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US Midterm Election: कौन हैं जॉर्जिया की पहली महिला और पहली अश्वेत गवर्नर कीशा बॉटम्स? डेमोक्रेट्स के गढ़ में तोड़ा 24 साल पुराना रिकॉर्ड

जॉर्जिया में 24 साल बाद डेमोक्रेट उम्मीदवार ने रिपब्लिकन के किले को ढहाया है. इस राज्य में अश्वेत महिला केशा लेंस बॉटम ने गवर्नर पद का चुनाव जीता है. इसके साथ ही केशा अमेरिकी इतिहास में गवर्नर चुनी जाने वाली पहली अश्वेत महिला बन गई हैं.

Written By Shruti Kaul
Published: Nov 04, 2026, 01:00 PM IST | Updated: Nov 04, 2026, 01:12 PM IST
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Keisha Lance Bottoms: अमेरिका में डेमोक्रेट केशा लेंस बॉटम ने मिड टर्म इलेक्शन में जॉर्जिया के गवर्नर और रिपब्लिकन उम्मीदवार रिक जैक्सन को 8.4 प्रतिशत के मार्जिन के अंतर से हराया है. इसके साथ उन्होंने एकसाथ 2 इतिहास रच दिए हैं. केशा अमेरिकी इतिहास में गवर्नर चुनी जाने वाली पहली अश्वेत महिला बन चुकी हैं और उन्होंने जॉर्जिया में पिछले 24 सालों से गवर्नर पद पर रिपब्लिकन पार्टी के कंट्रोल को भी समाप्त कर दिया है.  

56 साल की केशा बॉटम्स इससे पहले अटलांटा की मेयर रह चुकी हैं. साथ ही वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सीनियर एडवाइजर और व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ पब्लिक एंगेजमेंट की डायरेक्टर भी रह चुकी हैं. अमेरिकी राजनीति में अश्वेत महिलाओं ने हमेशा से अहम रोल निभाया है, लेकिन देश के सबसे बड़े चुने हुए पदों पर उनका प्रतिनिधित्व बेहद कम है.    

कैसा रहा केशा लांस बॉटम्स का राजनीतिक सफर? 


केशा लांस बॉटम्स साल 2018-2022 तक जॉर्जिया के अटलांटा की मेयर रह चुकी हैं और अटलांटा सिटी काउंसिल के सदस्य समेत शहर में कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली है. वह बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन में साल 2022 में ऑफिस ऑफ पब्लिक लाइजन की डायरेक्टर और साल 2023 से प्रेसिडेंट की एक्सपोर्ट काउंसिल में शामिल रही हैं. साल 2025 में उन्हें ट्रंप के ऑफिस से निकाल दिया गया. 

2020 के प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के दौरान बॉटम्स को बाइडेन का रनिंग मेट माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें मार्च 2022 में इस पद के लिए एक महिला को चुनने का वादा किया गया था. बाद में यह पद कमला हैरिस को दे दिया गया.

रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्य में कैसे जीतीं केशा? 


केशा बॉटम्स ने रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्य में जीत के लिए अफोर्डिबिलिटी और इकोनॉमिक मुद्दों पर फोकस करने वाले मैसेज पर जोर दिया. उन्होंने ऐसे ऐड भी चलाए, जिनमें जैक्सन पर डेटा सेंटर बनाने के सपोर्ट में पिछली टिप्पणियों को लेकर निशाना साधा गया. इन टिप्पणियों को ट्रंप से भी जोड़ा गया. इसके चलते जैक्सन को कम अप्रूवल रेटिंग का सामना करना पड़ा. इसके अलावा जैक्सन ने रिपब्लिकन प्राइमरी कैंपेन के दौरान काफी बार अपनी तुलना ट्रंप से की थी, जिससे बॉटम्स को आम चुनाव में उनके खिलाफ अपने ही कई शब्दों का इस्तेमाल करने का मौका मिला. 

 

बॉटम्स ने पिछले महीने इलेक्शन डिबेट के दौरान जैक्सन की आलोचना करते हुए कहा था कि वह ट्रंप के पसंदीदा गवर्नर बनना चाहते हैं. उन्होंने जैक्सन को 2020 के चुनाव के नतीजों पर शक पैदा करने की ट्रंप की सालों पुरानी कोशिशों से भी जोड़ने की कोशिश की.    

बॉटम की जीत से US पॉलिटिक्स में अश्वेत महिलाओं का बढ़ता प्रभाव


अमेरिकी इतिहास में अब तक डगलस वाइल्डर, डेवल पैट्रिक और वेस मूर जैसे केवल पुरुष ही अश्वेत गवर्नर चुने गए हैं.  ऐसे में केशा लेंस बॉटम्स ने इस ऊंचे स्तर पर पहुंचने से अश्वेत महिलाओं के लिए अमेरिका में दशकों से बड़े पोजीशन से दूर अश्वेत महिलाओं के लिए रास्ता खोला है. अमेरिका में शक्तिशाली राजनीतिक मंचों पर अब तक किसी अश्वेत महिला को प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, जिसे इस जीत ने पूरी तरह बदल दिया है.

केशा की जीत ट्रंप के लिए कितना बड़ा राजनीतिक झटका? 


ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव में जॉर्जिया से रिपब्लिकन उम्मीदवार रिक जैक्सन का खुलकर समर्थन किया था. वहीं जॉर्जिया में  24 साल यानी 1998 के बाद से किसी भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को जीत नहीं मिली थी. ऐसे में रिपब्लिकन के लिए यह हार ट्रंप के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है. वहीं, रिक जैक्सन को काफी समर्थन देने के बावजूद यह हार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की राजनीतिक साख को कमजोर कर सकती है. इस हार से ट्रंप की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचा है.  

बॉटम की जीत से व्हाइट के प्रति नीतियों में बदलाव


अमेरिका में चुनाव के नतीजे या किसी एक राज्य के गवर्नर की जीत का प्रभाव वहां की नीतियों पर पड़ता है न की पूरे देश की नस्ल पर. ऐसे में कीशा लेंस बॉटम की जीत से व्हाइट्स के प्रति नीतियों में कोई बदलाव नहीं आएगा. 

 'जॉर्जिया रिकॉर्डर' की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉटम का फोकस किसी खास नस्ल या समूह के खिलाफ नीतियां बनाने के बदले राज्य के सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर है. खासतौर से मेडिकल सर्विस का विस्तार, शिक्षकों के वेतन में वृद्धि, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाना और टैक्स के बोझ को कम करना उनकी प्राथमिकता है. 

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ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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