसे का खून भी है. सरकार ने महामारी के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए यह प्रोग्राम शुरू किया था. लेकिन कुछ लोगों ने इस महामारी को भी पैसा बटोरने का जरिया बना लिया. कोरोना टेस्ट की फर्जी रिपोर्टें तैयार करके करदाताओं का पैसा लूट लिया गया. उन्होंने कहा कि एफबीआई इस मामले की विस्तार से जांच कर रही है और आरोपियों को इस घोटाले का खामियाजा भुगतना होगा. 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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