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क्या पिज्जा पर अनानास डालने से किसी देश की संस्कृति का अपमान हो सकता है? ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में ऐसा ही हुआ है. यहां एक इटैलियन शेफ ने जब पाइनएप्पल पिज्जा बनाने से इनकार किया तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया. इसके खिलाफ वह सीधे फेयर वर्क कमीशन पहुंचा और उसे वहां से भी झटका लगा. रेस्टोरेंट का दावा है कि बात सिर्फ पिज्जा की टॉपिंग की नहीं थी, मसला शेफ को आने वाले गुस्से और उसके भड़कने की आदत का भी था.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला मई 2026 का है, जब शेफ डेविड ताम्बुरेला को ब्रिस्बेन के 'ला कोस्टा' (La Costa) रेस्टोरेंट ने नौकरी से निकाल दिया था. यह रेस्टोरेंट अब बंद हो चुका है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कामकाज और बर्ताव से जुड़ी कई शिकायतों को लेकर मैनेजमेंट ने एक मीटिंग बुलाई थी. इसके करीब दो हफ्ते बाद शेफ को हटाने का फैसला लिया गया.
इन शिकायतों में सबसे अजीब मामला एक प्राइवेट पार्टी का था. वहां आए मेहमानों के लिए डेविड ने 'हैम और पाइनएप्पल' पिज्जा बनाने से साफ मना कर दिया था. शेफ ने मैनेजमेंट को दो-टूक जवाब दिया था कि अगर कोई काम उनकी संस्कृति के खिलाफ जाता है, तो उसे मानना उनके लिए बिल्कुल जरूरी नहीं है. इसके बाद उसकी नौकरी चली गई.
यह मामला तब सामने आया जब शेफ डेविड ताम्बुरेला ने अपनी बर्खास्तगी को गलत बताते हुए ऑस्ट्रेलिया के 'फेयर वर्क कमीशन' का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें वहां भी हार मिली. मंगलवार को सामने आए फैसले के अनुसार, अर्जी देने में देर होने की वजह से कमीशन ने उनका केस खारिज किया, न कि उनके तर्क के आधार पर.
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में बताया कि ताम्बुरेला ने पिज्जा पर अनानास लगाने से इसलिए इनकार किया, क्योंकि एक इटैलियन होने के नाते वे इसे अपनी संस्कृति का अपमान मानते हैं. आयोग ने यह भी साफ किया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. पिछले चार सालों में शेफ कम से कम तीन बार पिज्जा पर अनानास (पाइनएप्पल) डालने से साफ मना कर चुके थे. उन्होंने तो अपने मालिक से यहां तक कह दिया था कि वे पहले इस बात की पड़ताल करें कि इटली के लोगों के लिए पिज्जा पर पाइनएप्पल न होना कितनी बड़ी बात है.
मजे की बात यह है कि जिस क्वींसलैंड में यह रेस्टोरेंट है, उसे ऑस्ट्रेलिया का 'पाइनएप्पल हब' कहा जाता है, यानी देश भर में बिकने वाला लगभग सारा अनानास इसी राज्य में उगता है.
ला कोस्टा रेस्टोरेंट के प्रबंध निदेशक इलियट इनग्राम ने बताया कि इस पूरे मामले के पीछे सिर्फ पिज्जा की टॉपिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य पहलू भी शामिल थे. आयोग के फैसले में शेफ ताम्बुरेला की गाली-गलौज, बदतमीजी से बात करने और काम के दौरान आपा खो देने की पुरानी शिकायतों का भी जिक्र है. रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इसी साल अप्रैल में गुस्से के चलते उन्होंने लोहे की रेलिंग पर इतनी जोर से हाथ दे मारा था कि उनके दाहिने हाथ की हड्डी तक टूट गई थी.
नौकरी गंवाने वाले शेफ को भरोसा था कि रेस्टोरेंट उनके वीजा को स्पॉन्सर कर देगा और उन्हें ऑस्ट्रेलिया की PR यानी परमानेंट रेसिडेंसी मिल जाएगी. मगर नौकरी जाते ही रेस्टोरेंट ने वीजा की फाइल रोक दी. इसके बाद शेफ मामले को लेकर फेयर वर्क कमीशन पहुंचे, लेकिन वहां अर्जी देने में देर हो गई. तय समय निकल जाने की वजह से कमीशन ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उन्हें कानूनी तौर पर भी बड़ा झटका लगा.
लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, डेविड ताम्बुरेला ने ला कोस्टा रेस्टोरेंट में 3 साल से ज्यादा समय तक काम किया था. वे खुद को एक ऐसा शेफ बताते हैं, जिनका पूरा करियर बेहतरीन खाना खिलाने और रेस्टोरेंट के बिजनेस को चमकाने पर केंद्रित रहा है. कुछ महीने पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर शेफ्स के लिए एक पत्र भी साझा किया था, जिसका मुख्य विषय 'खाने की सामग्रियों (इंग्रीडिएंट्स) का सम्मान करना' था.