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भारत के लिए जरूरी या अमेरिका की मजबूरीः रूसी तेल पर ट्रंप के यू-टर्न की क्या है वजह? रुबियो ने किया खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले को फिलहाल के लिए टाल दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि 60 दिन बाद इस फैसले की समीक्षा होगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझने के लिए समय चाहिए कि इन परिस्थितियों में सही संतुलन क्या होगा और कौन-सा रास्ता सबसे बेहतर रहेगा.

Written ByK. Raj Mishra
Published: Oct 18, 2026, 01:01 PM IST|Updated: Oct 18, 2026, 01:19 PM IST
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भारत के लिए जरूरी या अमेरिका की मजबूरीः रूसी तेल पर ट्रंप के यू-टर्न की क्या है वजह? रुबियो ने किया खुलासा
Image Credit: रूसी तेल पर टैरिफ से ट्रंप के यू-टर्न की क्या है वजह? (AI Photo)

About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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रूस से डीजल की डील करके चौतरफा आलोचना झेल रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों को भी बड़ी राहत दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले पर रोक लगा दी है. उनके इस फैसले से भारत और चीन जैसे तमाम देशों को फायदा मिलेगा. ट्रंप के टू-टर्न की भी काफी चर्चा हो रही है. उन्होंने अचानक यह फैसला क्यों लिया? इसके बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुलासा किया है. रुबियो ने बताया कि रूस से जुड़े प्रतिबंधों के मामले में 60 दिन की छूट दी गई है. उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और वह अब भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक रूसी तेल पर निर्भर है. ऐसे में एक साथ टैरिफ और प्रतिबंध लागू करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. मार्को रुबियो ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझने के लिए समय चाहिए कि इन परिस्थितियों में सही संतुलन क्या होगा और कौन-सा रास्ता सबसे बेहतर रहेगा. रुबियो के बयान से लगता है कि ट्रंप अपने फैसले को लेकर काफी कन्फ्यूज हैं. वे अभी समझ नहीं पा रहे हैं कि टैरिफ लगाना सही होगा या नहीं.

टैरिफ पर ट्रंप का कन्फ्यूजन

ट्रंप के फैसले का बचाव करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका को इन कदमों के व्यापक आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए समय चाहिए. खासकर तब, जब मध्य पूर्व और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष पहले से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ रूस पर प्रतिबंधों का नहीं है. इसमें भारत समेत कई देशों पर लगने वाले टैरिफ भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों को तेल संकट से बचाने के लिए रूसी तेल खरीदने पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 60 दिनों बाद इसकी समीक्षा की जाएगी.

क्या भारत पर मंडरा रहा तेल संकट?

उन्होंने कहा कि इस वक्त दुनिया के तमाम देश युद्ध में उलझे हुए हैं. इससे ऊर्जा ढांचे को काफी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने वाली कई घटनाओं पर नजर रख रहा है. दुनिया के कई देशों में जारी संघर्षों के बीच ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना बहुत जरूरी है. रुबियो ने माना कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है लेकिन रूस से ऊर्जा आयात को तुरंत बंद करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में बदलाव किया है लेकिन फिर भी वे रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि एक दिन में पूरी व्यवस्था बदलना संभव नहीं होता. इसके साथ ही भारत अमेरिका का एक अहम मित्र और साझेदार भी है.

ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न?

बता दें कि यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं. उनकी यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स का मामना है कि टैरिफ के कारण है भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील रुकी हुई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने 60 दिन की मोहलत देकर एक बड़ा दांव चला है. पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार भी ऐसा ही मानते हैं. उन्होंने 18 सितंबर को पारित SRII (सैंक्शंस ऑन रशिया एंड ईरान एक्ट) के तहत एक महीने के भीतर कार्रवाई का प्रावधान था, लेकिन वाशिंगटन ने रणनीतिक कारणों से इसे स्थगित कर दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर प्रतिबंध नहीं लगा पाएगा.

भारत पर टिकी थीं सबकी निगाहें

उन्होंने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाल ही में अमेरिका गए थे और चीन को टैरिफ से राहत मिल गई थी. चीन के बाद सबकी नजर भारत पर थी. अब कहा गया है कि भारत पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि हम समझ रहे हैं कि अगले दो दिनों में मार्को रुबियो भारत आ रहे हैं. दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होने हैं. इसके अलावा अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं. इन सभी घटनाओं को देखते हुए भारत को नाराज करना, अमेरिका के लिए हित में नहीं होगा.

इनपुट- आईएएनएस

ये भी पढ़ें- ट्रंप का पुतिन को न्योता: G-20 में रूस की मौजूदगी पर अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान, क्या कहा?

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